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डीएनए प्रोफाइल स्थायी रूप से नहीं रखा जाएगा

  • 14 Jul 2018
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सरकार राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर डीएनए डेटाबैंक की स्थापना करने जा रही है, जो गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान और अपराधों की जाँच में सहायक होगा। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, डेटा बैंक डीएनए विवरण को स्थायी रूप से नहीं रखेगा।

प्रमुख बिंदु:

  • सरकार ने पीड़ितों, आरोपियों, संदिग्धों, गुमशुदा व्यक्तियों और अज्ञात मानव अवशेषों की पहचान के लिये राष्ट्रीय डेटाबेस के रूप में डीएनए डेटा बैंक स्थापित किये जाने का प्रस्ताव रखा है।
  • डीएनए बैंक में डीएनए विवरण को स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं रखा जाएगा।
  • आपराधिक मामलों के संबंध में न्यायिक आदेश के बाद डीएनए विवरण को हटा दिया जाएगा।
  • डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 को संसद की स्वीकृति के उपरांत यह नियम अस्तित्व में आएगा। उल्लेखनीय है कि डीएनए 'प्रोफाइलिंग' बिल का नवीनतम संस्करण 2015 में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार किया गया है।
  • मसौदे का उद्देश्य गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान या अपराध स्थल से एकत्र नमूने के आधार पर व्यक्तियों की पहचान करने हेतु डीएनए प्रौद्योगिकियों का प्रभावी प्रयोग सुनिश्चित करने के लिये एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना है। 
  • गौरतलब है कि कैबिनेट ने 3 जुलाई, 2018 को विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में डीएनए प्रोफाइलिंग बोर्ड और डीएनए डेटा बैंक की परिकल्पना की गई है।

डीएनए डेटा बैंक के लाभ:

  • देश की न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाने एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में सहायक।
  • अपराध सिद्धि दर में बढ़ोतरी में होगी।
  • अज्ञात शवों के परस्पर मिलान करने में आसानी होगी।
  • आपदाओं के शिकार हुए व्यक्तियों की पहचान करने में भी सहायता प्रदान करेगा।
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