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क्राइस्टचर्च कॉल फॉर एक्शन/क्राइस्टचर्च कॉल टू एक्शन

  • 17 May 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में भारत ने क्राइस्टचर्च कॉल फॉर एक्शन/क्राइस्टचर्च कॉल टू एक्शन (Christchurch Call for Action/Christchurch Call to Action) पर हस्ताक्षर किये हैं जिसके अंतर्गत सोशल मीडिया पर चरमपंथी और हिंसक सामग्रियों को हटाने का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • फ्राँस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैकिंडा अर्डर्न द्वारा वैश्विक दस्तावेज़ पर पेरिस में हस्ताक्षर किये गए।
  • इस दस्तावेज़ में सरकार और बड़ी तकनीकी कंपनियों दोनों ने साथ मिलकर हिंसक और चरमपंथी सामग्रियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।
  • इस सम्मलेन में ब्रिटेन, फ्राँस, कनाडा,आयरलैंड, सेनेगल, इंडोनेशिया,जोर्डन एवं यूरोपियन यूनियन के नेताओं के साथ ही बड़ी तकनीकी कंपनियाँ जैसे- ट्विटर . गूगल, माइक्रोसॉफ्ट आदि शामिल हुए। भारत की तरफ से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने भाग लिया।
  • इस दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य क्राइस्टचर्च हमलों के बाद "सरकारों और ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं की सामूहिक एवं स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं पर बल देते हुए इंटरनेट पर आतंकवादी और हिंसक चरमपंथी सामग्री के प्रसार को रोकना है।
  • फेसबुक ने भी लगातार आलोचनाएँ झेलने के पश्चात् प्रतिबंधों को कड़ा करने एवं चरमपंथी और हिंसक सामग्री को हटाने के लिये प्रौद्योगिकीय अनुसंधान हेतु 7.5 मिलियन डॉलर का सहयोग देने का वादा किया।
  • हिंसक एवं चरमपंथी सामग्री को सोशल मीडिया से हटाने का मुद्दा बिअरित्ज़(Biarritz) में संपन्न हुए G-7 सम्मलेन एवं G-20 सम्मेलनों के प्रमुख मुद्दों में से एक था।

नैतिकता का सवाल

  • यह आतंकवादी घटनाओं के ऑनलाइन प्रदर्शन को रोकने के लिये नैतिक मानकों को लागू करने हेतु मीडिया आउटलेट को प्रोत्साहित करता है।
  • यह मीडिया को आतंकवादी और हिंसक चरमपंथी सामग्री को कठोरता से बाधित करने की हिदायत देता है।
  • आतंकवादी और हिंसक चरमपंथी सामग्री को लाइव-स्ट्रीमिंग के माध्यम से प्रसारित किया जाता है, इस जोखिम को कम करने के लिये तत्काल और प्रभावी उपायों को लागू करने का निर्णय लिया गया था जिसमें वास्तविक समय पर समीक्षा के लिये सामग्री की पहचान भी शामिल है।
  • फ्री स्पीच के मुद्दे के कारण अमेरिका ने चरमपंथ को रोकने वाले सबसे बड़े अभियान पर हस्ताक्षर करने से स्वयं को रोका है।
  • स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित इंटरनेट का प्रयोग सामाजिक समरसता और आर्थिक विकास में सहयोग करता है।

पृष्ठभूमि

यह समझौता 15 मार्च को मस्जिदों पर हुए हमलों की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर किया गया था और इसका उद्देश्य चरमपंथियों के द्वारा इंटरनेट दुरुपयोग को रोकना है।

निष्कर्ष

वास्तव में, क्राइस्टचर्च कॉल फॉर एक्शन एक दुर्लभ उदाहरण है जहाँ सरकारों और निजी क्षेत्र के कर्मियों ने राष्ट्रहित की समान प्रतिज्ञा ली है। हालाँकि इस पर भाषण की स्वतंत्रता को लेकर आन्दोलनकर्त्ताओं को आपत्ति हो सकती है लेकिन इसके बढ़ते दुष्परिणामों को रोकने हेतु सभी देशों की सरकारों को इस प्रकार की सामग्रियों पर रोक लगाने के लिये ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

ऐसी सामग्रियों से प्रेरित होकर श्रीलंका के चर्च में ईस्टर रविवार (Easter Sunday) की प्रार्थना के दौरान और वर्ष 2016 में ढाका में होली आर्टिसन बेकरी पर आतंकी हमले किये गए।

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

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