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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

भू-स्थानिक बुद्धिमता

  • 30 Sep 2023
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भू-स्थानिक बुद्धिमता, ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (GPS), उपग्रह, मोबाइल सेंसर, एरियल इमेजेज़  

मेन्स के लिये:

आपदाओं के प्रबंधन में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों का महत्त्व 

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

वर्ष 2023 की गर्मियों में संपूर्ण संयुक्त राज्य में अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदाओं की एक शृंखला देखी गई है, जिसमें रिकॉर्ड तोड़ तापमान, कनाडाई वनाग्नि, ऐतिहासिक बाढ़ और एक शक्तिशाली तूफान शामिल है, ऐसे संकटों को भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता का उपयोग कर कम किया जा सकता है।

भू-स्थानिक बुद्धिमता (Geospatial Intelligence):

  • भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी में भौगोलिक मानचित्रण और विश्लेषण हेतु भौगोलिक सूचना प्रणाली (Geographic Information System- GIS), ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (Global Positioning System- GPS) तथा रिमोट सेंसिंग जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
  • ये उपकरण वस्तुओं, घटनाओं और परिघटनाओं (पृथ्वी पर उनकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार अनुक्रमित जियोटैग) के बारे में स्थानिक जानकारी प्रदान करते हैं। हालाँकि किसी स्थान का डेटा स्थिर (Static) या गतिशील (Dynamic) हो सकता है।
    • किसी स्थान के स्थिर डेटा/स्टेटिक लोकेशन डेटा (Static Location Data) में सड़क की स्थिति, भूकंप की घटना या किसी विशेष क्षेत्र में बच्चों में कुपोषण की स्थिति के बारे में जानकारी शामिल होती है, जबकि किसी स्थान के गतिशील डेटा/डायनेमिक लोकेशन डेटा (Dynamic Location Data) में संचालित वाहन या पैदल यात्री, संक्रामक बीमारी के प्रसार आदि से संबंधित डेटा शामिल होता है।
  • बड़ी मात्रा में डेटा में स्थानिक प्रतिरूप की पहचान के लिये इंटेलिजेंस मैप्स  (Intelligent Maps) निर्मित करने हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सकता है।
  • यह प्रौद्योगिकी दुर्लभ संसाधनों के महत्त्व और उनकी प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लेने में मददगार हो सकती है। 

भू-स्थानिक बुद्धिमता का महत्त्व:

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की निगरानी में सहायता:
    • राष्ट्रीय तूफान केंद्र चक्रवात की अवस्थिति, उसके गठन और दिशा की निगरानी के लिये भू-स्थानिक बुद्धिमता से प्राप्त सूचनाओं पर निर्भर करता है।
    • ये सूचनाएँ संसाधन आवंटन, चेतावनी जारी करने तथा निकासी प्रबंधन में मदद करती है।
  • सर्च एंड रेस्क्यू प्रयास:
    • तुर्किये और सीरिया (फरवरी 2023) में 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद से भू-स्थानिक बुद्धिमता से प्राप्त जानकारियों के उपयोग से क्षति की पहचान करने तथा जीवित बचे लोगों का पता लगाने में  काफी मदद मिली।
    • इसने राहत केंद्रों की स्थापना और आपातकालीन आपूर्ति वितरण की सुविधा में अहम योगदान दिया।
  • पर्यावरणीय निगरानी:
    • जलवायु-संबंधित घटनाओं का पूर्वानुमान:
      • तापमान, वर्षा, स्नोपैक और ध्रुवीय बर्फ की निगरानी की सहायता से किसी प्रकार के व्यवधान का पूर्वानुमान तथा संभावित तैयारी करने में मदद मिलती है।
      • जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली चरम मौसमी घटनाओं से उत्पन्न बढ़ते खतरों का समाधान करने हेतु यह काफी महत्त्वपूर्ण है।
  • सैन्य और सार्वजनिक क्षेत्र में अनुप्रयोग:
    • सीमा प्रबंधन में भू-स्थानिक बुद्धिमता का उपयोग:
      • यूक्रेन के संघर्ष में रूसी सैन्य बलों की गतिविधियों और पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ आदि की रिपोर्ट करने में सैटेलाइट तस्वीरों से प्राप्त महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ बड़ी भूमिका निभाती हैं।
    • परिवहन एवं रसद:
      • GPS तकनीक और भू-स्थानिक डेटा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के कुशल प्रबंधन में सहायता करते हैं।
      • यह सरकारों और व्यवसायों को कार्गो आवाजाही संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान करता है।
  • शहरी नियोजन और स्वायत्त वाहन:
    • शहरी विकास में योगदान:
      • उच्च-रिज़ॉल्यूशन छवियों की सहायता से शहर के योजनाकार एक अधिक सुरक्षित और अधिक कुशल समुदायों का निर्माण कर सकते हैं।
      • इसकी सहायता से साइकिल लेन और यातायात दिशा-निर्देश जैसी सुविधाओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
    • स्वायत्त वाहनों में भूमिका:
      • भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता ज़मीनी स्तर का विवरण प्रदान करके स्वायत्त वाहनों के विकास का समर्थन करती है।
      • सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन प्रणालियाँ बनाई जा रही हैं।
  • निर्णय लेने के लिये डिजिटल ट्विन:
    • संकल्पना और अनुप्रयोग:
      • वे मौसम और क्षेत्र के अनुकूल संघर्ष स्थितियों में प्रभावी साबित हुए हैं।

भू-स्थानिक इंटेलिजेंस की आवश्यकता: 

  • भविष्य की चुनौतियों का समाधान:
    • बढ़ते तापमान और शहरीकरण से भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता की मांग बढ़ जाती है।
    • यह समुदायों की सुरक्षा करने और उभरती परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में सहायता करता है।
  • उद्योग विकास:
    • भू-स्थानिक खुफिया उद्योग वर्ष 2020 के 61 बिलियन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 209 बिलियन डॉलर से अधिक वृद्धि होने का अनुमान है।
    • यह एक सुरक्षित और सूचित भविष्य को आकार देने में आवश्यक भूमिका निभाता है।
  • परिशुद्धता कृषि:
    • कृषि तेज़ी से डेटा-संचालित होती जा रही है। भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता किसानों को फसल प्रबंधन, मृदा की गुणवत्ता, सिंचाई और कीट नियंत्रण के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करती है।
    • यह भारत के लिये महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 18% योगदान कृषि क्षेत्र द्वारा दिया जाता है और इसमें 48% कार्यबल कार्यरत है।

भारत में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिये सरकारी पहल:

  • सरकार ने "भूस्थानिक सूचना विनियमन विधेयक, 2021" प्रस्तुत किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में भू-स्थानिक जानकारी के अधिग्रहण, प्रसार और उपयोग को विनियमित करना है।
    • इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को केंद्र में रखकर मानचित्रण तथा भू-स्थानिक डेटा संग्रह के लिये दिशा-निर्देश निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया।
  • भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता के उपयोग को सुव्यवस्थित करने के लिये राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति, 2022 की शुरुआत की गई थी।

भू-स्थानिक बुद्धिमता से संबंधित चुनौतियाँ:

  • भारत की क्षमता तथा आकार से संबद्ध पैमाने पर भू-स्थानिक सेवाओं एवं उत्पादों की कोई मांग नहीं है।
    • यह मुख्य रूप से सरकारी एवं निजी क्षेत्र में संभावित उपयोगकर्ताओं के बीच जागरूकता की कमी के कारण है।
    • दूसरी बाधा कुशल जनशक्ति की कमी है।
  • उच्च-रिज़ॉल्यूशन पर आधारभूत डेटा की अनुपलब्धता भी एक बड़ी बाधा है।
    • अनिवार्य रूप से आधारभूत डेटा को सामान्य डेटा तालिकाओं के रूप में देखा जा सकता है जिसे  कई अनुप्रयोगों अथवा प्रक्रियाओं के बीच साझा किया जाता है, इन्हें उचित सेवा तथा प्रबंधन हेतु एक मज़बूत आधार निर्माण के लिये जाना जाता है।
  • डेटा साझाकरण और सहयोग पर स्पष्टता की कमी सह-निर्माण एवं परिसंपत्ति को अधिकतम करने से रोकती है।
  • भारत की समस्याओं को हल करने के लिये विशेष रूप से विकसित उपायों में रेडी-टू-यूज़ समाधान (Ready-To-Use Solutions) अभी उपलब्ध नहीं हैं।

आगे की राह

  • जियो-पोर्टल और डेटा क्लाउड की स्थापना: सभी सार्वजनिक-वित्तपोषित डेटा को सेवा मॉडल के रूप में बिना किसी शुल्क अथवा नाममात्र शुल्क के सुलभ बनाने हेतु एक जियो-पोर्टल स्थापित करने की आवश्यकता है।
    • सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि डेटा साझाकरण, सहयोग और सह-निर्माण की संस्कृति को विकसित किया जाए
  • फाउंडेशन डेटा का सृजन: इसमें डेटा एकत्रीकरण, शहरों के लिये डेटा लेयर और प्राकृतिक संसाधनों का डेटा शामिल होना चाहिये। 
  • भू-स्थानिक में स्नातक कार्यक्रम: देश को भारत के प्रमुख संस्थानों में भू-स्थानिक में स्नातक कार्यक्रम शुरू करना चाहिये।
    • ये कार्यक्रम अनुसंधान और विकास प्रयासों को बढ़ावा देंगे जो स्थानीय स्तर पर प्रौद्योगिकियों तथा समाधानों के विकास के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।
  • विनियमन: सर्वे ऑफ इंडिया (SoI) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जैसे राष्ट्रीय संगठनों को राष्ट्र की सुरक्षा तथा वैज्ञानिक महत्त्व से संबंधित परियोजनाओं के विनियमन की ज़िम्मेदारी सौंपी जानी चाहिये।
    • इन संगठनों को सरकारी व्यवसाय के लिये उद्यमियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा नहीं करनी चाहिये क्योंकि सरकारी व्यवसाय नुकसानदेह स्थिति में रहता है।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के संदर्भ में हाल ही में खबरों में रहा "भुवन" क्या है?  (2010)

(A) भारत में दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इसरो द्वारा लॉन्च किया गया एक छोटा उपग्रह
(B) चंद्रयान-द्वितीय के लिये अगले चंद्रमा प्रभाव जाँच को दिया गया नाम
(C) भारत की 3डी इमेजिंग क्षमताओं के साथ इसरो का एक जियोपोर्टल
(D) भारत द्वारा विकसित अंतरिक्ष दूरदर्शी

उत्तर: (C)


मेन्स:

प्रश्न. भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की क्या योजना है और यह हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम को कैसे लाभान्वित करेगा? (2019)

प्रश्न. अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर चर्चा कीजिये। इस प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग ने भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में किस प्रकार मदद की? (2016)

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