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भारतीय अर्थव्यवस्था

सरकारी विभाग के खर्चों में कटौती

  • 09 Apr 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये

राजकोषीय नीति और बजट 

मेन्स के लिये

COVID-19 महामारी का आर्थिक प्रभाव

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी को मद्देनज़र रखते हुए इसके आर्थिक प्रभाव को न्यून करने के उद्देश्य से अपने खर्चों में कटौती शुरू कर दी है।

प्रमुख बिंदु

  • सांसदों और मंत्रियों के वेतन एवं अन्य भत्तों में कटौती के पश्चात् सरकार ने सभी विभागों को अपनी पहली तिमाही की खर्च योजनाओं में 60 प्रतिशत की कमी करने के निर्देश दिये हैं।
  • सरकार द्वारा दिये गए निर्देशानुसार, प्रत्येक विभाग को अपने बजट की पुनः समीक्षा करनी होगी और उन्हें अपने बजट में भारी कटौती करनी होगी।
    • हालाँकि सरकार द्वारा दिये गए निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि सभी विभाग अपनी उन योजनाओं में से कुछ भी कटौती नहीं करेंगे, जो COVID-19 महामारी से संबंधित हैं, किंतु इनमें गैर-आवश्यक मदों के लिये कटौती की जा सकती है।
  • केंद्र सरकार ने राज्यों को अभी तक इस संदर्भ में कटौती के लिये कोई भी विशिष्ट निर्देश नहीं दिये हैं, किंतु स्थिति के मद्देनज़र यह कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार जल्द-ही-जल्द ही राज्यों को कटौती के लिये निर्देश जारी करेगी।
  • अनुमान के अनुसार, यदि सरकार के निर्देशों का सही ढंग से पालन किया जाता है तो सरकार के खर्च में 3.34 ट्रिलियन रुपए की कटौती हो सकती है।
  • विश्लेषकों के अनुसार यह कटौती आवश्यक है क्योंकि सभी अनुमानों से पता चलता है कि सरकार के कर और गैर-कर राजस्व दोनों वित्त वर्ष 2021 में बजट अनुमानों से बहुत कम आएंगे।
  • आमतौर पर भारत सरकार की खर्च योजनाओं के तहत मंत्रालयों और विभागों को अपने बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा वर्ष की 4 तिमाही में खर्च करना पड़ता है।
    • इसका अर्थ है कि सभी विभागों को वित्तीय वर्ष के अंत में अपने खर्चों को कम करने से रोकना है।
  • वर्तमान वित्तीय वर्ष में विभागों ने अपनी व्यय योजनाओं को अंतिम रूप दे दिया है, किंतु अब वित्त मंत्रालय ने उनके लिये एक संशोधित नकदी प्रबंधन योजना जारी की है, जिसमें कटौती की सलाह दी गई है।
  • इस उद्देश्य के लिये सरकार ने सभी मंत्रालयों को तीन समूहों में विभाजित किया है। पहले समूह को अपने खर्च में 20 प्रतिशत की कमी करनी होगी, दूसरे समूह को अपने खर्च में 40 प्रतिशत और तीसरे समूह को खर्च में 60 प्रतिशत की कमी करनी होगी।
  • बजट अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 के लिये सरकार ने 30.42 ट्रिलियन रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। 
    • यदि सरकार के कुल अनुमानित खर्च में से प्रतिबद्ध ब्याज भुगतान और राज्यों के हस्तांतरण को अलग कर दिया जाता है तो इसमें 16.20 ट्रिलियन रुपए शेष हैं।
  • मज़दूरी और पेंशन सहित अन्य प्रतिबद्ध व्यय को भी यदि इसमें से घटा दिया जाए तो लगभग 11.62 ट्रिलियन रुपए शेष बचते हैं।
  • विभागों और मंत्रालय को इसी शेष राशि से आवश्यक कटौती करनी होगी।

कोरोनावायरस का आर्थिक प्रभाव

  • उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations-UN) के हालिया अनुमान के अनुसार, कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के कारण वर्ष 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था तकरीबन 1 प्रतिशत तक कम हो सकती है। साथ ही UN द्वारा यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि बिना पर्याप्त राजकोषीय उपायों के आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंध और अधिक बढ़ाया जाता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।
  • विश्लेषण के अनुसार, यदि सरकारें आय सहायता प्रदान करने और उपभोक्ता को खर्च करने हेतु प्रेरित करने में विफल रहती हैं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक कमी आ सकती है।
  • विकसित अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय तक आर्थिक प्रतिबंधों का नकारात्मक प्रभाव जल्द ही व्यापार और निवेश के माध्यम से विकासशील देशों को प्रभावित करेगा।
    • यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका में उपभोक्ता खर्च में तेज़ी से हो रही गिरावट विकासशील देशों से उपभोक्ता वस्तुओं के आयात को प्रभावित करेगा।
  • ज़ाहिर है कि वैश्विक स्तर पर हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिलेगा और यदि इस समस्या को सही ढंग से संभाला नहीं गया तो भारतीय अर्थव्यवस्था, जिसकी स्थिति पहले से ही अच्छी नहीं, की स्थिति और खराब हो सकती है।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड

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