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समिट फॉर डेमोक्रेसी

  • 13 Dec 2021
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये

समिट फॉर डेमोक्रेसी

मेन्स के लिये 

लोकतंत्र: अर्थ और महत्त्व, चुनौतियाँ, भारत द्वारा इस संबंध में किये गए प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘लोकतंत्र को नवीनीकृत करने और निरंकुशता का सामना करने के लिये’ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ‘समिट फॉर डेमोक्रेसी’ का आयोजन किया गया।

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘प्रेसिडेंशियल इनिशिएटिव फॉर डेमोक्रेटिक रिन्यूअल’ की स्थापना संबंधी  घोषणा की जो विदेशी सहायता पहल प्रदान करेगी।
  • इस पहल को 424.4 मिलियन डॉलर की प्रारंभिक पूँजी के माध्यम से संचालित किया जाएगा और इसका उद्देश्य ‘मुक्त एवं स्वतंत्र मीडिया’ का समर्थन करना, भ्रष्टाचार से लड़ना, लोकतांत्रिक सुधारों को मज़बूत करना, लोकतंत्र के लिये प्रौद्योगिकी के उपयोग और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय
    • इसका उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि किस प्रकार स्वतंत्र और अधिकारों का सम्मान करने वाले समाज वर्तमान समय की चुनौतियों जैसे कि कोविड-19 महामारी, जलवायु संकट और असमानता से प्रभावी ढंग से निपटने के लिये मिलकर काम कर सकते हैं।
    • यह सम्मेलन तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित था:
      • सत्तावाद से बचाव
      • भ्रष्टाचार का संबोधन 
      • मानवाधिकारों के प्रति सम्मान बढ़ाना
  • भारत का पक्ष
    • लोकतंत्रों को संयुक्त रूप से सोशल मीडिया और क्रिप्टो से संबंधित मुद्दों से निपटना चाहिये, ताकि उनका उपयोग कमज़ोर करने के बजाय लोकतंत्र को सशक्त बनाने हेतु किया जा सके।
    • भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी 2,500 साल पुरानी लोकतांत्रिक परंपराएँ हैं और डिजिटल समाधानों के माध्यम से भारत लोकतांत्रिक अनुभव को साझा कर सकता है।
      • भारत में लिच्छवियों और अन्य लोगों के तहत प्राचीन शहर राज्यों में लोकतंत्र की सभ्यतागत परंपरा का उल्लेख मिलता है, जो वैदिक और बौद्ध काल के अंत में भारत में विकसित हुआ तथा प्रारंभिक मध्ययुगीन काल तक जारी रहा।
    • लोकतंत्र ने दुनिया भर में विभिन्न रूप ले लिये हैं और ऐसे में लोकतांत्रिक प्रथाओं में कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने की आवश्यकता है।
    • लोकतांत्रिक प्रथाओं और प्रणालियों में लगातार सुधार करने और समावेश, पारदर्शिता, मानवीय गरिमा, उत्तरदायी शिकायत निवारण तथा सत्ता के विकेंद्रीकरण को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता है।

लोकतंत्र

  • अर्थ
    • लोकतंत्र सरकार की एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें नागरिक सीधे सत्ता का प्रयोग करते हैं या एक शासी निकाय जैसे कि संसद बनाने के लिये आपस में प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।
    • इसे ‘बहुमत का शासन’ भी कहा जाता है। इसमें सत्ता विरासत में नहीं मिलती। जनता अपना नेता स्वयं चुनती है।
    • प्रतिनिधि चुनाव में हिस्सा लेते हैं और नागरिक अपने प्रतिनिधि को वोट देते हैं। सबसे अधिक मतों वाले प्रतिनिधि को शक्ति प्राप्त होती है।
  • संक्षिप्त इतिहास
    • भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत वर्ष 1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बन गया। इसके बाद भारत के नागरिकों को वोट देने और अपने नेताओं को चुनने का अधिकार प्राप्त हुआ।

Mapped

  • लोकतंत्र को मज़बूत करने में भारत की भूमिका:
    • दुनिया भर में:
      • क्षमता निर्माण
        • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में चुनाव आयोग के उल्लेखनीय रिकॉर्ड के अलावा, भारत ने कई दशकों तक एशिया, अफ्रीका और दुनिया के अन्य क्षेत्रों के हज़ारों चुनावी अधिकारियों को चुनाव प्रबंधन तथा संसदीय मामलों में प्रशिक्षण दिया है।
      • विकासात्मक भागीदारी प्रशासन (DPA):
        • भारत ने भौगोलिक क्षेत्रों में कई विकासशील और नए लोकतंत्रों के लिये  महत्त्वपूर्ण विकास सहायता परियोजनाओं की पेशकश करने के लिये विदेश मंत्रालय (MEA) के भीतर एक ‘विकासात्मक भागीदारी प्रशासन’ (DPA) का निर्माण किया है।
        • इसमें अफगान संसद का निर्माण और म्याँमार को अपनी प्रशासनिक एवं न्यायिक क्षमताओं के उन्नयन के लिये सहायता प्रदान करना शामिल है।
      • लोकतंत्र की निगरानी के लिये अनुदान:
        • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र का समर्थन करने हेतु ‘संयुक्त राष्ट्र डेमोक्रेसी फंड’ (UNDEP) और ‘कम्युनिटी ऑफ डेमोक्रेसी’ के निर्माण में भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
        • संयोग से, भारत UNDEF के सबसे बड़े योगदानकर्त्ताओं में से एक है, जो दक्षिण एशिया में 66 गैर-सरकारी संगठनों के नेतृत्व वाली परियोजनाओं का समर्थन करता है।
      • संयुक्त राष्ट्र लोकतंत्र कॉकस:
        • भारत ने संयुक्त राष्ट्र डेमोक्रेसी कॉकस बनाने में भी मदद की, जो कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर साझा मूल्यों के आधार पर लोकतांत्रिक राज्यों को बुलाने वाला एकमात्र निकाय है।
    • भारत में:
      • नस्लीय भेदभाव को समाप्त करना:
        • भारत में एक दलित महिला को उच्च पद (मुख्यमंत्री के रूप में) तक पहुंँचने के लिये प्रतिनिधित्व दिया गया।
      • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005:
        • इस अधिनियम ने पूरी तरह से नागरिक समाज संचालित जमीनी आंदोलन को आम नागरिकों के लिये सूचना को सही मायने में लोकतांत्रिक बना दिया है।
      • लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण:
        • वर्ष 1992 में दो  संवैधानिक संशोधन (73वें और 74वें) द्वारा जिस  त्रि-स्तरीय प्रशासन (ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय) की स्थापना की गई उसने पिछले तीन दशकों में गहरा प्रभाव स्थापित किया है।
        • 30 लाख प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न स्तरों (ग्राम सभा, पंचायत समिति जिला परिषद) पर ,यह अब तक विश्व का  सबसे बड़ा लोकतांत्रिक व्यव्स्था है।
  • लोकतंत्र से संबंधित चिंताएंँ:
    • वैश्विक:
      • राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता में गिरावट:
        • दुनिया भर के लोकतंत्र नए स्थापित - कई प्रमुख मापदंडों पर गंभीर संकटों से जूझ रहे हैं।
        • लोकतंत्र की निगरानी करने वाली संस्थाओं की रिपोर्टों के अनुसार, लोकतंत्र में खतरनाक गिरावट देखी जा रही है।
        • डेमोक्रेसी इंडेक्स 2020 के अनुसार, विश्व की बहुत कम  9% आबादी ‘पूर्ण’ लोकतंत्र में रहती है।
          • म्यांमार, ट्यूनीशिया और सूडान में हालिया सैन्य तख्तापलट लोकतंत्र विरोधी ताकतों के निरंतर उदय का प्रमाण है तथा इसकी  बारंबारता  वैश्विक लोकतंत्र समर्थकों की सामूहिक  विफलता को दिखाती है।
      • बढ़ती सत्तावादिता:
        • सत्तावादी शक्तियों, विशेषकर चीन के निरंतर उदय से उत्पन्न बढ़ता खतरा एक प्रमुख चिंता का विषय है।
        • ऐसे समय में जब पश्चिम, विशेष रूप से अमेरिका और समृद्ध यूरोपीय देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को काफी हद तक समाप्त कर दिया है, चीन ने वैश्विक मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मानदंडों को फिर से परिभाषित करने पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।
        • उदाहरण:
          • चीन ने ताइवान को धमकाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक साधनों का इस्तेमाल किया है, विवादित दक्षिण चीन सागर में अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूर किया है, लाखों उइगर मुसलमानों को नजरबंदी शिविरों में डाल दिया है, हॉन्गकॉन्ग में राजनीतिक स्वतंत्रता को नियंत्रित किया है और कई भौगोलिक क्षेत्रों में अपने प्रभाव को मज़बूत करने के लिये अभियान शुरू किया है।
    • भारत:
      • फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2021’ रिपोर्ट में भारत की स्थिति को ‘स्वतंत्र’ से 'आंशिक रूप से स्वतंत्र' कर दिया है। वी-डेम रिपोर्ट ने इसे एक कदम ओर आगे बढ़ते हुए "चुनावी निरंकुशता" करार दिया है।
      • ग्लोबल स्टेट ऑफ डेमोक्रेसी 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, ‘’बैकस्लाइडिंग के कुछ सबसे चिंताजनक उदाहरणों'' के साथ भारत 10 सबसे पीछे खिसकने वाले लोकतंत्रों में से एक था।

आगे की राह 

  • संवैधानिक लोकतंत्र के संस्थागतकरण ने भारत के लोगों को लोकतंत्र के महत्त्व को समझने और उनमें लोकतांत्रिक संवेदनाओं को विकसित करने में मदद की है।
  • साथ ही, यह महत्त्वपूर्ण है कि  सरकार के सभी अंग देश के लोगों के विश्वास को बनाए रखने हेतु सद्भाव से  कार्य करें और वास्तविक लोकतंत्र के उद्देश्यों को सुनिश्चित करें।
  • सरकार को आलोचना को सिरे से खारिज करने के बजाय सुनना चाहिये। लोकतांत्रिक मूल्यों को समाप्त करने के सुझावों पर एक विचारशील और सम्मानजनक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
  • प्रेस और न्यायपालिका, जिन्हें भारत के लोकतंत्र का स्तंभ माना जाता है, को कार्यपालिका के कार्यों कीऑडिटिंग को सक्षम करने हेतु किसी भी कार्यकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होने की आवश्यकता है।

स्रोत: द हिंदू 

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