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भारतीय अर्थव्यवस्था

उद्यम विकास केंद्र

  • 03 Oct 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय ने सभी ज़िलों में उद्यम विकास केंद्रों (Enterprise Development Centres- EDC) की स्थापना करने की घोषणा की है।

उद्यम विकास केंद्र

  • उद्यम विकास केंद्र (EDC) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के क्षेत्र में स्वदेशी उद्यमियों का एक कैडर विकसित करेगा।
  • यह स्टार्ट-अप के लिये इन्क्यूबेटर (Incubators) के समान होगा।

प्रमुख बिंदु

  • केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019-20 के अंत तक नियोजित 500 EDCs में से 20 EDCs को संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • EDC नवोदित उद्यमियों के लिये उद्यम विकास पाठ्यक्रम, व्यावसायिक मार्गदर्शन और कौशल विकास की पेशकश करेंगे।
  • उद्यम विकास केंद्र का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) द्वारा सामना की जाने वाली वित्तीय कठिनाईयों का भी निदान करना है ।
  • सरकार द्वारा MSMEs को प्रदान की जाने वाली सहायता व ऋण EDCs के माध्यम से ही प्रदान किया जाएगा।
  • यह केंद्र क्रेडिट सुविधा, निर्यात संवर्द्धन और आपूर्तिकर्त्ता समावेशन (Supplier Inclusion) की पेशकश करेगा।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत MSME को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है, जिसकी निवेश सीमा निम्नलिखित है-

उद्यम विनिर्माण क्षेत्र (निवेश सीमा) सेवा क्षेत्र (निवेश सीमा)
सूक्ष्म उद्यम 25 लाख रुपए तक 10 लाख रुपए तक
लघु उद्यम 25 लाख रुपए से 5 करोड़ रुपए तक 10 लाख रुपए से 2 करोड़ रुपए तक 
मध्यम उद्यम 5 करोड़ रुपए से 10 करोड़ रुपए तक 2 करोड़ रुपए से 5 करोड़ रुपए तक

स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड

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