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भारतीय अर्थव्यवस्था

घट सकता है बैंकों का सकल NPA: रिपोर्ट

  • 27 Jun 2019
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

क्रिसिल द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नए बैड लोन (Bad loan) में कमी और ऋणों की ज़्यादा रिकवरी के कारण बैंको की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घटकर लगभग 8 फीसदी हो सकती है।

मुख्य बिंदु

  • बैंकिंग प्रणाली में NPA मार्च 2018 में 11.5 प्रतिशत था जो मार्च 2019 में घटकर 9.3 प्रतिशत हो गया है।
  • बैंकों के परिसंपत्ति की गुणवत्ता में इस वित्त वर्ष 2019-20 में निर्णायक गिरावट होने की संभावना है और सकल गैर निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घटकर मार्च 2020 तक लगभग 8 प्रतिशत हो जाएगी। नए NPA में कमी के साथ-साथ मौजूदा NPA खातों से भी वसूली के ज़रिये यह संभव हो सकता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB), जिनकी NPA में 80% से अधिक हिस्सेदारी है, को अपना सकल NPA मार्च 2018 के 14.6 प्रतिशत से मार्च 2020 तक 10.6 प्रतिशत तक लाना चाहिये।
  • रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त मानदंडों और परिसंपत्ति गुणवत्ता (Assets Quality) की समीक्षा के बाद बैंकों ने वित्त वर्ष 2016 के बाद से NPA के रूप में 17 लाख करोड़ रुपए की पहचान की है।
  • पिछले वित्त वर्ष के 7.4 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2019 में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ नए NPA की वृद्धि दर में गिरावट आई है जो वित्त वर्ष 2020 में लगभग 3.2 प्रतिशत तक गिरने की उम्मीद है।
  • मार्च 2020 तक बैंकिंग प्रणाली के NPA में कुल आधी कटौती हो सकती है कुछ सार्वजानिक क्षेत्रक के बैंक (PSB) के पास विवादित संपत्तियों में कटौती करने के लिये तुलन पत्र (Balance Sheet) मौजूद है।
  • RBI ने वित्त वर्ष 2020 के अंत तक छोटे और मध्यम उद्यमों (Small and Medium Enterprises- SMEs) के ऋणों के पुनर्गठन पर बल दिया है।

स्रोत: द हिंदू (बिज़नेस लाइन)

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