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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अंततः नौसेना बेस विकसित करने को तैयार हुआ सेशेल्स

  • 26 Jun 2018
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

भारत और सेशेल्स एक-दूसरे की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए असम्पशन द्वीप पर नौसेना बेस विकसित करने के लिये एक परियोजना पर मिलकर काम करने पर सहमत हो गए हैं। उल्लेखनीय है की भारत दौरे पर आने से कुछ दिन पहले सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे ने कहा था कि वह भारत दौरे के दौरान असम्पशन आइलैंड परियोजना के संबंध में कोई चर्चा नहीं करेंगे। सेशेल्स के इस कदम को भारत के कूटनीतिक प्रयासों की असफलता के रूप में देखा जा रहा था। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना हेतु भारत और सेशेल्स के बीच वर्ष 2015 में समझौता हुआ था।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • दोनों देशों के बीच संस्कृति, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, संरक्षा व सहयोग, कूटनीति और बुनियादी ढाँचा विकास से संबंधित छह नए समझौते हुए हैं। साथ ही दोनों देश गैर-सैन्य वाणिज्यिक जहाजों की पहचान और उनकी गतिविधियों के संबंध में डेटा का आदान-प्रदान करने में सक्षम होंगे। 
  • भारत ने सेशेल्स को समुद्री सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिये 100 मिलियन डॉलर का कर्ज़ देने की भी घोषणा की।
  • असम्पशन द्वीप पर बनने वाला यह नौसैनिक बेस भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक लाभ प्रदान करेगा।
  • भारत के समर्थन से सेशेल्स पारंपरिक और गैर पारंपरिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगा।

असम्पशन द्वीप (Assumption Island)

  • असम्पशन द्वीप मेडागास्कर के उत्तर में स्थित सेशेल्स के बाहरी द्वीपों में से एक छोटा-सा द्वीप है।  यह सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया से दक्षिण-पश्चिम की ओर 1,135 किमी. की दूरी पर स्थित है।
  • यह 11.6 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ एक कोरल द्वीप है।
  • यह द्वीप मोज़ाम्बिक चैनल के बहुत करीब है और अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इसी क्षेत्र से होता है।  इसी द्वीप के निकट यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कोरल द्वीप ‘एल्डब्रा एटोल’ (Aldabra atoll)  अवस्थित है।  उल्लेखनीय है कि एल्डब्रा एटोल कोरल द्वीप पर विशालकाय कछुओं (Giant Tortoise) की सर्वाधिक आबादी वास करती है।

असम्पशन द्वीप भारत के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • रणनीतिक अवस्थिति वाले इस द्वीप पर भारत की सैन्य उपस्थिति होने से दक्षिण हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज़ों और कंटेनरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • इस सैन्य अड्डे से भारतीय नौसेना को मोज़ाम्बिक चैनल की निगरानी करने और किसी भी तरह की समुद्री डकैती के प्रयासों को विफल करने की सुविधा मिलेगी, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र के माध्यम से संचालित होता है।
  • इससे अन्य देशों को भी नौ-परिवहन सुविधाएँ प्रदान की जा सकेंगी।
  • इस द्वीप से प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और खाड़ी क्षेत्र के मध्य स्थित मुख्य ऊर्जा मार्ग (Energy Route) की चौकसी की जा सकती है।
  • साथ ही, इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सकेगा और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षा घेरे से संबंधित व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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