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G7 के विदेश मंत्रियों की बैठक

  • 10 May 2021
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?                                                                       

हाल ही में  ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ (G7) देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांँस, जर्मनी, इटली और जापान) के विदेश मंत्रियों की बैठक लंदन, ब्रिटेन में संपन्न हुई।

  • 47वांँ G7 शिखर सम्मेलन जून, 2021 में यूनाइटेड किंगडम की मेज़बानी में आयोजित किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु: 

बैठक के विषय में:

  • आमंत्रित अथिति:
    • इस सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (Association of Southeast Asian Nations- ASEAN) के वर्तमान अध्यक्ष ब्रुनेई दारुस्सलाम आदि के प्रमुख शामिल थे।
      • ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका जून में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे।
  • वार्ता में शामिल मुद्दे:
    • रूस के गैर-ज़िम्मेदाराना और अस्थिर व्यवहार: रूस द्वारा यूक्रेन (Ukraine’s) की सीमाओं पर अवैध रूप से अतिक्रमण, रूस द्वारा क्रीमिया में अपने सैन्य बलों को भेजने की कार्यवाही और वहाँ  किये गए निर्माण कार्यों पर चर्चा की गई।
    • चीन से संबंधित: शिनजियांग और तिब्बत में चीन द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन और दुरुपयोग, विशेष रूप से उइगर और अन्य जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों को निशाना बनाने आदि पर भी चर्चा की गई।
      • चीन से हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong’s) की उच्च स्वायत्तता और अधिकारों और स्वतंत्रता (बेसिक लॉ) का सम्मान करने का आह्वान किया गया।
    • इस दौरान म्याँमार में सैन्य तख्तापलट की भी निंदा की गई।
      •  इंडो-पैसिफिक:
        • साथ ही सम्मेलन में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर आसियान की केंद्रीयता का समर्थन किया गया।
        • एक स्वतंत्र और मुक्त इंडो-पैसिफिक के निर्माण के महत्त्व को दोहराया गया, जो कि समावेशी हो और कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों, क्षेत्रीय अखंडता, पारदर्शिता, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता की रक्षा तथा विवादों शक्तियों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित हो।
    • नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था:
      • इसे सभी देशों द्वारा समय के साथ विकसित होने वाले सहमति के अनुसार अपनी गतिविधियों के संचालन हेतु एक साझा प्रतिबद्धता के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था, व्यापार समझौते, आव्रजन प्रोटोकॉल और सांस्कृतिक व्यवस्था आदि।

ग्रुप ऑफ सेवन (G7): 

G7

  • G7 के विषय में:
    • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका गठन वर्ष 1975 में हुआ था।
    • वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे साझा हित के मुद्दों पर चर्चा करने हेतु इस समूह की बैठक वार्षिक रूप से संपन्न होती है।
    • G7 का कोई निर्धारित संविधान या मुख्यालय नहीं है। वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं द्वारा लिये गए निर्णय गैर-बाध्यकारी होते हैं।
      • चर्चा के लिये आरक्षित विषयों और अनुवर्ती बैठकों सहित शिखर सम्मेलन के तमाम महत्त्वपूर्ण कार्य "शेरपा" (Sherpas) द्वारा किये जाते हैं, जो आमतौर पर व्यक्तिगत प्रतिनिधि या राजदूत होते हैं।
      • यूरोपीय संघ  (European Union), आईएमएफ (IMF), विश्व बैंक (World Bank) और संयुक्त राष्ट्र (United Nations) जैसे महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाता है।
  • मुद्दा:
    • वर्तमान में G7 में शामिल सभी देश सर्वाधिक उन्नत नहीं हैं। यद्यपि भारत सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर उन्नति कर रहा है फिर भी यह G7 का हिस्सा नहीं है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की तरह G7 में भी व्यापक बदलाव लाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

भारत और G7:

  • पूर्व भागीदारी:
    • अगस्त 2019 में फ्रांँस के बिरिट्ज में संपन्न हुए 45वें शिखर सम्मेलन में भारत की  उपस्थिति एक प्रमुख आर्थिक एवं  मज़बूत रणनीतिक साझेदारी को प्रतिबिंबित करती है।
    • वर्ष 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में भी भारत को आमंत्रित किया गया था, हालांँकि महामारी के कारण इस सम्मेलन का आयोजन नहीं किया सका।
    • इससे पहले भारत ने वर्ष 2005 से वर्ष 2009 के मध्य कुल पांँच बार G8 (वर्ष 2014 में रूस के अलग होने के साथ इसे G7 कहा जाने लगा) शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।
  • G7 में भारत की भागीदारी का महत्त्व:
    • यह भारत को विकसित देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
    • यह भारत-प्रशांत क्षेत्र, विशेष रूप से हिंद महासागर में सदस्य देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देगा।
    • वर्तमान में ब्राज़ील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका यानी ब्रिक्स (Brazil-Russia-India-China-South Africa- BRICS) के अध्यक्ष और वर्ष 2023 में G20 के अध्यक्ष के रूप में भारत, बेहतर विश्व के निर्माण हेतु  बहुपक्षीय सहयोग में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्रोत: द हिंदू

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