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जीनोम का अनुक्रमण

  • 19 Apr 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) द्वारा एक परियोजना के अंतर्गत छात्रों के जीनोम का अनुक्रमण किया जाएगा।

  • इस परियोजना का उद्देश्य जीनोमिक्स की ‘उपयोगिता’ (‘Usefulness’ of Genomics) के बारे में छात्रों की अगली पीढ़ी को शिक्षित करना है।

प्रमुख बिंदु

  • इस परियोजना के तहत देश के लगभग 1,000 ग्रामीण युवाओं का जीनोम सैम्पल एकत्र करके इंडीजिनस जेनेटिक मैपिंग (Indigenous Genetic Mapping) द्वारा इनके जीनोम का अनुक्रमण किया जाएगा।
  • सरकार के नेतृत्व में एक परियोजना चलाई जा रही है जिसमें कम-से-कम 10,000 भारतीय जीनोम को अनुक्रमित किया जाना है, यह परियोजना इसमें सहायक होगी।
  • वैश्विक स्तर पर कई देशों ने रोगों की पहचान एवं उपचार के लिये अद्वितीय आनुवंशिक लक्षणों तथा संवेदनशीलता आदि का निर्धारण करने हेतु अपने देश के नागरिकों के सैम्पल का जीनोम अनुक्रमण किया है।
  • भारत में पहली बार इतने बड़े स्तर पर विस्तृत अध्ययन के लिये जीनोम सैम्पल एकत्र किया है।
  • आमतौर पर जीनोम-सैम्पल का संग्रह देश की जनसंख्या विविधता के प्रतिनिधियों का किया जाता था लेकिन इस बार ऐसे लोगों का सैम्पल लिया जा रहा है जो कॉलेज के छात्र (पुरुष और महिला दोनों) तथा जैविक विज्ञान या जीव विज्ञान के छात्र हैं।

Genome

क्रियाविधि
Methodology

  • जीनोम को रक्त के नमूने के आधार पर अनुक्रमित किया जाएगा जिसके अंतर्गत अधिकांश राज्यों को कवर करने के लिये कम-से-कम 30 शिविर आयोजित किये जाएँगे।
  • सभी व्यक्तियों, जिनका जीनोम अनुक्रम किया जाता है, को एक रिपोर्ट दी जाएगी। साथ ही उन्हें उनके जीन की संवेदनशीलता की जानकारी प्रदान की जाएगी।
  • सामान्यतः कई मामलों में विभिन्न विकारों का कारण एकल-जीन होते हैं।

जीनोम: Genome

  • आणविक जीव विज्ञान और आनुवंशिकी के अनुसार जीन जीवों का आनुवंशिक पदार्थ है, जिसके माध्यम से जीवों के गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचते हैं।
  • किसी भी जीव के डीएनए में विद्यमान समस्त जीनों का अनुक्रम जीनोम (Genome) कहलाता है।
  • मानव जीनोम में अनुमानतः 80,000-1,00,000 तक जीन होते हैं।
  • जीनोम के अध्ययन को जीनोमिक्स कहा जाता है।

जीनोम अनुक्रमण

  • जीनोम अनुक्रमण के तहत डीएनए अणु के भीतर न्यूक्लियोटाइड के सटीक क्रम का पता लगाया जाता है।
  • इसके अंतर्गत डीएनए में मौज़ूद चारों तत्त्वों- एडानीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C) और थायामीन (T) के क्रम का पता लगाया जाता है।
  • डीएनए अनुक्रमण विधि से लोगों की बीमारियों का पता लगाकर उनका समय पर इलाज करना साथ ही आने वाली पीढ़ी को रोगमुक्त करना संभव है।

लक्ष्य

  • लोगों को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में CT स्कैन की भाँति जीनोम के अनुक्रमण के बारे में ज़्यादा-से-ज़्यादा जागरूक किया जाएगा क्योंकि भारत में यह प्रक्रिया काफी हद तक एक समृद्ध शहरी जनसांख्यिकी तक ही सीमित है।
  • इससे लोगों की बीमारियों का समय से इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • लोगों के स्वास्थ्य में होने वाले परिवर्तनों को लंबे समय तक ट्रैक किया जा सकेगा।

निष्कर्ष

  • यह परियोजना पूरे जीनोम अनुक्रमण को निष्पादित करने में भारत की क्षमताओं को प्रदर्शित करेगी।
  • जब से मानव जीनोम को (पहली बार 2003 में) अनुक्रमित किया गया है, इसने रोगों और प्रत्येक व्यक्ति के अद्वितीय आनुवंशिक बनावट के बीच संबंध पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
  • लगभग 10,000 बीमारियाँ जैसे- सिस्टिक फाइब्रोसिस, थैलेसीमिया आदि को एकल जीन की खराबी का परिणाम माना जाता है, जबकि ये जीन कुछ दवाओं के प्रति असंवेदनशील हो सकते हैं।
  • जीनोम अनुक्रमण से कैंसर जैसी बीमारी को भी आनुवांशिकी के दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।

स्रोत- द हिंदू

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