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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी बैठक

  • 14 Nov 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारत-अमेरिका संबंध, भारत-प्रशांत रणनीति

मेन्स के लिये:

द्विपक्षीय समूह और समझौते, भारत-प्रशांत क्षेत्र, भारत-अमेरिका संबंध - चुनौतियाँ और सहयोग के क्षेत्र

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी की 9वीं मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री ने किया तथा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राजस्व सचिव ने किया

बैठक की मुख्य विशेषताएँ:

  • जलवायु महत्त्वाकांक्षा बढ़ाने के प्रयास:
    • दोनों देशों ने जलवायु महत्त्वाकांक्षा को बढ़ाने के लिये वैश्विक प्रयासों के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से व्यक्त जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने हेतु संबंधित घरेलू प्रयासों को साझा किया।
  • ृहद् आर्थिक चुनौतियाँ:
    • यूक्रेन में संघर्ष के संदर्भ में दोनों ने वस्तुओं और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ आपूर्ति पक्ष के व्यवधानों सहित वैश्विक व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण के लिये वर्तमान बाधाओं पर चर्चा की तथा इन वैश्विक वृहद् आर्थिक चुनौतियों को संबोधित करने में बहुपक्षीय सहयोग की केंद्रीय भूमिका के लिये अपनी प्रतिबद्धता पर फिर से ज़ोर दिया।
    • उन्होंने जलवायु कार्रवाई सहित विकास उद्देश्यों का समर्थन करने के लिये भारत को वित्तपोषण हेतु मदद करने के लिये MDBS के माध्यम से काम करने के महत्त्व को स्वीकार किया।
    • दोनों ने इन बहुपक्षीय और द्विपक्षीय तथा अन्य वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने की योजना बनाई है।
  • समान ऋण उपचार:
    • दोनों पक्षों ने ऋण स्थिरता द्विपक्षीय उधार में पारदर्शिता और ऋण संकट का सामना करने वाले देशों को उचित एवं समान ऋण उपचार प्रदान करने हेतु कार्रवाई का समन्वय करने के लिये अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
  • ऋण उपचार के लिये G 20 सामान्य ढाँचा:
    • दोनों ने ऋण उपचार के लिये G-20 साझा ढाँचे को समयबद्ध, व्यवस्थित और समन्वित तरीके से लागू करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
  •  सामूहिक परिमाणित लक्ष्य:
    • दोनों ने सार्थक कार्यों और कार्यान्वयन में पारदर्शिता के संदर्भ में विकासशील देशों के लिये सार्वजनिक एवं निजी स्रोतों से 2025 तक हर वर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॅालर जुटाने पर सहमति व्यक्त की।
    • दोनों देशों ने ऑफशोर टैक्स चोरी से निपटने के लिये सूचना साझा करने में आपसी सहयोग पर भी चर्चा की।
  • सामूहिक परिमाणित लक्ष्य:
    • दोनों ने सार्थक शमन कार्यों और कार्यान्वयन पर पारदर्शिता के संदर्भ में विकासशील देशों के लिये सार्वजनिक और निजी स्रोतों से 2025 तक हर साल 100 बिलियन अमरीकी डालर जुटाने पर सहमति व्यक्त की।
    • दोनों देशों ने अपतटीय कर चोरी से निपटने के लिये सूचना साझा करने में आपसी सहयोग पर भी चर्चा की।
  • विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम:
    • दोनों पक्ष वित्तीय खाते की जानकारी साझा करने के लिये विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (FATCA) से संबंधित चर्चा में शामिल होना जारी रखेंगे।

 अमेरिका के साथ भारत के संबंध:

  • परिचय:
    • अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने सहित साझा मूल्यों पर आधारित है।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के व्यापार, निवेश एवं कनेक्टिविटी के माध्यम से वैश्विक सुरक्षा, स्थिरता तथा आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने में साझा हित हैं।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने और इंडो-पेसिफिक को शांति, स्थिरता एवं बढ़ती समृद्धि के क्षेत्र के रूप में सुरक्षित करने के प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभरने का समर्थन करता है।
  • आर्थिक संबंध:
    • वर्ष 2021 में वस्तुओं और सेवाओं में समग्र अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार 157 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और सबसे महत्त्वपूर्ण निर्यात बाज़ार है।
    • अमेरिका उन कुछ देशों में से एक है जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष है। वर्ष 2021-22 में भारत का अमेरिका के साथ 32.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष था।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:

भारत-अमेरिका संबंधों की संबद्ध चुनौतियाँ:

  • टैरिफ अधिरोपण: वर्ष 2018 में अमेरिका ने कुछ स्टील उत्पादों पर 25% टैरिफ और भारत द्वारा कुछ एल्युमीनियम उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाया गया था
    • भारत ने जून 2019 में अमेरिकी आयात पर लगभग 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 28 उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर जवाबी कार्रवाई की।
      • हालाँकि धारा 232 टैरिफ लागू करने के बाद अमेरिका में स्टील निर्यात में साल-दर-साल 46% की गिरावट आई है।
  • आत्मनिर्भरता को संरक्षणवाद के रूप में गलत समझना: आत्मनिर्भर भारत अभियान ने इस विचार को और बढ़ावा दिया है कि भारत तेज़ी से एक संरक्षणवादी बंद बाज़ार अर्थव्यवस्था बनता जा रहा है।
  • अमेरिका की वरीयता की सामान्यीकृत प्रणाली (GSP) से छूट: अमेरिका ने GSP कार्यक्रम के तहत जून 2019 से प्रभावी, भारतीय निर्यातकों से शुल्क मुक्त निर्यात के प्रावधान को वापस ले लिया।
    • परिणामस्वरूप अमेरिका को 5.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर विशेष शुल्क उपचार को हटा दिया गया, जिससे भारत के निर्यात-उन्मुख क्षेत्र जैसे- फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, कृषि उत्पाद और ऑटोमोटिव पार्ट्स आदि क्षेत्र प्रभावित हुए।
  • अन्य देशों के प्रति अमेरिका की शत्रुता:
    • भारत और अमेरिका के बीच कुछ मतभेद भारत-अमेरिका संबंधों के प्रत्यक्ष परिणाम नहीं हैं, बल्कि भारत के पारंपरिक सहयोगी ईरान और रूस जैसे तीसरे दुनिया के देशों के प्रति अमेरिका की शत्रुता के कारण हैं।
    • भारत-अमेरिका संबंधों को चुनौती देने वाले अन्य मुद्दों में ईरान के साथ भारत के संबंध और रूस से भारत द्वारा S-400 की खरीद शामिल है।
    • अमेरिका द्वारा भारत को रूस से दूर करने के आह्वान का दक्षिण एशिया की यथास्थिति पर दूरगामी परिणाम हो सकता है।
  • अफगानिस्तान में अमेरिका की नीति:
    • भारत अफगानिस्तान में अमेरिका की नीति को लेकर भी चिंतित है क्योंकि यह इस क्षेत्र में भारत की सुरक्षा और हितों के लिये ज़ोखिम पैदा कर रहा है।

आगे की राह

  • अद्वितीय जनसांख्यिकीय लाभांश अमेरिकी और भारतीय कंपनियों के लिये प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्माण, व्यापार एवं निवेश के लिये बड़े अवसर प्रदान करता है।
  • भारत अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में एक अग्रणी अभिकर्त्ता के रूप में उभर रहा है जो साथ में अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है। यह अपने महत्त्वपूर्ण हितों को और आगे बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने के लिये अपनी वर्तमान स्थिति का उपयोग करेगा।
  • भारत और अमेरिका आज सच्चे अर्थों में रणनीतिक साझेदार हैं - परिपक्व प्रमुख शक्तियों के बीच एक ऐसी साझेदारी जो पूर्ण समानता की मांग नहीं कर रही है बल्कि एक निरंतर संवाद सुनिश्चित करके मतभेदों को प्रबंधित कर रही है तथा इन मतभेदों को नए अवसरों के निर्माण में शामिल भी कर रही है।
  • यूक्रेन संकट के परिणामस्वरूप चीन के साथ रूस का बढ़ा हुआ संरेखण केवल रूस पर भरोसा करने की भारत की क्षमता को जटिल बनाता है क्योंकि यह चीन को संतुलित करता है। अतः अन्य सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग जारी रखना दोनों देशों के हित में है।
  • चीनी सेना की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं पर साझा चिंता के कारण अंतरिक्ष शासन अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा वर्ष वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच संबंधों में खटास का कारण वाशिंगटन का अपनी वैश्विक रणनीति में अभी तक भी भारत के लिये किसी ऐसे स्थान की खोज करने में विफलता है, जो भारत के आत्म-समादर और महत्त्वाकांक्षा को संतुष्ट कर सके। उपयुक्त उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिये। (2019)

स्रोत: पी.आई.बी.

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