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जीव विज्ञान और पर्यावरण

अरुणाचल प्रदेश में सुनहरी बिल्ली की नई प्रजातियाँ

  • 14 Jun 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (Zoological Society of London- ZSL), ICC (International Conservation Charity) और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London-UCL) के भारतीय वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी (Dibang Valley) में गोल्डन कैट/सुनहरी बिल्ली के छह रंगों की खोज की है।

प्रमुख बिंदु

  • वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक दुर्लभ पारिस्थितिक परिघटना है जो जंगली बिल्लियों के आवास, सुरक्षा एवं जीवन की अनुकूलता में सहायक है।  
  • गोल्डन कैट/सुनहरी बिल्ली के इन छह रंग रूपों में से एक रंग-रूप पूरी तरह से नया है।
  • भूटान और चीन में सुनहरी बिल्ली के दो प्रकार पाए जाते हैं- एक दालचीनी के रंग का (Colour of Cinnamon) तथा दूसरा ओसेलट (Ocelot) के समान निशान वाला, इसके साथ ही एक छोटी जंगली बिल्ली अमेरिका में भी पाई जाती है। इसके अतिरिक्त इनमें टाईटली रोस्टेड (Tightly-Rosetted), मेलेनिस्टिक (Melanistic), ग्रे (Gray) और गोल्डन (Golden) बी शामिल हैं।
  • रंग-रूप को यादृच्छिक आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Random Genetic Mutations) से उत्पन्न होने और प्राकृतिक चयन (Natural selection) के माध्यम से जंगली आबादी के बीच पकड़ बनाने के संदर्भ में जाता है।
  • ZSL के वैज्ञानिकों के अनुसार, बिल्ली के आवरण में प्रदर्शित अलग-अलग भिन्नताएँ उन्हें कई पारिस्थितिक लाभ प्रदान करती हैं, जैसे कि अलग-अलग ऊँचाई पर विभिन्न आवासों (नम उष्णकटिबंधीय तराई वाले जंगलों से लेकर अल्पाइन झाड़ियों) में रहने तथा तीतर और खरगोशों का शिकार करने के लिये छिपने में सहायता मिलती है।  
  • दिबांग घाटी में दुनिया की सबसे विविध श्रेणी की जंगली बिल्लियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • वर्तमान में वैज्ञानिकों द्वारा सिर्फ इस दुर्लभ पारिस्थितिक घटना का अध्ययन किया जा रहा है।  
  • इस रंग-रूप के विकासवादी सिद्धांत के अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलने की संभावना है कि ये प्रजातियाँ बदलते परिवेश में कितनी जल्दी अनुकूलित और विकसित हो सकती हैं।

एशियाई गोल्डन कैट

  • एशियाई गोल्डन कैट/सुनहरी बिल्ली का वैज्ञानिक नाम कैटोपुमा टेम्मिनकी (Catopuma Ttemminckii) है।
  • इसे IUCN रेड लिस्ट में निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि यह बिल्ली उत्तर- पूर्वी भारत, इंडोनेशिया तथा पूर्वी नेपाल में पाई जाती है।

दिबांग घाटी

  • दिबांग घाटी अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। इसका नाम दिबांग नदी के नाम पर रखा गया है।
  • दिबांग नदी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है। इसकी उत्तरी दिशा में दिबांग घाटी ज़िला, पूर्व में लोहित और मैक मोहन लाईन, पश्चिम में पूर्वी सियांग एवं दक्षिण में असम का तिनसुकिया स्थित है।

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प्रकृति संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय संघ

(International Union for Conservation of Nature- IUCN)

  • इसकी स्थापना 5 अक्तूबर, 1948 को फ्राँस में हुई थी, उस समय इसका नाम  इंटरनेशनल यूनियन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ नेचर (International Union for Protection of Nature- IUPN) था।
  • वर्ष 1956 में इसका नाम बदल कर इंटरनेशनल यूनियन  फॉर कंज़र्वेशन ऑफ़ नेचर (International Union for Conservation of Nature- IUCN) कर दिया गया।
  • इसका मुख्यालय ग्लांड (स्विट्ज़रलैंड) में अवस्थित है।
  • विज़न- ऐसे संसार का निर्माण करना, जो प्रकृति की कीमत समझने के साथ ही इसका संरक्षण भी करें।
  • मिशन- संसार भर के लोगों को प्रकृति की विविधता बनाए रखने के लिये प्रोत्साहन और सहयोग देना तथा प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रयोग सुनिश्चित करना।
  • यह पौधों और जंतुओं की रेड डेटा बुक भी जारी करता है।
  • प्रत्येक चार वर्ष में एक बार IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन कॉन्ग्रेस का अयोजन किया जाता है।
  • वैश्विक चुनौतियों से निपटने और प्रकृति संक्षरण के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये सरकार, सिविल सोसाइटी, उद्यमी वर्ग आदि इसमें भाग लेते हैं।   
  • भारत में वर्ष 1969 में नई दिल्ली में वर्ल्ड कंज़र्वेशन कॉन्ग्रेस का आयोजन किया गया था।
  • वर्ष 2016 में अमेरिका के हवाई में इसका आयोजन किया गया था।
  • वर्ष 2020 में इसका आयोजन फ्राँस में किया जाएगा।

स्रोत- द हिंदू

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