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भारतीय फुटवियर और चमड़ा विकास

  • 17 Dec 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारतीय फुटवियर और चमड़ा विकास कार्यक्रम योजना

मेन्स के लिये:

चमड़ा उद्योग, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2026 या अगली समीक्षा तक 'भारतीय फुटवियर और चमड़ा विकास कार्यक्रम (Indian Footwear and Leather Development Programme- IFLDP)' योजना को जारी रखने की मंज़ूरी दी है।

  • IFLDP को पूर्ववर्ती IFLADP (भारतीय फुटवियर, चमड़ा और सहायक उपकरण विकास कार्यक्रम) की निरंतरता के रूप में अनुमोदित किया गया था

भारतीय फुटवियर और चमड़ा विकास कार्यक्रम (IFLDP): 

  • परिचय: 
    • यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य चमड़ा क्षेत्र के लिये बुनियादी ढाँचे का विकास करना, चमड़ा क्षेत्र की विशिष्ट पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करना, अतिरिक्त निवेश की सुविधा, रोज़गार सृजन और उत्पादन में वृद्धि करना है।
    • इसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • उप-योजनाएँ: 
    • सतत् प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संवर्द्धन (STEP)
    • चमड़ा क्षेत्र का एकीकृत विकास (IDLS)
    • मेगा लेदर फुटवियर और एक्सेसरीज़ क्लस्टर डेवलपमेंट (MLFACD)
    • संस्थागत सुविधाओं की स्थापना (EIF)
    • फुटवियर और चमड़ा क्षेत्र में भारतीय ब्रांडों का ब्रांड प्रचार
    • फुटवियर और चमड़ा क्षेत्र में डिज़ाइन स्टूडियो का विका

तत्कालीन IFLDP का प्रभाव: 

  • यह कार्यक्रम विशेष रूप से महिलाओं के लिये गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन, कौशल विकास, अच्छे काम, उद्योग को पर्यावरण के अधिक अनुकूल बनाने और एक स्थायी उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देने हेतु लक्षित है।
  • देश भर में फैले चमड़े के उत्पादन से संबंधित क्षेत्रों ने सतत् विकास लक्ष्यों में योगदान देकर लैंगिक समानता, गरीबी में कमी, क्षेत्र-विशिष्ट कौशल/शिक्षा के क्षेत्र में लाभान्वित किया है।
  • अन्य राष्ट्रीय विकास योजनाएँ (NDPs) जैसे कि आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन, अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण, बुनियादी अवसंरचना विकास, सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा तथा अन्य पर्यावरणीय लाभ IFLAD कार्यक्रम के माध्यम से अच्छी तरह से प्रदान किये जाते हैं।

भारत के चमड़ा उद्योग की वर्तमान स्थिति: 

  • भारत में चमड़ा उद्योग की हिस्सेदारी वैश्विक चमड़ा उत्पादन का लगभग 13% है और यहाँ लगभग 3 बिलियन वर्ग फीट चमड़े का वार्षिक उत्पादन होता है।
  • यह उद्योग उच्च निर्यात आय में अपनी निरंतरता के लिये जाना जाता है और यह देश के लिये शीर्ष 10 विदेशी मुद्रा अर्जकों में से एक है।
  • भारत में चमड़े संबंधी कच्चे माल की प्रचुरता है और इसका कारण है कि भारत में विश्व के 20% मवेशी और भैंस तथा 11% बकरी और भेड़ की आबादी है।
  • चमड़ा उद्योग एक रोज़गार सघन उद्योग है जो 4 मिलियन से अधिक लोगों को रोगार प्रदान करता है, जिनमें से अधिकांश समाज के कमज़ोर वर्गों से हैं।
    • लगभग 30% हिस्सेदारी के साथ चमड़ा उत्पाद उद्योग में महिला रोज़गार प्रमुख है।
    • भारत के चमड़ा उद्योग में 35 वर्ष से कम आयु के 55% कार्यबल के साथ सबसे कम उम्र का कार्यबल है।
  • वर्ष 2022 तक भारत दुनिया में जूते और चमड़े के कपड़ों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, चमड़े के कपड़ों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक और चमड़े की वस्तु एवं एक्सेसरीज़ का पाँचवाँ सबसे बड़ा निर्यातक है।
  • भारत में चमड़े और जूते के उत्पादों के प्रमुख उत्पादन केंद्र तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में स्थित हैं।
  • भारतीय चमड़ा और फुटवियर उत्पादों के प्रमुख बाज़ार अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, फ्राँस, स्पेन, नीदरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, हॉन्गकॉन्ग, बेल्जियम और पोलैंड हैं।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से चमड़ा और चमड़े के उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक है तथा अप्रैल-अगस्त 2022 के दौरान देश के कुल चमड़े के निर्यात का 25.19% का निर्यात किया गया

स्रोत: पी.आई.बी.

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