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जैव विविधता और पर्यावरण

कीटों के प्रतिरक्षा स्तर में वृद्धि

  • 05 Nov 2019
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये

बीटा-ओसीमीन, लिनालूल

चर्चा में क्यों?

बेंगलूरु स्थित राष्ट्रीय जीव विज्ञान केंद्र (National Centre for Biological Sciences, Bengaluru) के अनुसंधानकर्त्ताओं ने पौधे की वाष्पशीलता (Plant volatiles) का कृमियों के प्रतिरक्षा स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाया है।

प्रमुख बिंदु

Plant, pest and predator

  • इस अनुसंधान में वनस्पति, परजीवी एवं परभक्षी कीट के मध्य संबंधों का अध्ययन किया गया।
  • इस अनुसंधान को कपास के पौधे पर किया गया जिसमे इस पौधे की वाष्पशीलता का स्पोडोप्टेरा लिटूरा (Spodoptera Litura) नामक कृमियों के प्रतिरक्षा स्तर पर प्रभाव एवं परभक्षी कीट/बर्र यानी ब्रोकेन ब्रेविकोर्निस (Bracon brevicornis) के मध्य संबंधों को पता लगाया गया है।
  • जब कृमी कपास के पौधे की पत्तियों को खाता है तो पत्तियां सुगंधित और वाष्पशील वाष्प को वातावरण में विमोचित करती हैं यह सुगंधित वाष्प परभक्षी कीटों एवं बर्र/ततैया आदि को आकर्षित करती है।
  • ये परभक्षी कीट, स्पोडोप्टेरा लिटूरा की त्वचा पर अंडे देते हैं तथा इन अंडो से निकला लार्वा इस कृमी के शरीर का ही भक्षण करता है जो इसकी मृत्यु का कारण बनता है।
  • इस कृमी की त्वचा पर अंडे देने के लिये पहले परभक्षी कीट डंक से जहरीले पदार्थ को कृमी स्पोडोप्टेरा लिटूरा के शरीर में पहुँचा कर उसे गतिहीन कर देता है एवं तत्पश्चात इसके शरीर पर अंडे देता है।
  • इस प्रयोग में बीटा-ओसीमीन और लिनालूल जैसे छह पादप वाष्पशील का उपयोग किया गया और प्रत्येक का कपास की पत्ती के कृमी की प्रतिरक्षा प्रणाली पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा।
  • पादप वाष्पशील पदार्थ बीटा-ओसीमीन (Beta-Ocimene) को पत्तियों पर छिडकने पर कृमि के प्रतिरक्षा तंत्र में सुधार होता है जिससे परभक्षी कीट के डंक से कृमि गतिहीन नहीं होता है। इस स्थिति में कृमि के गतिशील होने के कारण परभक्षी इसके शरीर पर अंडे नही दे पाते हैं।
  • पादप वाष्पशील पदार्थ लिनालूल (Linalool) को पत्तियों पर छिडकने के कारण कृमियों में बैक्टीरिया व रोगजनकों के विरुद्ध बेहतर प्रतिरक्षा तंत्र उत्पन्न होता है।
  • बीटा-ओसीमीन आधारित प्रतिरक्षा परिवर्तन कृमियों/शाकभक्षियों की परजीवियों के प्रति प्रतिरक्षा को सुदृढ़ करता है
  • कृमियों/शाकभक्षियोंक के प्रतिरक्षा में सुधार परभक्षी कीट के लार्वा को नियंत्रित करने के स्थान पर इनके प्युवा (Pupal) के आकार में कमी व इनकी व्यस्क परभक्षी कीटों के जीवनकाल में कमी के कारण होता है।

पौधे के वाष्पशील पदार्थ (Plant volatiles)

  • पौधे विभिन्न रक्षात्मक तंत्रों के माध्यम से परजीवी कृमियों के प्रति प्रतिरक्षा करते हैं।
  • ये पदार्थ पौधों द्वारा इनके ऊतकों की क्षति होने पर विमोचित किये जाते हैं।

बीटा-ओसीमीन

  • यह एक कार्बनिक यौगिक है इसका रसायनिक सूत्र C10H16 है।
  • यह पौधों पत्तों और फूलों से विमोचित होने वाला वाष्पशील पदार्थ है।
  • इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों फ्लेवर व सौन्दर्य प्रसाधनों में सुंगंध के लिए किया जाता है।

लिनालूल

  • यह एक कार्बनिक यौगिक है इसका रसायनिक सूत्र C10H18O है।
  • पौधों के मेटाबोलाइट, वाष्पशील तेल घटक, रोगाणुरोधी एजेंट और सुगंध के रूप में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • इसका उपयोग इत्र, साबुन, और खाद्य सामग्री में किया जाता है।

स्रोत: द हिंदू

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