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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

श्रीलंका को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा बेलआउट पैकेज़

  • 03 Sep 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), जीडीपी विकास दर, ट्रांस-शिपमेंट हब, तमिल समुदाय।

मेन्स के लिये:

श्रीलंका संकट और भारत पर इसके प्रभाव।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) ने श्रीलंका के साथ चार वर्ष की अवधि के लिये 2.9 बिलियन अमेरीकी डॉलर के बेलआउट पैकेज़  पर एक प्रारंभिक समझौते को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त दक्षिण एशियाई राष्ट्र के लिये आर्थिक स्थिरता और ऋण स्थिरता को बहाल करना है।

श्रीलंका को प्रदान बेलआउट पैकेज़:

  • आवश्यकता:
    • 51 बिलियन अमेरीकी डॉलर के ऋण के साथ श्रीलंका का आर्थिक संकट के निम्नलिखित कारण हैं:
      • कोलंबो के चर्चों में अप्रैल 2019 के ईस्टर बम विस्फोट
      • किसानों के लिये निम्नतम कर दर और व्यापक सब्सिडी की सरकार की नीति।
      • वर्ष 2020 में कोविड -19 महामारी जिसने श्रीलंका में चाय, रबर, मसाले, वस्त्र और पर्यटन क्षेत्र के निर्यात को प्रभावित किया।
  • परिचय:
    • IMF पैकेज़ का भुगतान अगले चार वर्षों में किश्तों में किया जाना है, जो कि भारत द्वारा श्रीलंका को चार महीनों में प्रदान किये गए पैकेज़ से कम है।
    • पैकेज़ को IMF के निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
      • अनुमोदन श्रीलंका के अंतर्राष्ट्रीय लेनदारों पर निर्भर है - वाणिज्यिक ऋणदाता जैसे बैंक और परिसंपत्ति प्रबंधक, बहुपक्षीय एजेंसियाँ, साथ ही चीन, जापान और भारत सहित द्विपक्षीय लेनदारों ने अपने ऋण के पुनर्गठन के लिये सहमति व्यक्त की है।
  • संभावित लाभ:
    • क्रेडिट रेटिंग में सुधार:
      • यह पैकेज़ को प्राप्त करने वाले देश की क्रेडिट रेटिंग को बढ़ा सकता है और अंतर्राष्ट्रीय लेनदारों और निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा दे सकता है जो कि किश्तों के मध्य अंतराल को बंद करने के लिये ब्रिज़ वित्तपोषण प्रदान करने के लिये निवेदन कर सकते हैं।
  • उद्देश्य:
    • कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 2024 तक सकल घरेलू उत्पाद के 2.3% के प्राथमिक अधिशेष का लक्ष्य प्राप्त करना है।

श्रीलंका द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार हेतु प्रयास:

  • राजस्व में वृद्धि:
    • देश के बजट का उद्देश्य सार्वजनिक ऋण को कम करके राजस्व को वर्ष 2021 के अंत में 8.2% से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद का 15% करना है।
  • सेवानिवृत्ति की आयु कम की गई:
    • सरकारी और अर्द्ध-सरकारी संगठनों में सेवानिवृत्ति की आयु क्रमशः 65 और 62 से घटाकर 60 वर्ष कर दी गई है।
  • बैंकिंग क्षेत्र:
    • आर्थिक मंदी के कारण ऋणों की अदायगी न करने से उत्पन्न पुनर्पूंजीकरण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर्मचारियों और जमाकर्त्ताओं को स्टेट बैंकों में 20% शेयरधारिता की पेशकश की गई है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF):

  • परिचय:
    • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो वैश्विक आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देता है, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करता है और गरीबी को कम करने का प्रयास करता है।
  • IMF द्वारा निर्धारित शर्तें:
    • परिचय:
      • जब कोई देश IMF से उधार लेता है, तो उसकी सरकार उन समस्याओं को दूर करने के लिए अपनी आर्थिक नीतियों को समायोजित करने के लिये सहमत होती है जिसके कारण उसे वित्तीय सहायता लेनी पड़ी।
        • ये नीतिगत समायोजन IMF ऋणों के लिये शर्तें हैं और यह सुनिश्चित करता है कि देश IMF को ऋण चुकाने में सक्षम होगा।
        • सशर्तता की यह ऋण प्रणाली मज़बूत और प्रभावी नीतियों के राष्ट्रीय स्वामित्त्व को बढ़ावा देने के लिये डिज़ाइन की गई है।
      • सशर्तता देशों को राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय हानिकारक उपकरणों का सहारा लिये बिना भुगतान संतुलन की समस्याओं को हल करने में मदद करती है।
    • देश के प्राधिकारियों के साथ सहमत नीतिगत प्रतिबद्धताएंँ निम्नलिखित रूप ले सकती हैं:
      • पूर्व प्रतिक्रिया:
        • आईएमएफ द्वारा वित्तपोषण की मंज़ूरी मिलने या समीक्षा पूरी होने से पहले ये ऐसे कदम हैं जिन्हें कोई देश मानने के लिये सहमत होता है।
          • वे सुनिश्चित करते हैं कि एक कार्यक्रम में सफलता के लिये आवश्यक आधार होगा।
      • मात्रात्मक प्रदर्शन मानदंड (Quantitative performance criteria-QPCs):
        • IMF ऋण देने के लिये में व्यापक आर्थिक चर से संबंधित विशिष्ट, स्वीकार योग्य शर्तें हमेशा अपने नियंत्रण में रखता है।
          • इस तरह के चर में मौद्रिक और क्रेडिट समुच्चय, अंतर्राष्ट्रीय भंडार, राजकोषीय शेष तथा बाह्य उधार शामिल हैं।
      • सांकेतिक लक्ष्य (IT):
        • QPC के अलावा कार्यक्रम के उद्देश्यों को पूरा करने में प्रगति का आकलन करने के लिये मात्रात्मक संकेतकों हेतु सांकेतिक लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है।
      • संरचनात्मक बेंचमार्क (Structural benchmarks-SB):
        • ये सुधार के उपाय हैं जो अक्सर गैर-मात्रात्मक होते हैं लेकिन कार्यक्रम के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये महत्त्वपूर्ण होते हैं और कार्यक्रम कार्यान्वयन का आकलन करने हेतु बेंचमार्क के रूप में अभिप्रेत होते हैं

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष प्रश्न:

प्रश्न. हाल ही में निम्नलिखित में से किस मुद्रा को IMF के SDR के बास्केट में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है? (2016)

(a) रूबल
(b) रैंड
(c) भारतीय रुपया
(d) रॅन्मिन्बी

उत्तर : d

व्याख्या:

  • विशेष आहरण अधिकार को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) द्वारा वर्ष 1969 में अपने सदस्य देशों के लिये अंतर्राष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति के रूप में बनाया गया था।
  • SDR का मूल्य, बास्केट ऑफ करेंसी में शामिल मुद्राओं के औसत भार के आधार पर किया जाता है। इस बास्केट में पाँच देशों की मुद्राएँ शामिल हैं- अमेरिकी डॉलर (Dollar), यूरोप का यूरो (Euro), चीन की मुद्रा रॅन्मिन्बी (Renminbi), जापानी येन (Yen), ब्रिटेन का पाउंड (Pound)।
  • चीनी रॅन्मिन्बी को 1 अक्तूबर, 2016 को मुद्राओं की टोकरी में जोड़ा गया था। अतः विकल्प (d) सही है।

प्रश्न: विश्व बैंक और IMF, जिन्हें सामूहिक रूप से ब्रेटन वुड्स नाम से जाने वाली संस्थाएँ, विश्व की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था की संरचना का समर्थन करने वाले दो अंतर-सरकारी स्तंभ हैं। पृष्ठीय रूप में, विश्व बैंक और IMF कई सामान्य विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं, फिर भी उनकी भूमिका, कार्य और अधिदेश स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। व्याख्या कीजिये। (मुख्य परीक्षा,2013)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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