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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अमेरिकी नीतियाँ भारतीय आईटी इंडस्ट्रीज के लिये खतरा

  • 13 Jun 2017
  • 5 min read

संदर्भ

  • भारतीय आईटी कंपनियों के लिये, जिन्होंने खुली सीमाओं पर अपनी सफलता बनाई है, अब यह स्वीकार करते हैं कि ट्रंप उनके सबसे बड़े खतरे में से एक हैं। भारतीय आईटी कंपनी विप्रो ने अपने एक रिपोर्ट में इस संभावना  को व्यक्त किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय आईटी इंडस्ट्रीज़  के लिये एक बड़ा खतरा है। विप्रो ने उन्हें चालीस जोखिमों में से पाँचवा स्थान दिया है। 

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय सॉफ्टवेयर  कंपनी विप्रो ने प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग के साथ अपने वार्षिक फाइलिंग में जोखिम कारकों की सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप का नाम ऊपर रखा है। विप्रो ने  40 से अधिक जोखिम कारकों की सूची में ट्रंप को  पाँचवे स्थान पर रखा है।
  • इस आईटी कंपनी द्वारा यह बताया गया है कि पश्चिमी देशों द्वारा अपनाया जा रहा संरक्षणवाद  भारतीय आउटसोर्सिंग उद्योग के हित में नहीं है।
  • विप्रो ने चेतावनी दि है कि व्यापार समझौतों को प्रभावित करने वाली नीतियों को  ट्रंप का समर्थन और मुक्त व्यापार के लिए  उनकी आलोचना, विप्रो के व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
  • यह चेतावनी दो कारणों से गौर करने लायक है – पहला, विप्रो ने ट्रंप को चालीस जोखिमों  में से पाँचवे स्थान पर रखा है तथा प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने उसे महत्त्व के आधार पर जोखिमों का  रैंक तय करने को कहा था।  
  • दूसरा,  यह मुद्दा विप्रो की वैश्विक आजीविका नीतियों में बदलाव के बारे में चिंता से अलग है, जो कि भारतीय कर्मचारियों के लिये अन्य देशों में जाने के लिये जहाँ उन्हें आम तौर पर स्थानीय कामगारों से कम भुगतान किया जाता है, कंपनी की वीज़ा  प्राप्त करने  की क्षमता का निर्धारण करती है। 
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़  और इंफोसिस के बाद विप्रो 21 अरब डॉलर के साथ बेंगलुरु स्थित इस क्षेत्र में तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है।
  • विप्रो के आईटी सेवा प्रभाग में  राजस्व के आधे से ज़्यादा हिस्सा अमेरिका में आईटी सेवाओं के बदले प्राप्त होता है, जो कंपनी की संपूर्ण परिचालन आय के बराबर है। 
  • इतना ही नहीं , बल्कि विप्रो का लगभग 16% आय स्वास्थ्य सेवा और जीवन-विज्ञान सेगमेंट से आता है, जहाँ ट्रंप के द्वारा  ओबामा केयर के रूप में जाना जाने वाले किफायती देखभाल अधिनियम को निरस्त करने की संभावना के कारण कारोबार अनिश्चित दिख रहा है। इसलिये आईटी इंडस्ट्रीज़  अब onshoring एवं स्थानीयकरण के बारे में बात कर रहा है। इन्फोसिस ने दो साल में 10,000 अमेरिकी लोगों की नियुक्ति करने की योजना की घोषणा की है।
  • इस तरह की पहल थोड़ी मदद कर सकती है, लेकिन आखिरकार वे लागत को बढ़ा सकते हैं और मुनाफे को कम कर  सकते हैं। हालाँकि, ट्रंप की नीतियों से अभी तक गंभीर क्षति नहीं हुई है और आउटसोर्सिंग जारी है, परन्तु अमेरिकी नीतियों का प्रभाव अवश्य पड़ेगा।
  • खबरों के मुताबिक एक अमेरिकी गृह-सुधार रिटेलर ‘लोवे’ ने अमेरिका में अपने कुछ गृह कर्मचारियों की छंटनी करने और कुछ आईटी पदों को भारत में स्थानांतरित करने का फैसला किया है। इस बीच, गोल्डमैन सैक्स भी बेंगलुरु में 9,000 लोगों के लिये  एक विशाल परिसर का निर्माण कर रहा है। 

निष्कर्ष

  • आउटसोर्स के क्षेत्र में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिये यह शुभ संकेत नहीं है।  ये कंपनियाँ जिन्होंने कभी  खुली सीमाओं  के कारण अपनी सफलता बनाई, अब यह स्वीकार करती  हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी संरक्षणवादी  नीतियाँ  उनके सबसे बड़े खतरों में से एक है।
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