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कृषि

तेलंगाना में किसानों के प्रत्येक एकड़ के 4,000 रुपए की सहायता किस प्रकार की जाएगी?

  • 16 Jul 2018
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

विगत माह तेलंगाना सरकार द्वारा राज्य के किसानों के लिये रयथू  बंधु योजना की शुरुआत की गई थी। इसे किसानों की निवेश सहायता योजना (FISS) के रूप में भी जाना जाता है। हाल ही में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा है कि यह योजना सामाजिक तथा कृषि नीति के लिये आदर्श साबित हो सकती है|

महत्त्वपूर्ण बिंदु 

  • रयथू बंधु योजना के तहत  तेलंगाना सरकार प्रत्येक लाभार्थी किसान को हर फसल के मौसम से पहले प्रति एकड़ 4,000 रुपए का "निवेश सहायता" प्रदान करती है।
  • इसका उद्देश्य किसान को बीज, उर्वरक, कीटनाशकों और खेत की तैयारी पर आने वाली लागत संबंधी खर्चों में सहायता प्रदान करना है।
  • इस योजना के अंतर्गत राज्य के 31 ज़िलों की 1.42 करोड़ एकड़ कृषि भूमि को शामिल किया गया है और कृषि भूमि का मालिक प्रत्येक किसान यह लाभ पाने हेतु पात्र है।
  • सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में 92% लाभार्थियों के पास 5 एकड़ से कम, 5% के पास 5-10 एकड़ तथा शेष 3% के पास 10 एकड़ से अधिक ज़मीन है।
  • राज्य सरकार का मानना है कि चार या पाँच साल की अवधि में  तेलंगाना के किसान रयथू बंधु योजना के द्वारा सभी ऋणों से मुक्त हो जाएंगे।
  • तेलंगाना के किसानों में ऋणग्रस्तता की समस्या बहुत अधिक है| किसान ऋण के लिये बैंकों में आवेदन करते हैं लेकिन बैंक उसे स्वीकृति प्रदान करने में देरी करते हैं| 
  • रयथू बंधु योजना के तहत प्राप्त धन से किसान बीज और उर्वरक खरीद सकते हैं तथा बुवाई शुरू कर सकते हैं| अब उन्हें महाजनों के पास रुपए उधार लेने के लिये नहीं जाना पड़ेगा|

लाभार्थी 

  • मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने इस योजना की घोषणा फरवरी में की थी और 10 मई को इसे लॉन्च किया गया। योजना की शुरुआत से पूर्व, राजस्व विभाग द्वारा संपूर्ण भूमि स्वामित्व के रिकॉर्ड की जाँच की गई और भूमि स्वामित्व के लिये नई पट्टेदार पासबुक जारी की गई।
  • भूमि स्वामित्व के आधार पर 57.33 लाख किसानों को (प्रत्येक को 1,000 रुपए से 1 लाख रुपए तक) कुल 5,600 करोड़ रुपए का चेक जारी किया गया| 
  • हालाँकि  नाम या सर्वेक्षण संख्या में विसंगतियों के कारण  कम-से-कम नौ लाख चेकों को भुनाया नहीं जा सका और ये वापस कर दिये गए।
  • 5,000 से अधिक ग्राम्य राजस्व अधिकारी और कृषि विस्तार अधिकारी इस बात पर नज़र रखेंगे कि सब्सिडी प्राप्त करने वाले किसानों ने फसल बोई है या नहीं। सरकार ने पिछले साल की शुरुआत में राजस्व विभाग के सर्वेक्षण के आधार पर 72 लाख लाभार्थियों की एक सूची तैयार की थी। 

भुगतान

  • सरकार 18 नवंबर से उर्वरक, कीटनाशक तथा खेत की तैयारी के लिये चेक के वितरण के साथ-साथ रबी सीजन में 4,000 रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी का विस्तार करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, कृषि पंप सेट के लिये 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है।
  • सरकार ने 2018-19 में रयथू बंधु योजना के लिये 12,000 करोड़ रुपए आवंटित किये, किसानों को 24 × 7 मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिये 1000 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया गया है|
  • सरकार सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) की बजाय अन्य माध्यमों से चेक जारी करेगी क्योंकि बैंक किसानों की पिछली देनदारियों को समायोजित करने के लिये डीबीटी धन का उपयोग कर सकते हैं। 

अमीर, गरीब और बँटाईदार

  • रयथू बंधु योजना की दो बिंदुओं पर आलोचना की गई है। पहला, यह अमीर किसानों और अमीर ज़मींदारों को बाहर नहीं करता है। हालाँकि, इस योजना में एक प्रावधान है जिसके अंतर्गत स्थानीय अधिकारियों को चेक वापस किया जा सकता है।
  • सभी मंत्रियों और शीर्ष आईएएस एवं आईपीएस अधिकारियों, जिनके पास वास्तव में कृषि भूमि है, ने चेक को वापस कर दिया है।
  • दूसरी आलोचना है कि यह योजना बँटाईदार किसानों को छोड़ देती है| तेलंगाना की अनुमानित 40% कृषक आबादी ज्यादातर गरीब और वंचित पृष्ठभूमि से आती है।
  • बँटाईदार किसानों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि वे कृषि भूमि का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं, इसका निर्धारण ज्यादातर अनौपचारिक और मौखिक पट्टा व्यवस्था के आधार पर किया जाता है|
  • एक साल ये लोग एक गाँव की कृषि भूमि पर खेती करते हैं और अगले वर्ष एक अन्य अलग गाँव में चले जाते हैं। उन्हें पहचानना बहुत मुश्किल है। अगर उन्हें इस योजना में शामिल किया जाता है  तो यह अनावश्यक मुकदमेबाजी का कारण बन जाएगा।
  • यदि बँटाईदारों को किसान और विस्तारित सहायता का हक़दार माना जाता है तो ज़मीन के असली मालिक अदालत का शरण लेंगे| 
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