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भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय लेखा मानक

  • 13 Jun 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) बैंकिंग निगरानी पर बेसल समिति (Basel Committee on Banking Supervision) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय कठिनाई की परिभाषा को संरेखित करने की योजना बना रहा है।

  • इससे पहले RBI द्वारा वित्तीय कठिनाई के लक्षणों की एक अपरिपूर्ण सूची भी जारी की गई थी।

वित्‍तीय कठिनाई के लक्षणों की अपरिपूर्ण संकेतक सूची

  • नकदी ऋण/ ओवरड्राफ्ट खातों में अनियमितता जैसे- निर्धारित मार्जिन आधार रखने में अक्षम होना अथवा मंज़ूर सीमा से अधिक आहरण, नामे किये गये आवधिक ब्‍याज की वसूली नही़ हुई है;
  • सावधि ऋणों पर मूल राशि और ब्याज की किश्‍तों का सामयिक भुगतान करने में असफलता/प्रत्‍याशित असफलता;
  • देय किश्‍तों, साख पत्र/बैंक गारंटी के अंतर्गत कुल देयताओं आदि के भुगतान के प्रति प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में देरी;
  • अत्‍यधिक लीवरेज (Leverage);
  • वित्तीय ऋण प्रसंविदाओं को पूरा करने में असमर्थता;
  • सांविधिक देयताओं के भुगतान में विफलता,परिचालनगत ऋणदाताओं को बिलों का भुगतान न करना आदि;
  • गलत स्‍टॉक विवरणियों (Returns) और अन्‍य नियंत्रण विवरणियों को प्रस्‍तुत करना अथवा उक्‍त को प्रस्‍तुत नहीं करना या प्रस्‍तुतीकरण में अनुचित देरी, वित्तीय विवरणियों और प्रतिकूल रूप से पात्र वित्तीय विवरणियों के प्रकाशन में विलंब;
  • उत्‍पाद के आँकड़ों में तीव्र गिरावट, बिक्री में गिरावट की प्रवृत्ति और लाभ में कमी, मार्जिन कम होना आदि;
  • कार्यशील पूंजी चक्र का दीर्घकाल चलना, माल-सूची को अत्यधिक बढ़ाकर दिखाना;
  • परियोजना कार्यान्‍वयन में गंभीर विलंब;
  • आंतरिक/बाह्य रेटिंग/ रेटिंग परिप्रेक्ष्‍य में गिरावट
  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय लेखा मानक (Indian Accounting Standard-Ind AS) के मानदंडों को फिर से लागू करने की योजना बनाई है।
  • इससे पहले RBI ने अनिश्चित काल के लिये Ind AS मानदंडों को स्थगित कर दिया था, जो 1 अप्रैल, 2019 से लागू होने वाले थे।
  • यह इस तरह स्थगित होने वाला दूसरा कदम था, बैंकों द्वारा अप्रैल 2018 से इंड ए.एस. (Ind AS) को लागू किया जाना था, बैंकों द्वारा वित्तीय विवरणों के प्रारूप को Ind AS के अनुरूप तैयार करने के लिये विधायी संशोधनों की भी आवश्यकता थी।

भारतीय लेखा मानक

Indian Accounting Standards (Ind AS)

  • ये लेखांकन मानकों का एक समूह हैं जो वित्तीय लेनदेन के लेखांकन और अभिलेखों के साथ ही लाभ-हानि खाते और कंपनी के तुलन पत्र (Balance Sheet) जैसे विवरणों की प्रस्तुति को नियंत्रित करते हैं।
  • इन मानकों को वर्ष 1977 में एक निकाय के रूप में गठित लेखा मानक बोर्ड (Accounting Standards Board-ASB) द्वारा तैयार किया गया था। ASB, ICAI (Institute of Chartered Accountants of India) के अंतर्गत गठित एक समिति है जिसमें सरकारी विभागों, शिक्षाविदों, अन्य पेशेवर निकायों जैसे ASSOCHAM, CII, FICCI, आदि के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
  • Ind AS को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानक (IFRS) के अनुसार तैयार किया गया है

उद्देश्य

  • इस मानक का उद्देश्य प्रतिष्ठान का पृथक वित्तीय विवरण तैयार करते समय अनुषंगियों (Subsidiaries), संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) तथा सहयोगी प्रतिष्ठानों (Associates) में किये जाने वाले निवेश तथा प्रकटन अपेक्षाओं का निर्धारण करना है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानक

(International Financial Reporting Standards-IFRS)

  • यह अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानक बोर्ड (International Accounting Standards Board- IASB) द्वारा जारी किया गया एक लेखा मानक है जिसका उद्देश्य वित्तीय जानकारी की प्रस्तुति में पारदर्शिता लाने के लिये एक सामान्य लेखांकन भाषा उपलब्ध कराना है।
  • IASB एक स्वतंत्र निकाय है जिसका गठन वर्ष 2001 में IFRS की स्थापना के लिये किया गया था। इसने अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानक समिति (International Accounting Standards Committee-IA SC) का स्थान लिया, जिसे पूर्व में अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानकों की स्थापना की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। यह लंदन में अवस्थित है।

बेसल समिति (Basel Committee)

  • दिसंबर 2010 में बैंकिंग पर्यवेक्षण पर गठित बेसल समिति ने बेसल III मानदंडों को प्रस्तुत किया था। बासेल III बैंकिंग क्षेत्र में सुधार उपायों की एक व्यापक श्रृंखला है जिसे बैंकिंग क्षेत्र में विनियमन, पर्यवेक्षण और जोखिम प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिये तैयार किया गया है।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड, MCA वेबसाइट

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