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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

स्टार्टअप्स हेतु गारंटी फंड के लिये डी.आई.पी.पी. के प्रयास

  • 09 Sep 2017
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

शुरुआती कारोबार में ऋण के प्रवाह को कम करने तथा नए उद्यमियों के लिये क्रेडिट गारंटी फंड सुनिश्चित करने के लिये औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (Department of Industrial Policy and Promotion - DIPP) द्वारा जल्द ही एक कैबिनेट नोट (cabinet note) प्रस्तुत किया जाएगा।

क्रेडिट गारंटी फंड (Credit guarantee fund)

  • जनवरी 2016 में ‘स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान’ (Startup India action plan) के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस फंड के निर्माण की घोषणा की गई थी।
  • डी.आई.पी.पी. द्वारा प्रबंधित इस निधि में 2,000 करोड़ रुपए की राशि संग्रहित की जाएगी।
  • इसके माध्यम से स्टार्टअप के लिये अधिक से अधिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा स्टार्टअप हेतु दिये जाने वाले ऋणों की गारंटी के तौर पर भी इस फंड का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से एक क्रेडिट गारंटी तंत्र (credit guarantee mechanism) द्वारा स्टार्टअप के ऋण कोष में वृद्धि करने हेतु आवश्यक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

पृष्ठभूमि

  • स्टार्ट-अप इंडिया एक्शन प्लान के अंतर्गत आयकर छूट, विनियमों में कमी के ज़रिये अनुपालन को आसान बनाने तथा एक 'स्टार्ट-अप' के बारे में निश्चित योग्यता का निर्धारण करने जैसे, संरचनात्मक और विनियामक सुधारों के एक व्यापक सेट को सूचीबद्ध किया गया है। 
  • इस कार्य योजना के अंतर्गत स्टार्ट-अप और सलाहकार सेवाओं के द्वारा पेटेंट दाखिल करने की फीस पर 80% की छूट प्रदान की गई है।
  • इसके तहत 10 हज़ार करोड़ रुपए का कोष भी बनाया गया है, जिसका प्रबंधन निजी क्षेत्र के पेशेवरों द्वारा किया जाता है। 

निष्कर्ष

भारतीय कॉर्पोरेट जगत में निवेश संबंधी समस्याओं को हल करने तथा अर्थव्यवस्था में पुनः निजी निवेश को बढ़ावा प्रदान करने हेतु भारत के प्रयासों के संदर्भ में स्टार्ट-अप और उद्यमिता (entrepreneurship) दो बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण अवयव हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जनवरी 2016 में स्टार्ट-अप इंडिया की पहल शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य स्टार्ट-अप के विकास में मदद करना और उद्यमशीलता को उत्प्रेरित करना था।

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