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भारतीय राजनीति

गरीब छात्रों के लिये मुफ्त गैजेट और इंटरनेट

  • 19 Sep 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21

मेन्स के लिये

स्कूली शिक्षा पर महामारी का प्रभाव और यथासंभव उपाय

चर्चा में क्यों?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी में निजी और सरकारी विद्यालयों को निर्देश दिया कि वे ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने के लिये गरीब छात्रों को मुफ्त में गैजेट और इंटरनेट पैकेज प्रदान करें।

प्रमुख बिंदु

  • उच्च न्यायालय का निर्णय
    • दिल्ली उच्च न्यायलय की खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई विद्यालय शिक्षा के माध्यम के रूप में ऑनलाइन मोड का चयन करता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) और अन्य वंचित समूह से संबंधित बच्चे भी इस नई व्यवस्था में शामिल हो सकें और इसका यथासंभव लाभ प्राप्त कर सकें। 
    • निर्णय के अनुसार, निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 12(2) के तहत सरकार से गैजेट और इंटरनेट पैकेज की खरीद के लिये उचित लागत की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) का दावा कर सकते हैं। 
    • न्यायालय ने गरीब और वंचित छात्रों की पहचान करने और इंटरनेट तथा गैजेट्स की आपूर्ति की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिये एक तीन-सदस्यीय समिति के गठन का भी आदेश दिया है। 
  • महत्त्व
    • इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण उत्पन्न हुए डिजिटल डिवाइड को कम करना है। 
    • यह निर्णय इस दृष्टि से भी काफी महत्त्वपूर्ण है कि मौजूदा महामारी के आर्थिक प्रभाव के कारण छोटी उम्र के बच्चों में संसाधनों की कमी की वजह से शिक्षा छोड़ने और विद्यालय न जाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
    • इसलिये इस समस्या को जल्द-से-जल्द संबोधित करने की आवश्यक है, क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता है, तो आर्थिक रूप से कमज़ोर और संवेदनशील वर्ग के बच्चों के सिखने की क्षमता काफी प्रभावित होगी।
  • संबंधित कानूनी प्रावधान
    • संसाधनों की कमी के कारण एक कक्षा के विद्यार्थियों के बीच उत्पन्न हुए डिजिटल डिवाइड से न केवल विद्यार्थी एक-समान अवसर प्राप्त करने में विफल रहते हैं, बल्कि इससे विद्यार्थियों के बीच ही एक भेदभाव की स्थिति बन जाती है, जो कि शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का उल्लंघन होता है।
      • शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम: अधिनियम के अनुसार, निजी और विशेष श्रेणी के विद्यालय कक्षा एक या पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में भर्ती होने वाले आर्थिक रूप से कमज़ोर और संवेदनशील वर्ग के बच्चों के लिये कम-से-कम 25 प्रतिशत सीटों का आवंटन करेंगे, और उन बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेंगे। इसके लिये उन विद्यालयों को सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति दी जाएगी।
      • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 भारत के सभी नागरिकों के लिये कानून के समक्ष समानता और भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण का प्रावधान करता है।
      • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के अधिकार को 2002 के 86वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21(A) के तहत मौलिक अधिकार बना दिया गया है।

  • महामारी और शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल डिवाइड
    • संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस (COVID-19) के आर्थिक परिणामों के प्रभावस्वरूप अगले वर्ष लगभग 24 मिलियन बच्चों पर स्कूल न लौट पाने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
    • महामारी के कारण विद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थानों के बंद होने से विश्व की तकरीबन 94 प्रतिशत छात्र आबादी प्रभावित हुई है और इसका सबसे ज़्यादा प्रभाव निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों पर देखने को मिला है।
    • दिल्ली के आर्थिक और सांख्यिकी निदेशालय (DES) द्वारा कार्यान्वित एक हालिया सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि सर्वेक्षण में शामिल 20.05 लाख परिवारों में से 15.7 लाख के पास कंप्यूटर या लैपटॉप नहीं हैं। 

अन्य संबंधित मामले

  • वर्ष 2019 में इंटरनेट की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केरल उच्च न्यायालय ने फहीमा शिरिन बनाम केरल राज्य के मामले में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आने वाले निजता के अधिकार और शिक्षा के अधिकार का एक हिस्सा बनाते हुए इंटरनेट तक पहुँच के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया है।
  • अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट पर मुक्त भाषा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की थी। 

आगे की राह

  • दिल्ली उच्च न्यायालय का यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी में स्कूली विद्यार्थियों के बीच डिजिटल डिवाइड को कम करने में मदद करेगा, साथ ही यह देश के अन्य राज्यों को भी ऐसा निर्णय लेने के लिये प्रेरित करेगा।
  • कोरोना वायरस महामारी ने तेज़ गति से ऑनलाइन शिक्षा की ओर एक बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित किया है, आवश्यक है कि सरकार द्वारा इस आवश्यकता को पहचाने और इस संबंध में आवश्यक बुनियादी ढाँचे के निर्माण का प्रयास किया जाए।

स्रोत: द हिंदू

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