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पृथ्वी के वायुमंडल का फिंगरप्रिंट

  • 10 Sep 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय (McGill University) के खगोलविदों ने पृथ्वी के वायुमंडल का एक फिंगरप्रिंट बनाया है, जिसका उद्देश्य बाह्य अंतरिक्ष में मानव के रहने के अनुकूल ग्रहों का पता लगाना है।

प्रमुख बिंदु:

  • पृथ्वी के वातावरण का SCISAT उपग्रह (SCISAT Satellite) द्वारा एक दशक से अधिक समय तक अवलोकन के बाद एकत्र किये गए डेटा का उपयोग करते हुए यह वायुमंडलीय फिंगरप्रिंट तैयार किया गया है।
  • वायुमंडलीय फिंगरप्रिंट पर किये गए अध्ययन का निष्कर्ष रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी (Royal Astronomical Society) नामक विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रकार के अध्ययन से जैवहस्ताक्षर (Biosignatures) जैसे संकेतकों का निर्धारण किया जा सकेगा जिससे मानव वास योग्य ग्रहों को खोजने में खगोलविदों को आसानी होगी।
  • वैज्ञानिकों द्वारा विकिरण के प्रयोग से वायुमंडल में मौजूद गैसों का एक जैवहस्ताक्षर (Biosignatures) तैयार किया जाएगा। इस जैवहस्ताक्षर के माध्यम से बाह्य ग्रहों के वायुमंडल में उपस्थित गैसों के आधार पर जीवन की संभावना को व्यक्त किया जा सकेगा।
  • तैयार किये गए वायुमंडलीय फिंगरप्रिंट में ओज़ोन और मीथेन दोनों को एक साथ शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि ऐसा तभी हो सकता है जब पृथ्वी पर इन यौगिकों का कोई कार्बनिक स्रोत उपलब्ध हो।
  • SCISAT उपग्रह को कैनेडियन स्पेस एजेंसी (Canadian Space Agency) ने ओज़ोन परत पर शोध के लिये विकसित किया था। इसका उद्देश्य वातावरण में मौजूद कणों पर गुज़रते हुए सूर्य के प्रकाश के प्रभावों का अध्ययन करना था।
  • SCISAT उपग्रह के माध्यम से खगोलविद वातावरण में सूर्य की किरणों की चमक में आने वाले बदलावों को देखकर यह अनुमान लगा सकते हैं कि वायुमंडल में कौन-सी गैस विद्यमान हैं।
  • इस अध्ययन के पश्चात् टेलीस्कोप के माध्यम से किसी ग्रह के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन और जलवाष्प की उपस्थिति से वहाँ पर मानव के बसने की संभावनाओं का पता लगाया जा सकेगा।

ट्रांज़िट स्पेक्ट्रोस्कोपी (Transit Spectroscopy): किसी बाह्य ग्रह के अध्ययन के लिये विभिन्न तकनीकें विद्यमान हैं। ट्रांज़िट स्पेक्ट्रोस्कोपी (Transit Spectroscopy) भी इन्हीं तकनीकों में से एक है।

इसके तहत किसी बाह्य ग्रह के ग्रहण (Esclipe) के दौरान उसके तापीय उत्सर्जन स्पेक्ट्रम का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है जो उस ग्रह की वायुमंडलीय संरचना के संबंध में जानकारी प्रदान करता है।

TRAPPIST-1 सौरमंडल (TRAPPIST-1 Solar System):

  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को वर्ष 2021 में लॉन्च किया जाएगा इसके माध्यम से TRAPPIST-1 सौरमंडल पर जीवन की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।

TRAPPIST-1

  • TRAPPIST-1 सौरमंडल पृथ्वी से लगभग 40 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है, इसमें सात ग्रह क्रमशः TRAPPIST-1 b, c, d, e, f, g, h हैं। इन ग्रहों का आकार पृथ्वी के समान है।
  • सात में से तीन ग्रहों TRAPPIST-1 e, f, g के गोल्डीलॉक्स ज़ोन (Goldilocks Zone) में होने की संभावना है। इन ग्रहों का तापमान न तो बहुत गर्म है और न ही बहुत ठंडा इसलिये यहाँ पर तरल पानी के मिलने की संभावना बनी हुई है।
  • TRAPPIST-1e ग्रह पर समशीतोष्ण जलवायु के साथ पानी की उपलब्धता की सबसे प्रबल संभावना है।
  • इस सौरमंडल का तारा TRAPPIST-1A एक लाल बौना तारा है जो हमारे सूर्य से छोटा और ठंडा है।
  • TRAPPIST-1A लाल बौना तारा बेहद सक्रिय है जिसमें से पृथ्वी के अरोरा के समान भारी मात्रा में उच्च ऊर्जा वाले प्रोटॉन (Protons) का उत्सर्जन हो रहा है।
  • यह लाल बौना तारा अपने ग्रहों को ट्रांज़िट स्पेक्ट्रोस्कोपी (Transit Spectroscopy) के लिये सुलभ बनाता है।
  • इस सौरमंडल के ग्रहों की कक्षा इसके तारे के करीब है, इसलिये वे कम समय में तारे का परिक्रमण करते हैं।

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के माध्यम से इस सौरमंडल पर मानव जीवन की आवश्यक परिस्थितियों की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा ।

स्रोत: द हिंदू

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