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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अमेरिकी वीज़ा नियमों पर प्रतिबंध

  • 26 Jun 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये

H-1B वीज़ा, COVID-19

मेन्स के लिये

वैश्विक राजनीति पर COVID-19 का प्रभाव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा समेत अन्य सभी विदेशी वर्क-वीज़ा (Work Visas) पर इस वर्ष के अंत तक लिये प्रतिबंध लगा दिया है। 

प्रमुख बिंदु

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह कदम उन लाखों अमेरिकी नागरिकों की मदद करने के लिये काफी आवश्यक है जो कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण उत्पन्न हुए आर्थिक संकट के चलते बेरोज़गार हो गए हैं।

वीज़ा निलंबन का कारण

  • वर्ष 1952 में H-1 वीज़ा योजना की शुरुआत के बाद से ही अमेरिका की आर्थिक स्थिति के आधार पर अन्य देश के कुशल श्रमिकों की कुछ श्रेणियों को अनुमति देने अथवा अस्वीकार करने के उद्देश्य से कई संशोधन और बदलाव हुए हैं।
  • भारत और चीन जैसे विकासशील राष्ट्रों में इंटरनेट और कम लागत वाले कंप्यूटरों के आगमन के साथ ही बड़ी संख्या में स्नातक अमेरिका जैसे बड़े देशों में अपेक्षाकृत कम लागत पर कार्य करने के लिये तैयार होने लगे।
  • हालाँकि दूसरे देशों से कम लागत पर कर्मचारी आने के कारण अमेरिका के अपने घरेलू कर्मचारियों को काम मिलना बंद हो गया, जिससे अमेरिका के स्थानीय निवासियों के बीच बेरोज़गारी बढ़ने लगी।
  • जनवरी 2017 में अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के पश्चात् राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अन्य देशों से कम लागत पर आने वाले श्रमिक अमेरिका की अर्थव्यवस्था के विकास में बाधा बन रहे हैं और इससे अमेरिका के नागरिकों के समक्ष रोज़गार का संकट पैदा हो गया है। 
    • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सदैव ही अमेरिका की वीज़ा प्रणाली में सुधार के पक्षधर रहे हैं।
  • ध्यातव्य है कि अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अमेरिका की बेरोज़गारी दर में फरवरी 2020 से मई 2020 के बीच लगभग चौगुनी वृद्धि हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने मौजूदा वर्ष के अंत तक वीज़ा जारी करने पर रोक लगा दी है।
    • वर्तमान में COVID-19 महामारी के कारण विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

 इस निर्णय का प्रभाव

  • ध्यातव्य है कि अमेरिकी प्रशासन का यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा और सभी नए H-1B, H-2B, J और L श्रेणियों के वीज़ा जारी करने की प्रक्रिया इस वर्ष के अंत तक निलंबित होगी।
  • इसका अर्थ है कि जिनके पास 23 जून तक वैध गैर-आप्रवासी वीज़ा नहीं है और वे अमेरिका से बाहर हैं, उन्हें 31 दिसंबर तक अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • हालाँकि अमेरिकी प्रशासन ने खाद्य क्षेत्र में कार्यरत लोगों को कुछ राहत प्रदान की है और उनके प्रवेश संबंधी नियम आव्रजन सेवाओं (Immigration Services) के अधिकारियों द्वारा तय किये जाएंगे।
  • उल्लेखनीय है कि H-1B, H-2B, J और L वीज़ा धारक और उनके पति या पत्नी या अमेरिका में पहले से मौजूद उनके बच्चे नए वीज़ा प्रतिबंध से प्रभावित नहीं होंगे।

भारत की IT कंपनियों पर वीज़ा निलंबन का प्रभाव

  • भारतीय आईटी कंपनियाँ अमेरिका की इस वीज़ा व्यवस्था के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक हैं, आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 1990 के बाद से प्रत्येक वर्ष जारी किये जाने वाले H-1B और अन्य वीज़ा श्रेणियों में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है।
  • अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल, 2020 तक ‘यूएस सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़’ (US Citizenship and Immigration Services-USCIS) को लगभग 2.5 लाख H-1B वर्क वीज़ा एप्लिकेशन प्राप्त हुए थे, जिसमें से लगभग 1.84 लाख या 67 प्रतिशत भारतीय आवेदक थे।
  • गौरतलब है कि वीज़ा निलंबन के अतिरिक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर H-1B कार्य वीज़ा मानदंडों में व्यापक बदलाव किये हैं। 
  • नए नियमों के अनुसार, अब H-1B कार्य वीज़ा के लिये लॉटरी प्रणाली का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके स्थान पर अब उच्च कौशल वाले श्रमिकों को ही वीज़ा प्रदान किया जाएगा, जिन्हें संबंधित कंपनी अधिक मज़दूरी का भुगतान करेगी।

H-1B,  H-2B और अन्य वर्क वीज़ा

  • IT और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अत्यधिक कुशल और कम लागत वाले कर्मचारियों का नियुक्ति प्रदान करने के लिये अमेरिकी प्रशासन प्रत्येक वर्ष एक निश्चित संख्या में वर्क वीज़ा (Work Visas) जारी करता है।
  • इन सभी वर्क वीज़ा में से H-1B वीज़ा भारतीय IT कंपनियों के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय है।
  • अमेरिकी सरकार ने प्रत्येक वर्ष कुल 85,000 H-1B वीज़ा की सीमा निर्धारित की है, जिसमें से 65,000 H-1B वीज़ा उच्च कुशल विदेशी श्रमिकों को जारी किये जाते हैं, जबकि शेष 20,000 H-1B वीज़ा उन उच्च कुशल विदेशी श्रमिकों को आवंटित किया जा सकता है, जिन्होंने अमेरिकी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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