हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

आंतरिक सुरक्षा

सीरियाई युद्ध में रासायनिक हमलों के पीछे सीरियाई वायु सेना

  • 09 Apr 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

OPCW, सरीन गैस

मेन्स के लिये:

रासायनिक हथियारों का नियमन 

चर्चा में क्यों?

‘रासायनिक हथियारों के निषेध के लिये संगठन’ (The Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons- OPCW) ने नवीनतम जाँच एवं पहचान टीम (Investigation and Identification Team- IIT) ने निष्कर्ष निकाला है कि मार्च 2017 में सीरियाई वायु सेना द्वारा रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया गया था।

मुख्य बिंदु:

  • जाँच और पहचान टीम (IIT) ने निष्कर्ष निकाला कि सरकारी बलों ने गृह युद्ध के दौरान अन्य कुछ अवसरों पर क्लोरीन को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था।
  • यद्यपि सीरिया की सरकार ने किसी भी प्रकार के रासायनिक हथियारों के प्रयोग संबंधी घटना से साफ मना कर दिया है। 

जाँच एवं पहचान टीम:

  • IIT की स्थापना OPCW के सदस्य देशों द्वारा वर्ष 2019 में की गई थी। जाँच और पहचान टीम (IIT) सीरियाई अरब गणराज्य में रासायनिक हथियारों के उपयोग करने वाले अपराधियों की पहचान करने की दिशा में कार्य करती है।  
  • IIT रासायनिक हथियार संबंधी सूचनाओं की पहचान और रिपोर्ट करता है, जिनको OPCW के फैक्ट-फाइंडिंग मिशन (Fact-Finding Mission- FFM) द्वारा निर्धारित किया गया है। 

रासायनिक हथियार:

  • यह डिलीवरी सिस्टम जैसे बम अथवा तोपखाने में प्रयुक्त एक ज़हरीला रसायन होता है। सामान्य शब्दों में इन शस्त्रों को रासायनिक शस्त्र (chemical weapon - CW) कहा जाता है जिसमें ज़हरीले रसायन का उपयोग किया जाता है। रासायनिक शस्त्र, जनसंहार करने वाले शस्त्रों का एक प्रकार है। 

IIT द्वारा निकाले गए निष्कर्ष:

  • IIT के अनुसार वर्ष 2017 में सीरियाई युद्ध के दौरान 3 बार रासायनिक हथियारों का उपयोग किया गया: 
    • प्रथम, 24 मार्च को सीरियाई वायु सेना के Su- 22 सैन्य विमान से दक्षिणी लतामीना (Latamina) में एक M4000 हवाई बम गिराया था, जिसमें सरिन (Sarin) का प्रयोग किया गया।
    • दूसरा, 25 मार्च को सीरियाई वायु सेना के हेलिकॉप्टर से लतामीना अस्पताल पर एक सिलेंडर गिराया जिसमें क्लोरीन गैस का प्रयोग किया गया था। 
    • तीसरा, 30 मार्च को, सीरियाई वायु सेना के Su-22 से दक्षिणी लतामीना में सरिन युक्त एक M4000 हवाई बम गिराया गया।

सरिन गैस:

  • जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 1938 में सरिन नामक रासायनिक हथियार को तैयार किया गया। इसे हानिकारक कीटों को मारने के लिये एक कीटनाशक के रूप में तैयार किया गया था। परंतु वर्तमान समय में यह एक सबसे खतरनाक ‘नर्व गैस’ मानी जाती है। 
  • रासायनिक संरचना में यह दूसरे नर्व एजेंट जैसा ही है। तरल रूप में यह गंधहीन और रंगहीन होती है। वाष्पशील होने के कारण यह आसानी से गैस में परिवर्तित हो जाती है।

आगे की राह:

  • FFM के अनुसार इस बात के पर्याप्त आधार है कि जहरीले रसायनों का हथियार के रूप में उपयोग किया गया तथा रसायन में प्रतिक्रियाशील क्लोरीन का उपयोग किया गया था लेकिन किसी देश को इसका दोषी ठहराना FFM के अधिदेश (Mandate) क्षेत्र में नहीं है।
  • IIT न्यायिक या अर्द्ध-न्यायिक निकाय नहीं है जो किसी देश को अपने निष्कर्षों के आधार पर अपराधी घोषित कर सके अत; अब OPCW की कार्यकारी परिषद एवं सदस्य देशों तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव को आगे की कार्यवाई करनी है। 

रासायनिक हथियारों के निषेध के लिये संगठन

(Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons- OPCW)

  • ‘रासायनिक हथियार निषेध संगठन’ (Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons- OPCW) संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा समर्थित एक स्वतंत्र संस्था (संयुक्त राष्ट्र संघ से स्वतंत्र) है, यह रासायनिक हथियार कंवेंशन (Chemical Weapons Convention- CWC) के प्रावधानों को क्रियान्वित करती है। 
  • 29 अप्रैल, 1997 को अस्तित्त्व में आया तथा इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में स्थित है। 
  • OPCW में 193 हस्ताक्षरकर्त्ता देश हैं, जो वैश्विक आबादी के 98% का प्रतिनिधित्व करते हैं। 
  • इज़रायल ने संधि पर हस्ताक्षर तो किये हैं लेकिन रासायनिक हथियार अभिसमय की पुष्टि नहीं की है।  
  • 14 जनवरी, 1993 को भारत सीडब्ल्यूसी के लिये एक मूल हस्ताक्षरकर्त्ता बना।

OPCW के कार्य:

  • अंतर्राष्ट्रीय सत्यापन के तहत सभी मौजूदा रासायनिक हथियारों को नष्ट करना।
  • रासायनिक हथियारों को फिर से उभरने से रोकने के लिये रासायनिक उद्योग की निगरानी करना। 
  • रासायनिक हथियारों के खतरों से सदस्य देशों की सुरक्षा तथा सहायता प्रदान करना। 
  • कंवेंशन के कार्यान्वयन को मज़बूत करने तथा रसायन विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।

स्रोत: द हिंदू

एसएमएस अलर्ट
Share Page