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जैव विविधता और पर्यावरण

हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया

  • 28 Jun 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, हैबर प्रक्रिया

मेन्स के लिये:

हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया पॉलिसी

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रसंस्करण उद्योग में हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया के उत्पादन एवं उपयोग पर एक सेमिनार आयोजित किया गया था।

  • प्रसंस्करण उद्योग वे कंपनियांँ हैं जो भौतिक, यांत्रिक और/या रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अर्ध-तैयार या उच्च गुणवत्ता वाले अंतिम उत्पादों के निर्माण के लिये कच्चे माल, परिवहन और संसाधित करती हैं।

हरित हाइड्रोजन:

  • परिचय:
    • यह ईंधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिये गेम-चेंजर हो सकता है, जो अपने तेल का 85% और गैस आवश्यकताओं का 53% आयात करता है।
    • स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिये भारत उर्वरक संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों हेतु हरित हाइड्रोजन खरीदना अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है।
  • उत्पादन की विधि:
    • यह पवन और सौर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों द्वारा संचालित इलेक्ट्रोलाइज़र का उपयोग करके जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके उत्पादित किया जाता है।
  • उपयोग:
  • महत्त्व:
    • भारत के लिये अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों को पूरा करने और क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, पहुंँच व उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये हरित हाइड्रोजन ऊर्जा महत्त्वपूर्ण है।
    • हरित हाइड्रोजन एक ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में (नवीकरणीय ऊर्जा के) अंतराल को भरने के लिये आवश्यक होगा।
    • गतिशीलता के संदर्भ में शहरों और राज्यों के भीतर शहरी वस्तुओं की ढुलाई या यात्रियों की लंबी दूरी की यात्रा के लिये रेलवे, बड़े जहाज़ों, बसों या ट्रकों आदि में हरित हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है।
    • बुनियादी ढाँचे के समर्थन में हाइड्रोजन में प्रमुख नवीकरणीय लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता है।

हरित अमोनिया:

  • परिचय:
    • अमोनिया एक ऐसा रसायन है जिसका उपयोग मुख्य रूप से यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के निर्माण में किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग अन्य उपयोगों जैसे कि इंजन संचालन के लिये भी किया जा सकता है।
    • हरित अमोनिया का उत्पादन वहाँ होता है जहांँ अमोनिया बनाने की प्रक्रिया 100% नवीकरणीय और कार्बन मुक्त होती है।
  • उत्पादन की विधि:
    • हरित अमोनिया बनाने की एक विधि जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन को वायु द्वारा अलग करना है। फिर धारणीय/सतत् ऊर्जा का उपयोग करते हुए इन्हें हैबर प्रक्रिया (जिसे हैबर-बॉश के नाम से भी जाना जाता है) से गुज़ारा जाता है।
      • हरित अमोनिया के उत्पादन में अक्षय ऊर्जा स्रोतों जैसे- हाइड्रो-इलेक्ट्रिक, सौर ऊर्जा या पवन टरबाइन का उपयोग किया जाता है।
    • हैबर प्रक्रिया में अमोनिया (NH3) का उत्पादन करने हेतु उच्च ताप एवं दाब पर हाइड्रोजन और नाइट्रोजन की एक साथ क्रिया कराई जाती है।
  • उपयोग:
    • ऊर्जा भंडारण: अमोनिया को मामूली दबाव (10-15 बार) पर या -33 डिग्री सेल्सियस तक प्रशीतित तरल के रूप में आसानी से संग्रहीत किया जा सकता है। यह इसे अक्षय ऊर्जा के लिये एक आदर्श रासायनिक भंडार बनाता है।
    • शून्य-कार्बन ईंधन: अमोनिया को इंजन में जलाया जा सकता है या बिजली पैदा करने के लिये फ्यूल सेल में इस्तेमाल किया जा सकता है। जब उपयोग किया जाता है, तो अमोनिया के सह-उत्पाद जल और नाइट्रोजन होते हैं।
    • समुद्री उद्योग में समुद्री इंजनों में ईंधन तेल के उपयोग की जगह इसे शीघ्र अपनाने की संभावना है।
  • महत्त्व:
    • हरित अमोनिया का उपयोग कार्बन-तटस्थ उर्वरक के उत्पादन, खाद्य मूल्य शृंखला को डीकार्बोनाइज़ करने और भविष्य के जलवायु-तटस्थ शिपिंग ईंधन (Climate-Neutral Shipping Fuel) के रूप में किया जा सकता हैl
    • बढ़ती वैश्विक आबादी के लिये खाद्यान्न उपलब्ध करने, CO2 मुक्त ऊर्जा उत्पादन तथा पर्याप्त भोजन का उत्पादन करने की मौजूदा चुनौतियों से निपटने में हरित अमोनिया महत्त्वपूर्ण है।

हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया नीति:

  • नीति के तहत सरकार उत्पादन हेतु विशिष्ट विनिर्माण क्षेत्र स्थापित करने की पेशकश कर रही है, प्राथमिकता के आधार पर ISTS (इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम) से कनेक्टिविटी और जून 2025 से पहले उत्पादन सुविधा चालू होने पर 25 वर्ष के लिये मुफ्त ट्रांसमिशन की पेशकश की गई है।
    • इसका मतलब यह है कि हरित हाइड्रोजन उत्पादक असम में एक हरित हाइड्रोजन संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति करने हेतु राजस्थान में एक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में सक्षम होंगे और उसे किसी भी ‘अंतर-राज्यीय संचरण शुल्क’ का भुगतान नहीं करना होगा।
  • इसके अलावा उत्पादकों को शिपिंग द्वारा निर्यात के लिये हरितअमोनिया के भंडारण हेतु बंदरगाहों के पास बंकर स्थापित करने की अनुमति होगी।
  • उत्पादन लक्ष्य भी वर्ष 2030 तक 10 लाख टन से 5 मिलियन टन तक पाँच गुना बढ़ा दिया गया है।
    • अक्तूबर 2021 में यह घोषणा की गई थी कि भारत शुरू में 2030 तक लगभग 1 मिलियन टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य बना रहा है।
  • हरित हाइड्रोजन और अमोनिया के विनिर्माताओं को पावर एक्सचेंज से अक्षय ऊर्जा खरीदने या अक्षय ऊर्जा क्षमता को स्वयं या किसी अन्य डेवलपर के माध्यम से कहीं भी स्थापित करने की अनुमति है।
  • व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित करने के लिये एमएनआरई (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय) द्वारा समयबद्ध तरीके से वैधानिक मंज़ूरी सहित सभी गतिविधियों को करने के लिये एक एकल पोर्टल स्थापित किया जाएगा।

स्रोत: पी.आई.बी.

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