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जैव विविधता और पर्यावरण

भारतीय कोबरा के जीनोम का अनुक्रमण

  • 10 Jan 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

जीनोम का अनुक्रमण

मेन्स के लिये:

भारतीय कोबरा के जीनोम के अनुक्रमण से संबंधित शोध से जुड़े तथ्य

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के वैज्ञानिकों सहित वैज्ञानिकों के एक समूह ने भारत के सबसे विषैले साँपों में से एक ‘भारतीय कोबरा’ (Indian Cobra) के जीनोम (Genome) को अनुक्रमित (Sequenced) किया है।

अध्ययन से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारतीय कोबरा के जीनोम को अनुक्रमित करने के लिये किये गए इस अध्ययन में कोबरा के 14 विभिन्न ऊतकों से लिये गए जीनोम और जीन संबंधी डेटा का प्रयोग किया गया।
  • वैज्ञानिकों ने विष ग्रंथि संबंधी जीनों की व्याख्या की गई तथा विष ग्रंथि की कार्य प्रक्रिया में शामिल विषाक्त प्रोटीनों को समझते हुए इसके जीनोमिक संगठन का विश्लेषण किया।
  • इस अध्ययन के दौरान विष ग्रंथि में 19 विषाक्त जीनों का विश्लेषण किया गया और इनमें से 16 जीनों में प्रोटीन की उपस्थिति पाई गई।
  • इन 19 विशिष्ट विषाक्त जीनों को लक्षित कर तथा कृत्रिम मानव प्रतिरोधी का प्रयोग करके भारतीय कोबरा के काटने पर इलाज के लिये एक सुरक्षित और प्रभावी विष-प्रतिरोधी का निर्माण हो सकेगा।

जीनोम के अनुक्रमण से लाभ:

भारतीय कोबरा के जीनोम के अनुक्रमण से उसके विष के रासायनिक घटकों को समझने में मदद मिलेगी और एक नए विष प्रतिरोधी उपचारों के विकास हो सकेगा क्योंकि वर्तमान विष प्रतिरोधी एक सदी से अधिक समय तक व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित हैं।

विषैले साँपों के उच्च-गुणवत्ता वाले जीनोम के अनुक्रमण से विष ग्रंथियों से संबंधित विशिष्ट विषाक्त जीनों की व्यापक सूची प्राप्त होगी, जिसका प्रयोग परिभाषित संरचना वाले कृत्रिम विष प्रतिरोधी का विकास करने में किया जाएगा।

Genome

विष-प्रतिरोधी बनाने का तरीका:

  • वर्तमान में विष-प्रतिरोधी के निर्माण के लिये साँप के विष को घोड़ों (किसी अन्य पालतू जानवर) के जीन के साथ प्रतिरक्षित किया जाता है और यह 100 साल से अधिक समय की प्रक्रिया द्वारा विकसित है।
  • यह प्रक्रिया श्रमसाध्य है और निरंतरता की कमी के कारण अलग-अलग प्रभावकारिता और गंभीर दुष्प्रभावों से ग्रस्त है।

भारत में सर्पदंश की स्थिति:

  • भारत में प्रत्येक वर्ष ‘बिग-4’ (Big-4) साँपों के सर्पदंश से लगभग 46000 व्यक्तियों की मौत हो जाती है तथा लगभग 1,40,000 व्यक्ति नि:शक्त हो जाते हैं।

बिग-4:

  • इस समूह में निम्नलिखित चार प्रकार के साँपों को सम्मिलित किया जाता है-
    • भारतीय कोबरा (Indian Cobra)
    • कॉमन करैत (Common Krait)
    • रसेल वाइपर (Russell’s Viper)
    • सॉ स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled Viper)
  • वहीं पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग पाँच मिलियन व्यक्ति सर्पदंश से प्रभावित होते हैं, जिसमें से लगभग 1,00,000 व्यक्तियों की मौत हो जाती है तथा लगभग 4,00,000 व्यक्ति नि:शक्त हो जाते हैं।
  • हालाँकि भारत में साँपों की 270 प्रजातियों में से 60 प्रजातियों के सर्पदंश से मृत्यु और अपंगता जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है परंतु अभी उपलब्ध विष प्रतिरोधी दवा केवल बिग-4 साँपों के खिलाफ ही प्रभावी है।
  • हालाँकि साँपों की बिग-4 प्रजातियाँ उत्तर-पूर्वी भारत में नहीं पाई जाती हैं, लेकिन इस क्षेत्र में सर्पदंश के मामलों की संख्या काफी अधिक है।
  • पश्चिमी भारत का ‘सिंद करैत’ (Sind Krait) साँप का विष कोबरा साँप की तुलना में 40 गुना अधिक प्रभावी होता है परंतु दुर्भाग्य से पॉलीवलेंट (Polyvalent) विष प्रतिरोधी इस प्रजाति के साँप के विष को प्रभावी ढंग से निष्प्रभावी करने में विफल रहता है।

भारतीय कोबरा:

  • इसका वैज्ञानिक नाम ‘नाजा नाजा’ (Naja naja) है।
  • यह 4 से 7 फीट लंबा होता है।
  • यह भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान एवं दक्षिण में मलेशिया तक पाया जाता है।
  • यह साँप आमतौर पर खुले जंगल के किनारों, खेतों और गाँवों के आसपास के क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं।

स्रोत- द हिंदू

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