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प्रदूषण नियंत्रण हेतु EPCA की सख्ती

  • 09 Oct 2020
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये:  

‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’, वायु गुणवत्ता सूचकांक 

मेन्स के लिये:

शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की चुनौतियाँ, वायु प्रदूषण से निपटने हेतु सरकार के प्रयास  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ [Environment Pollution (Prevention & Control) Authority-EPCA] ने दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य शहरों में ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (Graded Response Action Plan- GRAP) के तहत निर्धारित वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने का निर्देश दिया है।

प्रमुख बिंदु:  

  • EPCA द्वारा GRAP के तहत निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिये दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों को निर्देश जारी किया गया है
  • गौरतलब है कि 8 अक्तूबर, 2020 को लगातार दूसरे दिन दिल्ली में वायु की गुणवत्ता ‘खराब’ (Poor) श्रेणी की रही थी।
  • EPCA ने 15 अक्तूबर के बाद दिल्ली, गाज़ियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम आदि शहरों में डीज़ल जेनरेटर के प्रयोग को प्रतिबंधित (आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर) करने का निर्देश दिया है।
    • गौरतलब है कि वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने EPCA को सूचित किया था कि वे वर्ष 2020 की सर्दियों तक ऐसे आवश्यक उपाय कर लेंगे जिससे डीज़ल जेनरेटर की आवश्यकता के बिना ग्रिड से ही विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। 

EPCA के निर्देश:  

  • EPCA ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को 15 अक्तूबर के बाद ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (GRAP) के तहत "बहुत खराब" और "गंभीर" श्रेणी के अंतर्गत निर्धारित वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने का निर्देश दिया है।
    • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, NCR में वायु प्रदूषण से निपटने की योजना है। इसे दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आधार पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की अलग-अलग श्रेणियों में क्रियान्वित करने के लिये तैयार किया गया था।
    • GRAP को ‘केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ द्वारा जनवरी 2017 में लागू किया गया। इसके तहत वायु गुणवत्ता की चार श्रेणियों (मध्यम से खराब, बहुत खराब, गंभीर, 'गंभीर +' या 'आपातकाल') के तहत  प्रदूषण नियंत्रण उपाय सुझाए गए हैं।
  • EPCA द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत कंपनियों को ‘राजमार्ग’ और ‘मेट्रो’ जैसी अन्य बड़ी निर्माण परियोजनाओं के लिये राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को प्रदूषण प्रबंधन के लिये निर्धारित मानदंडों/दिशा-निर्देशों का पालन करने के संबंध में शपथ पत्र देना होगा।
  • EPCA अध्यक्ष के अनुसार, ‘रेड' और ‘ऑरेंज’ श्रेणी के उद्योगों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/प्रदूषण नियंत्रण समिति को एक शपथ पत्र देना होगा कि वे केवल अधिकृत ईंधन का उपयोग करेंगे और पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों के बिना कार्य नहीं करेंगे।

अन्य प्रयास:   

  • EPCA और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board- CPCB) के नेतृत्त्व में बने एक ‘कार्यबल’ (Task Force) द्वारा NCR में वायु गुणवत्ता की समीक्षा की जाएगी।
  • यदि इस दौरान वातावरण के प्रदूषण में वृद्धि देखी जाती है तो GRAP की अलग-अलग श्रेणियों के तहत निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण उपायों के ‘अतिरिक्त कदम’ भी उठाए जा सकते हैं, जिसमें निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध,  वाहन पार्किंग शुल्क में वृद्धि आदि शामिल हैं।
  • इसके साथ ही राज्यों को प्रदूषण नियंत्रण के लिये पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। इसके तहत सड़कों पर मशीनीकृत सफाई, धूल को नियंत्रित करने के लिये सड़कों पर पानी का छिड़काव, अपशिष्ट जलाने और धूल उत्सर्जन जैसी गतिविधियों की निगरानी करने हेतु रात्रि गश्त,  ठोस अपशिष्ट की डंपिंग के लिये दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करना आदि शामिल हैं। 

प्रदूषण में वृद्धि का कारण:

  • वायु प्रदूषण में वृद्धि का एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला हानिकारक धुआँ है।  लॉकडाउन में ढील के साथ ही वाहनों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे कारण प्रदूषण में भी वृद्धि देखने को मिली है।
  • भवनों और सड़क निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के कारण हवा में धूल और प्रदूषण की मात्रा में वृद्धि होती है।
  • उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और कोयला आधारित विद्युत संयंत्र प्रदूषण में वृद्धि का एक बड़ा कारक है।
  • कंबाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester) से फसल की कटाई के कारण पौधों का 80% हिस्सा (ठूंठ/पराली) खेत में बचा रह जाता है। अक्तूबर-नवंबर माह के दौरान NCR में प्रदूषण की वृद्धि का एक बड़ा कारण  पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा खेतों में बची हुई पराली को जलाया जाना है।
  • सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही हवा की गति और तापमान में भारी गिरावट देखने को मिलती है, जिसके कारण प्रदूषणकारी कण दूर छिटकने की बजाय धरती के नज़दीक ही बने रहते हैं, जो इस चुनौती को अधिक बढ़ा देता हैं।   

COVID-19 से उत्पन्न चुनौतियाँ:  

  • EPCA अध्यक्ष के अनुसार, वर्तमान में इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि प्रदूषण COVID-19 के खतरे में वृद्धि कर सकता है, अतः इस अवधि के दौरान वायु प्रदूषण के खिलाफ ‘शून्य सहिष्णुता’ अपनाई जानी चाहिये। 
    • गौरतलब है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पीएम 2.5 (PM 2.5) कणों की मात्रा में मामूली वृद्धि के कारण COVID-19 से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ सकती है। 
  • EPCA ने COVID-19 और लॉकडाउन के कारण आर्थिक क्षेत्र में उत्पन्न हुई दबाव की स्थिति को स्वीकार किया और कहा कि EPCA द्वारा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों के दौरान आर्थिक क्षेत्र में कोई व्यवधान न उत्पन्न हो।
  • EPCA द्वारा आगामी सर्दियों में केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से प्रदूषण को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि उसे प्रदूषण नियंत्रण के अतिरिक्त आपातकालीन उपायों का प्रयोग न करना पड़े।   

समाधान:

  • औद्योगिक इकाइयों में केरोसीन या अन्य प्रदूषक ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन तंत्र को मज़बूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये।
  • पराली जलाने से न सिर्फ वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है बल्कि इससे मृदा में उपस्थित पोषक तत्त्वों का भी क्षरण होता है। अतः किसानों को इन समस्याओं के बारे में जागरूक करते हुए उन्हें पराली के निस्तारण हेतु अन्य विकल्पों को अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
  • हाल ही में ‘भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान’  (Indian Agriculture Research Institute- IARI) द्वारा पराली की समस्या से निपटने के लिये ‘पूसा अपघटक कैप्सूल’ (PUSA Decomposer Capsule) का विकास किया गया है, जो इस समस्या से निपटने में सहायक हो सकता है। 

‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’

[Environment Pollution (Prevention & Control) Authority-EPCA]:

  • EPCA का गठन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वर्ष 1998 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत किया गया था।
  • EPCA के गठन का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार करने में उच्चतम न्यायालय का सहयोग करना था।
  • EPCA को पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी व्यक्ति, प्रतिनिधि निकाय या संगठन  की शिकायतों के आधार पर अथवा किसी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।

स्रोत: द हिंदू

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