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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

फ्यूचर ऑफ वर्क रिपोर्ट: ILO

  • 24 Jan 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?


हाल ही में कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग (Global Commission On The Future of Work) ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कामकाज की दुनिया (World of Work) में आए अभूतपूर्व परिवर्तनों के कारण उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिये दुनिया भर की सरकारों से उचित कदम उठाने का आह्वान किया गया है।


प्रमुख बिंदु

  • कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग (Global Commission On The Future of Work) द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘एक बेहतर भविष्य के लिये कामकाज’ (Work for a Brighter Future) है।
    कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग ने 15 महीने की मेहनत के बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया है जिसमें व्यापार, सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के 27 प्रतिनिधि शामिल थे।
  • अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में नई खोज़ों और तकनीकों के इस्तेमाल से रोज़गार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं लेकिन निर्णायक प्रयासों और नीतियों में बदलाव के ज़रिये अगर उन्हें नहीं संवारा गया तो फिर कार्यस्थलों पर असमानताएँ और अनिश्चितताएँ और गहरा जाएंगी।
  • श्रम संगठन की स्थापना 1919 में पहले विश्वयुद्ध के बाद हुई थी और 2019 में उसका शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है।
  • कामकाज के भविष्य पर श्रम संगठन द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कामकाजी जीवन को बेहतर बनाने, विकल्पों का दायरा बढ़ाने, लैंगिक खाई को पाटने और वैश्विक असमानता से हुए नुकसान की भरपाई के अनगिनत अवसर हमारे सामने हैं।
  • लेकिन इन सभी अवसरों को भुनाने के लिये हमें उचित कदम उठाने होंगे। निर्णायक और उचित प्रयासों के बगैर हम एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे होंगे जहाँ पहले से ही कायम असमानताएँ तथा अनिश्चितताएँ और अधिक बढ़ जाएंगी।
  • आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में नई तकनीक, जनसांख्यिकी और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए बेहतरी की ओर कदम बढ़ाने हेतु विश्वव्यापी और सामूहिक मौजूद करने की अपील की गई है। इसके तहत नीतिगत बदलावों को महत्त्वपूर्ण बताया गया है।
  • रिपोर्ट बताती है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, स्वचालित यंत्रों और रोबोटिक्स का प्रभाव नौकरियो पर ज़रूर पड़ेगा। इन क्षेत्रों में नई नौकरियाँ भी पैदा होंगी लेकिन ऐसे अवसरों को पाने के लिये अपने कौशल को भी लगातार निखारना पड़ेगा और सीखने की प्रक्रिया में पीछे रह गए लोग इनका लाभ नहीं उठा पाएंगे।
  • तकनीकी आधुनिकीकरण और हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण की कोशिशों से नई नौकरियों के सृजन की भी संभावना दिखती है।

कुछ प्रमुख सिफारिशें

  • एक सार्वभौमिक श्रम गारंटी जो श्रमिकों के मौलिक अधिकारों, जैसे- पर्याप्त मज़दूरी, काम के घंटे की तय सीमा और सुरक्षित तथा स्वस्थ कार्यस्थल की सुरक्षा प्रदान करती हो।
  • जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी जो जीवन-चक्र में लोगों की ज़रूरतों में सहायक साबित हो सके।

मानवीय पहलुओं पर आधारित एजेंडा

  • दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफन लोवेन की सहअध्यक्षता में वैश्विक आयोग ने मानवीय पहलुओं पर आधारित एजेंडा पर काम किया जिसमें लोगों, संस्थानों और टिकाऊ रोज़गार में निवेश करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
  • इस रिपोर्ट से दुनिया में कामकाज के तरीको में आ चुके बदलाव और भविष्य में आने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।
  • इस रिपोर्ट से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर साझेदारी और आपसी मेलजोल का रास्ता खुलना चाहिये ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और समाज में समानता, न्याय तथा समावेशिता कायम करना सुनिश्चित किया जा सके।

कामकाज के भविष्य पर वैश्विक आयोग (Global Commission On The Future of Work)

  • कामकाज के भविष्य पर ILO द्वारा वैश्विक आयोग का गठन ILO की पहल के दूसरे चरण को चिह्नित करता है।
  • इसका कार्य कामकाज के भविष्य की गहराई से जाँच करना है जो 21वीं सदी में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु विश्लेषणात्मक आधार प्रदान कर सके।
  • आयोग के उद्देश्यों में कामकाज की दुनिया में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान करना तथा भविष्य में इनसे निपटने के तरीकों के बारे में व्यावहारिक सिफारिशें करना भी शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization - ILO)

  • यह ‘संयुक्त राष्ट्र’ की एक विशिष्ट एजेंसी है, जो श्रम-संबंधी समस्याओं/मामलों, मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानक, सामाजिक संरक्षा तथा सभी के लिये कार्य अवसर जैसे मामलों को देखती है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र की अन्य एजेंसियों से इतर एक त्रिपक्षीय एजेंसी है, अर्थात् इसके पास एक ‘त्रिपक्षीय शासी संरचना’ (Tripartite Governing Structure) है, जो सरकारों, नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों का (सामान्यतः 2:1:1 के अनुपात में) इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करती है।
  • यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ शिकायतों को पंजीकृत तो कर सकती है, किंतु यह सरकारों पर प्रतिबंध आरोपित नहीं कर सकती है।
  • इस संगठन की स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् ‘लीग ऑफ नेशन्स’ (League of Nations) की एक एजेंसी के रूप में सन् 1919 में की गई थी। भारत इस संगठन का एक संस्थापक सदस्य रहा है।
  • इस संगठन का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा में स्थित है।
  • वर्तमान में 187 देश इस संगठन के सदस्य हैं, जिनमें से 186 देश संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से हैं तथा एक अन्य दक्षिणी प्रशांत महासागर में अवस्थित ‘कुक्स द्वीप’ (Cook's Island) है।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 1969 में इसे प्रतिष्ठित ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ प्रदान किया गया था।

स्रोत- ILO और संयुक्त राष्ट्र

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