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भारतीय इतिहास

गुरु तेग बहादुर

  • 22 Apr 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

गुरु ग्रंथ साहिब, गुरु नानक देव और सिख धर्म, सिख धर्म के अन्य गुरु।

मेन्स के लिये:

प्राचीन भारतीय इतिहास, गुरु तेग बहादुर और उनकी शिक्षाएँ, सिख धर्म।

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री ने गुरु तेग बहादुर (1621-1675) की 401वीं जयंती के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया।

गुरु तेग बहादुर:

  • तेग बहादुर का जन्म 21 अप्रैल, 1621 को अमृतसर में माता नानकी और छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद के यहाँ हुआ था, जिन्होंने मुगलों के खिलाफ सेना खड़ी की और योद्धा संतों की अवधारणा पेश की।
  • तेग बहादुर को उनके तपस्वी स्वभाव के कारण त्याग मल (Tyag Mal) कहा जाता था। उन्होंने अपना प्रारंभिक बचपन भाई गुरदास के संरक्षण में अमृतसर में बिताया, जिन्होंने उन्हें गुरुमुखी, हिंदी, संस्कृत और भारतीय धार्मिक दर्शन सिखाया, जबकि बाबा बुद्ध ने उन्हें तलवारबाज़ी, तीरंदाज़ी और घुड़सवारी का प्रशिक्षण दिया।
  • जब वह केवल 13 वर्ष के थे तब उन्होंने एक मुगल सरदार के खिलाफ लड़ाई में खुद को प्रतिष्ठित किया।
  • उनकी रचना को 116 काव्य भजनों के रूप में पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' में शामिल किया गया है।
  • वह एक उत्साही यात्री भी थे और उन्होंने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचार केंद्र स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • ऐसे ही एक मिशन के दौरान उन्होंने पंजाब में चक-ननकी शहर की स्थापना की, जो बाद में पंजाब के आनंदपुर साहिब का हिस्सा बन गया।
  • वर्ष 1675 में मुगल सम्राट औरंगज़ेब के आदेश पर गुरु तेग बहादुर की हत्या दिल्ली में कर दी गई थी।

सिख धर्म:

  • पंजाबी भाषा में 'सिख' शब्द का अर्थ है 'शिष्य'। सिख भगवान के शिष्य हैं, जो दस सिख गुरुओं के लेखन और शिक्षाओं का पालन करते हैं।
  • सिख एक ईश्वर (एक ओंकार) में विश्वास करते हैं। सिख अपने पंथ को गुरुमत (गुरु का मार्ग- The Way of the Guru) कहते हैं। 
  • सिख परंपरा के अनुसार, सिख धर्म की स्थापना गुरु नानक (1469-1539) द्वारा की गई थी और बाद में नौ अन्य गुरुओं ने इसका नेतृत्व किया। 
  • सिख धर्म का विकास भक्ति आंदोलन और वैष्णव हिंदू धर्म से प्रभावित था।
  • इस्लामिक युग में सिखों के उत्पीड़न ने खालसा की स्थापना को प्रेरित किया जो अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता का पंथ है।
    • खालसा का आशय उन 'पुरुष' और 'महिलाओं' से है, जो सिख दीक्षा समारोह के माध्यम से पंथ में शामिल हुए हैं तथा जो सिख आचार संहिता एवं संबंधित नियमों का सख्ती से पालन करते हैं
    • वे निर्धारित दिनचर्या जिसमें (5K): केश (बिना कटे बाल), कंघा (एक लकड़ी की कंघी), कारा (एक लोहे का कंगन), कचेरा (सूती जाँघिया) और कृपाण (एक लोहे का खंजर)) शामिल हैं, का पालन करते हैं।
  • सिख धर्म अंध अनुष्ठानों जैसे- उपवास, तीर्थ स्थलों का दौरा, अंधविश्वास, मृतकों की पूजा, मूर्ति पूजा आदि की निंदा करता है।
  • यह उपदेश देता है कि ईश्वर की दृष्टि में विभिन्न जातियों, धर्मों या लिंग के लोग सभी समान हैं।
  • सिख साहित्य:
    • आदि ग्रंथ को सिखों द्वारा शाश्वत गुरु का दर्जा दिया गया है और इसी कारण इसे ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ के नाम से जाना जाता है।
    • दशम ग्रंथ के साहित्यिक कार्य और रचनाओं को लेकर सिख धर्म के अंदर कुछ संदेह और विवाद है।
  • शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति:
    • शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति, अमृतसर, पंजाब (भारत) को दुनिया भर में रहने वाले सिखों का एक सर्वोच्च लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित निकाय, धार्मिक मामलों, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्मारकों की देखभाल के लिये वर्ष 1925 में संसद के एक विशेष अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था।

सिख धर्म के दस गुरु

गुरु नानक देव (1469-1539)

  • ये सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक थे।
  • इन्होंने ‘गुरु का लंगर’ की शुरुआत की।
  • वह बाबर के समकालीन थे।
  • गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर करतारपुर कॉरिडोर को शुरू किया गया था।

 

गुरु अंगद (1504-1552)

  • इन्होंने गुरुमुखी नामक नई लिपि का आविष्कार किया और ‘गुरु का लंगर’ प्रथा को लोकप्रिय बनाया।

गुरु अमर दास (1479-1574)

  • इन्होंने आनंद कारज विवाह (Anand Karaj Marriage) समारोह की शुरुआत की।
  • इन्होंने सिखों के बीच सती और पर्दा प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त किया|
  • ये अकबर के समकालीन थे।

 

गुरु राम दास (1534-1581) 

  • इन्होंने वर्ष 1577 में अकबर द्वारा दी गई ज़मीन पर अमृतसर की स्थापना की।
  • इन्होंने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) का निर्माण शुरू किया।

गुरु अर्जुन देव (1563-1606)

  • इन्होंने वर्ष 1604 में आदि ग्रंथ की रचना की।
  • इन्होंने स्वर्ण मंदिर का निर्माण का कार्य पूरा किया।
  • वे शाहिदीन-दे-सरताज (Shaheeden-de-Sartaj) के रूप में प्रचलित थे।
  • इन्हें जहाँगीर ने राजकुमार खुसरो की मदद करने के आरोप में मार दिया।

गुरु हरगोबिंद (1594-1644) 

  • इन्होंने सिख समुदाय को एक सैन्य समुदाय में बदल दिया। इन्हें "सैनिक संत" (Soldier Saint) के रूप में जाना जाता है।
  • इन्होंने अकाल तख्त की स्थापना की और अमृतसर शहर को मज़बूत किया।
  • इन्होंने जहाँगीर और शाहजहाँ के खिलाफ युद्ध छेड़ा।

गुरु हर राय (1630-1661) 

  • ये शांतिप्रिय व्यक्ति थे और इन्होंने अपना अधिकांश जीवन औरंगज़ेब के साथ शांति बनाए रखने तथा मिशनरी काम करने में समर्पित कर दिया।

गुरु हरकिशन (1656-1664)

  • ये अन्य सभी गुरुओं में सबसे कम आयु के गुरु थे और इन्हें 5 वर्ष की आयु में गुरु की उपाधि दी गई थी।
  • इनके खिलाफ औरंगज़ेब द्वारा इस्लाम विरोधी कार्य के लिये सम्मन जारी किया गया था।

गुरु तेग बहादुर (1621-1675) 

  • इन्होंने आनंदपुर साहिब की स्थापना की।

गुरु गोबिंद सिंह (1666-1708)

  • इन्होंने वर्ष 1699 में ‘खालसा’ नामक योद्धा समुदाय की स्थापना की।
  • इन्होंने एक नया संस्कार "पाहुल" (Pahul) शुरू किया।
  • ये मानव रूप में अंतिम सिख गुरु थे और इन्होंने ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ को सिखों के गुरु के रूप में नामित किया।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

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