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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट

  • 08 Mar 2024
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट, संपूर्ण-जीनोम अनुक्रमण, जीनोम अनुक्रमण के अनुप्रयोग।

मेन्स के लिये:

जीनोम अनुक्रमण की प्रक्रिया, जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट का लक्ष्य।

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा वित्त पोषित एवं समन्वित परियोजना, जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट ने घोषणा की गई जिसने 10,000 भारतीय जीनोम अनुक्रमण किया गया है।

जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट क्या है?

  • DBT द्वारा 3 जनवरी 2020 को महत्त्वाकांक्षी जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) शुरू किया। इसका नेतृत्व भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु स्थित मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र द्वारा किया जाता है, साथ ही इसमें 20 संस्थानों का सहयोग भी शामिल है।
  • इस परियोजना में भारतीय आबादी में रोग की प्रकृति को समझने एवं पूर्वानुमानित निदान चिह्नक विकसित करने के लिये 10,000 व्यक्तियों के संपूर्ण-जीनोम अनुक्रमण डेटा के साथ विश्लेषण भी शामिल है।
    • भारत की 1.3 बिलियन की आबादी में 4,600 से अधिक जनसंख्या समूह शामिल हैं, जिनमें से कई अंतर्विवाही (निकट जातीय समूहों में विवाह) हैं, जो आनुवंशिक विविधता एवं रोग उत्पन्न करने वाले उत्परिवर्तन में योगदान करते हैं।
  •  8 पेटाबाइट का यह विशाल डेटासेट फरीदाबाद में भारतीय जैविक डेटा केंद्र (IBDC) में संग्रहीत किया जाएगा।
    • वर्ष 2022 में उद्घाटन किया गया IBDC लाइफ साइंस डेटा के लिये भारत का पहला राष्ट्रीय भंडार है।
  • महत्त्व: 
    • भारत-विशिष्ट आनुवंशिक डेटाबेस महत्त्वपूर्ण है क्योंकि प्रारंभिक हृदय गति रुकने से जुड़े MYBPC3 जैसे उत्परिवर्तन वैश्विक स्तर की तुलना में स्थानीय स्तर पर अधिक प्रचलित हैं, जो भारतीय आबादी के 4.5% को प्रभावित करते हैं।
    • भारत, जिसके पास विश्व की सबसे बड़ी आनुवंशिक प्रयोगशाला है, देश के विस्तारित जीव विज्ञान क्षेत्र के विस्तार के लिये महत्त्वपूर्ण है, जिससे भारत के भविष्य के प्रक्षेप पथ को आकार देने और वर्ष 2014 में 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 130 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक होने की आशा है।

नोट: एक वैश्विक टीम की सहायता से प्रथम पूर्ण मानव जीनोम को अनुक्रमित किया गया। यह 13 वर्ष अवधि एवं 3 बिलियन डॉलर के बाद वर्ष 2003 में निर्मित हुआ था। भारत द्वारा प्रथम पूर्ण मानव जीनोम की घोषणा वर्ष 2009 में की गई थी।

  • हालाँकि वर्तमान में संपूर्ण मानव जीनोम को अनुक्रमित करने के साथ सभी प्रकार की गुणवत्ता जाँच करने में केवल 5 दिन का समय लगता है।

जीनोम अनुक्रमण क्या है?

  • जीन और DNA: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) वह अणु है जो सभी ज्ञात सजीवों और कई वायरस के विकास, कार्यप्रणाली, वृद्धि एवं प्रजनन के लिये आनुवंशिक निर्देश देता है।
    • जीन DNA के विशिष्ट खंड होते हैं जिनमें प्रोटीन के उत्पादन के निर्देश होते हैं, जो विभिन्न जैविक कार्यों के लिये आवश्यक होते हैं।
  • जीनोम: जीनोम किसी जीव की संपूर्ण वंशानुगत सूचना का प्रतिनिधित्व करता है, जो मादा-नर जनकों से विरासत में मिली जैविक निर्देश वंशावली के रूप में कार्य करता है।
    • चार न्यूक्लियोटाइड आधारों से बना: एडेनिन (A), साइटोसिन (C), गुआनिन (G) और थाइमिन (T) जीनोम में मनुष्यों में लगभग 3 बिलियन आधारभूत युग्म होते हैं।
    • यह जटिल अनुक्रम किसी व्यक्ति की शारीरिक विशेषताओं, रोगों के प्रति संवेदनशीलता और अन्य जैविक लक्षणों को नियंत्रित करने वाली आवश्यक सूचना को कूटबद्ध करता है।
  • जीनोम अनुक्रमण: जीनोम अनुक्रमण किसी जीव के जीनोम के भीतर न्यूक्लियोटाइड के सटीक क्रम को निर्धारित करने की प्रक्रिया है।
    • संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण एक प्रयोगशाला प्रक्रिया है जो एक प्रक्रिया में किसी जीव के जीनोम में सभी चार आधारों का क्रम निर्धारित करती है।
  • जीनोम अनुक्रमण की प्रक्रिया:
    • सबसे पहले, शोधकर्त्ता एक सैंपल से DNA निकालते हैं, जो आमतौर पर रक्त से प्राप्त किया जाता है।
    • फिर, DNA को छोटे, अधिक प्रबंधनीय खण्डों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें फिर फ्लोरोसेंट मार्करों के साथ टैग किया जाता है।
      • इन टैग किये गए खंडों को DNA सीक्वेंसर नामक विशेष उपकरण का प्रयोग करके अनुक्रमित किया जाता है, जो न्यूक्लियोटाइड आधारों के अनुक्रम का आकलन करता है।
    • अंत में, कंप्यूटेशनल एल्गोरिदम को उत्पन्न डेटा से संपूर्ण आनुवंशिक अनुक्रम के पुनर्निर्माण के लिये नियोजित किया जाता है, जो व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
  • अनुप्रयोग:
    • बायोमेडिकल रिसर्च: जीनोम अनुक्रमण रोगों के आनुवंशिक आधार को समझने, रोग पैदा करने वाले उत्परिवर्तन का अभिनिर्धारण करने और संभावित दवा लक्ष्यों की खोज करने में सहायता करता है।
      • यह शोधकर्त्ताओं को कैंसर, मधुमेह और तंत्रिका संबंधी विकारों जैसी जटिल व्याधियों से संबंधित आनुवंशिक विविधताओं का अध्ययन करने में मदद करता है।
    • फार्माकोजेनोमिक्स: जीनोम अनुक्रमण रोगियों की आनुवंशिक संरचना के आधार पर विभिन्न दवाओं के सेवन से उनके शरीर की प्रतिक्रिया के संबंध में अनुमान करने में सहायता प्रदान करता है।
      • यह अनुमान औषधि के चयन, सेवन और उपचार रणनीतियों के अनुकूलन में मदद कर सकती है जिसके परिणामस्वरूप अधिक प्रभावी तथा व्यक्तिगत उपचार संभव हो सकते हैं।
    • कृषि जीनोमिक्स: रोग प्रतिरोधक क्षमता, उपज और फसल में पोषण सामग्री जैसे कारकों के लिये उत्तरदायी जीन की पहचान करने के लिये फसल सुधार कार्यक्रमों में जीनोम अनुक्रमण का उपयोग किया जाता है।
      • यह कृषि में उन्नति के साथ उन्नत फसल किस्मों को विकसित करने के पादप प्रजनन प्रयासों में सहायता करता है।
    • विकासवादी जीव विज्ञान: जीनोम अनुक्रमण विकासवादी इतिहास और विभिन्न जातियों के अंतर्संबंध के विषय में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
      • यह विभिन्न जीवों में आनुवंशिक विविधता, जनसंख्या गतिशीलता और विकासवादी अनुकूलन का अध्ययन करने में मदद करता है।
    • संरक्षण जीव विज्ञान: जीनोम अनुक्रमण आनुवंशिक विविधता का आकलन कर, लुप्तप्राय प्रजातियों की पहचान कर और प्रजातियों के संरक्षण तथा प्रबंधन के लिये रणनीति विकसित कर संरक्षण प्रयासों में सहायता करता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न   

प्रश्न. भारत में कृषि के संदर्भ में प्रायः समाचारों में आने वाले "जीनोम अनुक्रमण (जीनोम सिक्वेंसिंग)" की तकनीक का आसन्न भविष्य में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है? (2017) 

  1. विभिन्न फसली पौधों में रोग प्रतिरोध और सूखा सहिष्णुता के लिये आनुवंशिक सूचकों का अभिज्ञान करने के लिये जीनोम अनुक्रमण का उपयोग किया जा सकता है।  
  2. यह तकनीक, फसली पौधों की नई किस्मों को विकसित करने में लगने वाले आवश्यक समय को घटाने में मदद करती है।  
  3. इसका प्रयोग फसलों में पोषी रोगाणु-संबंधों को समझने के लिये किया जा सकता है। 

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:   

(a) केवल 1  
(b) केवल 2 और 3  
(c) केवल 1 और 3  
(d) 1, 2 और 3 

उत्तर: (d)

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