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मृदा-संचारित हेलमनिथेसिस के प्रसार में कमी

  • 27 Oct 2020
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य संगठन, हेलमनिथेसिस, एनीमिया

मेन्स के लिये:

हेलमनिथेसिस के प्रसार को रोकने के लिये सरकार द्वारा किये गए प्रयास 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि भारत के  राज्यों में कृमि के प्रसार/फैलाव (Worm Prevalence)  में कमी आई है।  

प्रमुख बिंदु: 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization-WHO) के अनुसार,  उच्च मृदा-संचारित हेलमनिथेसिस (Soil-Transmitted Helminthiases-STH) से संक्रमित क्षेत्रों में नियमित रूप से साफ-सफाई का ध्यान रखकर बच्चों और किशोरों में कृमि के संक्रमण को समाप्त किया जा सकता है।
  • हेलमनिथेसिस (Helminthiases) परजीवी कृमि (Parasitic Worms) के कारण होने वाली बीमारी या संक्रमण है।

Deworming-infants

पृष्ठभूमि:

  • वर्ष 2012 में STH पर प्रकाशित WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1-14 वर्ष आयु वर्ग के 64% बच्चों पर STH का खतरा/जोखिम था।
  • उस समय स्वच्छता एवं सफाई कार्यक्रमों तथा STH के सीमित प्रसार के आधार पर प्राप्त डेटा से जोखिम का अनुमान लगाया गया था।
  • भारत में STH के जोखिम की सटीकता का आकलन करने के लिये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रव्यापी बेसलाइन STH मैपिंग के समन्वय व संचालन के लिये  राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (National Centre for Disease Control-NCDC) को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है।
  • देश भर में आधारभूत एसटीएच मैपिंग का कार्य वर्ष 2016 के अंत तक पूर्ण कर लिया गया और इससे प्राप्त आँकड़ों में काफी विविधता देखी गई जो मध्य प्रदेश में 12.5% ​​और तमिलनाडु में 85% थी ।
  • NCDC और अन्य भागीदारों के नेतृत्व में निरंतर चल रहे उच्च कवरेज नेशनल डिवर्मिंग डे (National Deworming Day-NDD) कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिये मंत्रालय द्वारा  सर्वेक्षण को और अधिक विस्तारित किया गया है ।

निरंतर किये गए सर्वेक्षण के परिणाम: 

  • 14 राज्यों में सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया गया है। इन सभी 14 राज्यों में प्रचलित  बेसलाइन  सर्वेक्षण की तुलना में निरंतर /अनुवर्ती सर्वेक्षण में कृमि प्रसार में कमी देखी गई।
  • निरंतर/अनुवर्ती सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में कृमि प्रसार में पर्याप्त कमी देखी गई है।
    • छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक NDD कार्यक्रम के 10 चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया हैं, जिनमें देखा गया है कि कृमि प्रसार में वर्ष 2016 के 74.6% से वर्ष 2018 में 13.9% तक की कमी हुई है।
    • सिक्किम में NDD कार्यक्रम  के 9 चरणों को पूरा किया जा चुका है जिनके अनुसार कृमि प्रसार वर्ष 2015 के 80.4% से घटकर वर्ष 2019 में 50.9% को गया है।
    • राजस्थान एकमात्र राज्य है जिसने केवल 21.1 की निम्न आधार रेखा (Low Baseline of 21.1) के कारण वार्षिक चरण को लागू किया तथा वर्ष 2013 के  सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2019 में 1% से कम के स्तर के साथ कृमि प्रसार में महत्त्वपूर्ण कमी देखी गई है।

राष्‍ट्रीय कृमि निवारण  दिवस कार्यक्रम

(National Deworming Day Programme): 

  • राष्‍ट्रीय कृमि निवारण  दिवस कार्यक्रम का संचालन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से WHO तथा तकनीकी भागीदारों के साथ महिला और बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय एवं तकनीकी सहायता मंत्रालय द्वारा मिलकर किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को वर्ष 2015 में शुरू किया गया था।
  • इस कार्यक्रम को स्कूलों और आँगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से अर्द्धवार्षिक आधार (10 फरवरी और 10 अगस्त) पर लागू किया जाता है।
  • देश में इस वर्ष (2020) की शुरुआत में (जो COVID-19 महामारी के कारण रुका था) अंतिम दौर में, 25 राज्यों/संघ-राज्य क्षेत्रों में 11 करोड़ बच्चों और किशोरों को एल्बेंडाज़ोल की गोलियाँ (Albendazole Tablets) दी गईं।
    • WHO द्वारा अनुमोदित अल्बेंडाज़ोल टैबलेट का उपयोग विश्व स्तर पर मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन  (Mass Drug Administration-MDA) कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में बच्चों और किशोरों में आँतों के कीड़े (Intestinal Worms) के उपचार के लिये  किया जाता है।

मृदा-संचारित  हेल्मिन्थ्स

(Soil-Transmitted Helminths):

  • मृदा-संचारित हेल्मिन्थ्स मनुष्यों को संक्रमित करने वाला एक  कृमि/कीट है जो दूषित मृदा के माध्यम से प्रेषित/ संचारित होता है।
    • आँतों के कीड़े परजीवी के रूप में मानव  आँत में रहते हैं तथा जीवित रहने के लिये एक बच्चे के आवश्यक पोषक तत्त्वों और विटामिन का उपभोग करते हैं।
  •   हेल्मिन्थ्स के तीन मुख्य प्रकार हैं जो लोगों को संक्रमित करते हैं, इनमें शामिल हैं-
    • राउंडवॉर्म (एस्केरिस लुम्ब्रिकॉइड्स), Roundworm (Ascaris lumbricoides) 
    • व्हिपवॉर्म (ट्रिचोरिस ट्राइचिरा),Whipworm (Trichuris trichiura)
    • हुकवॉर्म (नेकेटर एमिरिकेनस और एंकिलोस्टोमा ड्यूएनेल), Hookworms (Necator americanus and Ancylostoma duodenale)
      • ये कीड़े अपने भोजन और जीवित रहने के लिये मानव शरीर पर निर्भर रहते हैं और वहाँ रहने के दौरान हर दिन हज़ारों अंडे देते हैं।

संचरण:

  • मृदा-संचारित हेलमन्थ्स के अंडे का प्रसार संक्रमित लोगों के मल द्वारा होता है, जिन क्षेत्रों में स्वच्छता का अभाव होता है, उस स्थान पर ये अंडे मिट्टी को दूषित करते हैं।

प्रभाव:

  • चूँकि कृमि/कीड़े रक्त सहित मेज़बान (मानव शरीर) के ऊतकों को अपने भोजन के रूप में प्रयोग करते हैं जिसके कारण मानव शरीर में लोहे और प्रोटीन की कमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप एनीमिया यानी शरीर में कम हीमोग्लोबिन  (Haemoglobin- Hb) के कारण कोशिकाओं द्वारा ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है।
  • कृमि संक्रमण से पेचिस/दस्त भी हो सकते हैं, संक्रमित व्यक्ति में भूख कम लगना, कम पोषक पदार्थों का सेवन और दुर्बलता देखने को मिलती है। (एक ऐसी स्थिति जो छोटी आँत के माध्यम से पोषक तत्त्वों के अवशोषण को रोकती है।)

उपचार:

WHO द्वारा मान्य/अनुमोदित दवाओं में अल्बेंडाज़ोल (Albendazole), 400 मिलीग्राम तथा मेबेंडाज़ोल (Mebendazole), 500 मिलीग्राम गैर-चिकित्सा कर्मियों (जैसे शिक्षकों) द्वारा दी जाने वाली सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने वाली दवाएँ हैं।

स्रोत: पीआईबी

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