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भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत प्रेषित धन का सबसे बड़ा प्राप्तकर्त्ता

  • 19 Nov 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ, प्रेषित धन, खाड़ी सहयोग परिषद

मेन्स के लिये:

भारत के प्रेषित धन की वृद्धि से संबंधित कारक 

चर्चा में क्यों?

विश्व बैंक के ‘माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ’ (Migration and Development Brief) के अनुसार, भारत वर्ष 2021 में 87 बिलियन अमेरिकी डॉलर (पिछले वर्ष से 4.6% की वृद्धि) प्राप्त करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषित धन (Remittances) प्राप्तकर्त्ता रहा है।

  • भारत के पश्चात् चीन, मैक्सिको, फिलीपींस और मिस्र का स्थान है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा स्रोत बन गया है, जो कुल प्रेषित धन के 20% से अधिक के लिये ज़िम्मेदार है।

प्रमुख बिंदु

  • प्रेषित धन की वृद्धि से संबंधित कारक: 
    • यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में आर्थिक सुधार द्वारा सहायता प्राप्त, आवश्यकता के समय अपने परिवारों का समर्थन करने के लिये प्रवासियों का दृढ़ संकल्प, जिसे बदले में आर्थिक प्रोत्साहन और रोज़गार सहायता कार्यक्रमों द्वारा समर्थन प्रदान किया गया था। 
    •  खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और रूस में बाहरी (जावक) प्रेषित धन की रिकवरी को तेल की मज़बूत कीमतों और आर्थिक गतिविधियों में परिणामी संग्रह द्वारा भी सुविधा प्रदान की गई थी।
    • दूसरी तिमाही (वैश्विक औसत से काफी ऊपर) के दौरान कोविड-19 के बढ़ते मामलों और मौतों की गंभीरता ने देश में पर्याप्त प्रवाह (ऑक्सीजन टैंक की खरीद सहित) को व्यवस्थित करने में प्रमुख भूमिका निभाई।
    • प्रवासियों के प्रवाह ने कोविड-19 संकट के दौरान आर्थिक कठिनाइयों से पीड़ित परिवारों का समर्थन करने के लिये सरकारी नकद हस्तांतरण कार्यक्रमों को अधिक पूरक बनाया है।
  • वर्ष 2022 के लिये अनुमान:
    • कुल प्रवासी स्टॉक में गिरावट के कारण रेमिटेंस के वर्ष 2022 में 3% बढ़कर 89.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है, क्योंकि अरब देशों से लौटने वालों का एक बड़ा हिस्सा वापसी का इंतजार कर रहा है।
  • अन्य देश:
    • अधिकांश क्षेत्रों में रेमिटेंस में मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई।
      • लैटिन अमेरिका और कैरिबियन (21.6%), मध्य पूर्व व उत्तरी अफ्रीका (9.7%), दक्षिण एशिया (8%), उप-सहारा अफ्रीका (6.2%), यूरोप तथा मध्य एशिया (5.3%)।
    • पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में प्रेषण में 4% की गिरावट आई, हालांकि चीन को छोड़कर प्रेषण ने इस क्षेत्र में 1.4% की वृद्धि दर्ज की।
    • कारक: लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में संयुक्त राज्य अमेरिका में आर्थिक सुधार एवं अतिरिक्त कारकों के कारण असाधारण रूप से मज़बूत विकास हुआ, जिसमें उनके मूल देशों में प्राकृतिक आपदाओं के लिये प्रवासियों की प्रतिक्रिया और देशों से प्रवासियों को भेजे गए प्रेषण शामिल हैं।
  • सलाह:
    • प्रेषण को प्रवाह को बनाए रखने के लिये विशेष रूप से डिजिटल चैनलों के माध्यम से प्रवासियों और प्रेषण सेवा प्रदाताओं हेतु बैंक खातों तक पहुँच प्रदान करना एक प्रमुख आवश्यकता है।
    • विशेष रूप से टीकों तक पहुँच व कम भुगतान से सुरक्षा के क्षेत्रों में प्रवासियों को शामिल करने के लिये नीतिगत प्रतिक्रियाएँ भी जारी रहनी चाहिये।

विश्व बैंक की माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ रिपोर्ट:  

  • इसे विश्व बैंक की प्रमुख अनुसंधान और डेटा शाखा ‘डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स’ (DEC) की ‘माइग्रेशन एंड रेमिटेंस यूनिट’ द्वारा तैयार किया जाता है। 
  • इसका प्रमुख उद्देश्य छह महीनों में माइग्रेशन और रेमिटेंस के प्रवाह तथा संबंधित नीतियों में प्रमुख विकास पर एक अद्यतन प्रदान करना है।
  • यह विकासशील देशों को रेमिटेंस प्रेषण प्रवाह के लिये मध्यम अवधि का अनुमान भी प्रदान करता है।
  • यह डेटा वर्ष में दो बार तैयार किया जाता है।

प्रेषित धन या रेमिटेंस:

  • प्रेषित धन या रेमिटेंस का आशय प्रवासियों द्वारा मूल देश में मित्रों और रिश्तेदारों को किये गए वित्तीय या अन्य तरह के हस्तांतरण से है।
  • यह मूलतः दो मुख्य घटकों का योग है - निवासी और अनिवासी परिवारों के बीच नकद या वस्तु के रूप में व्यक्तिगत स्थानांतरण और कर्मचारियों का मुआवज़ा, जो उन श्रमिकों की आय को संदर्भित करता है जो सीमित समय के लिये दूसरे देश में काम करते हैं।
  • प्रेषण, प्राप्तकर्त्ता देशों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में मदद करते हैं, लेकिन यह ऐसे देशों को उन पर अधिक निर्भर भी बना सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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