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शासन व्यवस्था

ई-सिगरेट निषेध अध्यादेश, 2019

  • 03 Sep 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्र सरकार ने एक मसौदा अध्यादेश प्रस्तुत किया है जिसमें ई-सिगरेट/इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, आयात, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने तथा उल्लंघन करने वालों के लिये एक साल तक की सजा प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद इसे जाँच के लिये ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (Group of Ministers- GoM) के पास भेजा गया है।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाना स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के 100-दिवसीय लक्ष्यों में से एक है।
  • मसौदा अध्यादेश के अनुसार, पहली बार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर एक लाख रुपए का जुर्माना और साथ ही एक साल तक की अधिकतम सज़ा प्रस्तावित है, जबकि एक से अधिक बार अपराध करने वालों पर पाँच लाख रुपए का जुर्माना तथा अधिकतम तीन साल की सज़ा प्रस्तावित है।
  • यदि केंद्र सरकार ‘ई-सिगरेट निषेध अध्यादेश, 2019’ (E-cigarettes Ordinance, 2019) जारी करती है तो उसे संसद के अगले सत्र में एक विधेयक पारित कराना होगा। संसद से विधेयक को मंज़ूरी मिलने के बाद ई-सिगरेट जैसे उत्पादों पर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित प्रतिबंधों को कानूनी समर्थन मिल जाएगा।
  • कई विशेषज्ञों का लंबे समय से यह तर्क रहा है कि ई-सिगरेट स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है, जबकि ई-सिगरेट का समर्थन करने वालों के बीच यह गलत धारणा हावी रही है कि ई-सिगरेट, निकोटिन युक्त पारंपरिक सिगरेट का अच्छा और स्वस्थ्यकर विकल्प है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्तावित अध्यादेश ई-सिगरेट जैसे उपकरणों को रोकने में मददगार साबित होगा, लेकिन जब तक इस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाता तब तक अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल है।
  • दिल्ली के एक NGO ‘कंज़्यूमर वॉयस’ (Consumer Voice) के अनुसार, फिलहाल भारत में आधिकारिक अनुमति के बगैर ई-सिगरेट की 36 से अधिक कंपनियाँ काम कर रही हैं।
  • मुंबई स्थित NGO ‘नेशनल हेल्थ फोरम’ के अनुसार, युवाओं का एक बड़ा हिस्सा वेपिंग (ई-सिगरेट का सेवन) का आदी हो गया है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक सिगरेट के समान स्वास्थ्य जोखिम से युक्त होने के बावजूद ई-सिगरेट तंबाकू का उत्पादन, वितरण और उपयोग मौजूदा राष्ट्रीय कानून के दायरे में नहीं आता है।
  • उल्लेखनीय है कि शीर्ष चिकित्सकीय शोध निकाय, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research- ICMR) ने भी ई-सिगरेट जैसे उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की है।

पृष्ठभूमि

  • स्वास्थ्य से संबंधित विषय राज्य सरकार के अंतर्गत आते हैं, इसलिये स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को किसी उत्पाद के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने जैसा कदम उठाना होगा।
  • फरवरी 2019 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organization- CDSCO) ने सभी ‘राज्य औषधि नियंत्रकों’ को सर्कुलर जारी किया था कि वे इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम (Electronic Nicotine Delivery Systems- ENDS) की ऑनलाइन व ऑफलाइन बिक्री, निर्माण, वितरण, व्यापार, आयात या विज्ञापन की अनुमति न दें।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के उक्त सर्कुलर पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि ई-सिगरेट और ई-हुक्का जैसे इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम (Electronic Nicotine Delivery Systems- ENDS) ड्रग नहीं हैं। इन्हीं परिस्थितियों के मद्देनज़र यह अध्यादेश लाया जा रहा है ताकि ई-सिगरेट के खिलाफ शिकंजा कसा जा सके।

ई-सिगरेट क्या है?

  • ई-सिगरेट या इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम (ENDS) एक बैटरी संचालित डिवाइस है, जो तरल निकोटीन, प्रोपलीन, ग्लाइकॉल, पानी, ग्लिसरीन के मिश्रण को गर्म करके एक एयरोसोल बनाता है, जो एक असली सिगरेट जैसा अनुभव देता है।
  • यह डिवाइस पहली बार 2004 में चीनी बाज़ारों में ‘तंबाकू के स्वस्थ विकल्प’ के रूप में बेची गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 2005 से ही ई-सिगरेट उद्योग एक वैश्विक व्यवसाय बन चुका है और आज इसका बाज़ार लगभग 3 अरब डॉलर का हो गया है।

E-cigarettes

  • ई-सिगरेट ने अधिक लोगों को धूम्रपान शुरू करने के लिये प्रेरित किया है, क्योंकि इसका प्रचार-प्रसार ‘हानिरहित उत्पाद’ के रूप में किया जा रहा है। किशोरों के लिये ई-सिगरेट धूम्रपान शुरू करने का एक प्रमुख साधन बन गया है।
  • भारत में 30-50% ई-सिगरेट्स ऑनलाइन बिकती हैं और चीन इसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता देश है। भारत में ई-सिगरेट की बिक्री को अभी तक उचित तरीके से विनियमित नहीं किया गया है। यही कारण है कि इसे बच्चे और किशोर इसे आसानी से ऑनलाइन खरीद सकते हैं।
  • पंजाब राज्य ने ई-सिगरेट को अवैध घोषित किया है। राज्य का कहना है कि इसमें तरल निकोटीन का प्रयोग किया जाता है, जो वर्तमान में भारत में अपंजीकृत ड्रग के रूप में वर्गीकृत है।
  • इसके चलते पंजाब सरकार ने ई-सिगरेट के विक्रेताओं के खिलाफ मामले भी दर्ज़ किये हैं।
  • अप्रैल 2016 में पंजाब की सत्र अदालत ने मोहाली के विक्रेता को अवैध ड्रग बेचने के ज़ुर्म में तीन साल की सज़ा सुनाई थी।यह भारत में अपनी तरह का पहला मामला था।
  • उल्लेखनीय है कि कर्नाटक राज्य ने भी ई-सिगरेट के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध को मज़बूती से लागू करने के लिये हाल ही में निकोटिन को ज़हरीले पदार्थों के वर्ग A के तहत एक खतरनाक पदार्थ के रूप में अधिसूचित किया है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • कई अध्ययनों से पता चला है कि ई-सिगरेट बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं के लिये बहुत हानिकारक है। ई-सिगरेट पीने वाले लोगों में श्वसन और जठरांत्र संबंधी रोग पाए गए।

स्रोत- इकोनॉमिक टाइम्स

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