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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ऑस्ट्रेलिया की ‘डिफेंस स्पेस कमांड’ एजेंसी

  • 28 Mar 2022
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

दुनिया भर में स्पेस कमांड की संरचना, रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन।

मेन्स के लिये:

अंतरिक्ष सैन्यीकरण, भारत के लिये अंतरिक्ष रक्षा की आवश्यकता, अंतरिक्ष उपयोग पर बहुपक्षीय बाध्यकारी समझौते की आवश्यकता।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने अंतरिक्ष में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिये एक नई डिफेंस स्पेस कमांड एजेंसी की स्थापना की घोषणा की है।

  • यह सरकार, उद्योग, सहयोगियों और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के अंतरिक्ष-विशिष्ट प्राथमिकताओं को विकसित करने और उनकी वकालत करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करेगा।

डिफेंस स्पेस कमांड एजेंसी का कार्य:

  • यह एजेंसी अंतरिक्ष क्षेत्र में विशेषज्ञता, रणनीतिक अंतरिक्ष योजना बनाने में सहायता और अंतरिक्ष नीति के परिशोधन के संबंध में किसी भी विकास का हिस्सा बनने में सक्षम होने के लिये कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
  • साथ ही ऑस्ट्रेलिया वैज्ञानिक एवं अंतरिक्ष प्राथमिकताओं को भी स्थापित करेगा और एक कुशल अंतरिक्ष संरचना बनाने की दिशा में काम करेगा।
  • एजेंसी का संचालन- डिज़ाइन, निर्माण, रखरखाव सहित सभी कार्य ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रालय के मानकों एवं सीमा के दायरे में होंगे।

दुनिया भर में स्पेस कमान संरचनाएँ: 

  • स्पेसकॉम- यूएस स्पेस फोर्स।
  • रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA)- भारत
  • संयुक्त स्पेस कमांड (फ्राँस)
  • ईरानी स्पेस कमांड (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स एयरोस्पेस फोर्स)
  • रूसी अंतरिक्ष बल (रूसी एयरोस्पेस बल)
  • यूनाइटेड किंगडम स्पेस कमांड (रॉयल वायु सेना)

बाह्य अंतरिक्ष के सैन्यीकरण और शस्त्रीकरण की अवधारणा:

  • ‘अंतरिक्ष शस्त्रीकरण’ की अवधारणा 1980 के दशक की शुरुआत में ‘सामरिक रक्षा पहल’ (SDI) के माध्यम से सामने आई, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका के ‘स्टार वार्स कार्यक्रम’ के रूप में भी जाना जाता है।
    • यह बड़ी संख्या में उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने का विचार था जो दुश्मन की मिसाइलों के प्रक्षेपण का पता लगाएंगे और फिर उन्हें मार गिराएंगे।
  • बाह्य अंतरिक्ष का सैन्यीकरण बनाम शस्त्रीकरण:
    • शस्त्रीकरण ऐसे अंतरिक्ष-आधारित उपकरणों को कक्षा में स्थापित करने को संदर्भित करता है, जिनमें विनाशकारी क्षमता होती है।
    • बाह्य अंतरिक्ष का सैन्यीकरण थल, समुद्र और वायु-आधारित सैन्य अभियानों के समर्थन में अंतरिक्ष के उपयोग को संदर्भित करता है।

अंतरिक्ष के सैन्यीकरण और शस्त्रीकरण से संबंधित विवाद:

  • ग्लोबल कॉमन्स अंडर थ्रेट: वर्तमान में ग्लोबल कॉमन्स फॉर आउटर स्पेस खतरे में है। बाहरी अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण और शस्त्रीकरण से देशों के बीच प्रतिस्पर्द्धा देखने को मिल रही है।
    • उदाहरण के लिये एंटी-सैट मिसाइलें बाहरी अंतरिक्ष में उपग्रहों को नष्ट कर सकती हैं।
  • वैश्विक संचार प्रणाली के लिये खतरा: एंटी-सैटेलाइट मिसाइलें संचार उपग्रहों को नष्ट कर सकती हैं जिससे संचार प्रणाली में बाधा उत्पन्न हो सकती हैं।
    • उपग्रहों के अपलिंक और डाउनलिंक जैमिंग के कारण भी संचार प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • भविष्य की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: अंतरिक्ष में रुचि रखने वाले राष्ट्रों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे अंतरिक्ष में प्रतिद्वंद्विता बढ़ रही है, साथ ही सैन्यीकरण और शस्त्रीकरण को रोकने के लिये अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर सामान्य आधार बनाने में परिणामी विफलता देखी गई है।
  • पृथ्वी ही हमारा एकमात्र घर है: बाहरी अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण से राष्ट्रों के बीच अनिश्चितता, संदेह, गलत अनुमान, प्रतिस्पर्द्धा एवं आक्रामता का माहौल उत्पन्न होगा, जो युद्ध को जन्म दे सकता है।
    • अंतरिक्ष युद्ध इतना विनाशकारी होगा कि यह पृथ्वी, जो हमारा एकमात्र घर है, को नष्ट कर सकता है। 

बाह्य अंतरिक्ष शस्त्रीकरण में भारत की स्थिति:

  • भारत ने मार्च 2019 में एक सफल एंटी-सैटेलाइट परीक्षण किया। भारत इस परीक्षण के बाद एंटी-सैटेलाइट क्षमता वाले देशों (चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका) में शामिल हो गया है।
  • वर्ष 2019 में भारत ने अंतरिक्ष हेतु रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (DSRO) और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) की भी स्थापना की है।
    • DSRO एक शोध संगठन है जो सैन्य उद्देश्यों हेतु नागरिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास की सुविधा के लिये तैयार है, जबकि DSA संयुक्त राज्य अमेरिका में एक लड़ाकू कमांड के रूप में भूमिका निभाने के साथ-साथ सेना, नौसेना और वायु सेना को एकीकृत करता है तथा इसके लिये रणनीति तैयार करता है।  
  • भारत ने जुलाई 2019 में अपना पहला एकीकृत अंतरिक्ष युद्ध अभ्यास किया, जिसमें सभी सेवाओं के कर्मियों को एक साथ लाया गया। यह अभ्यास भारतीय सैन्य संपत्तियों की सीमा और शक्ति को एकीकृत करने के लिये संचार एवं सैनिक परीक्षण उपग्रहों का उपयोग करने पर केंद्रित है, जो अंतरिक्ष तक पहुँच की आवश्यकता हेतु दृढ़ समझ का संकेत देता है।
  • भारतीय रक्षा समुदाय के कुछ लोगों ने कुछ आक्रामक सुधारों के लिये तर्क दिये है, जिसमें अमेरिकी अंतरिक्ष बल के समान एक सैन्य अंतरिक्ष सेवा की स्थापना भी शामिल है।
    • यह भारत के बढ़ते उपग्रह नेटवर्क की रक्षा की सुविधा प्रदान करेगा, साथ ही दुश्मन देश के खिलाफ कार्रवाई हेतु आधार तैयार करेगा।

अंतरिक्ष से संबंधित वैश्विक नियम और मांगें:

  • वर्ष 1967 में की गई बाहरी अंतरिक्ष संधि: 
    • यह संधि सदस्य देशों को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये बाहरी अंतरिक्ष का प्रयोग करने की इज़ाज़त देती है। साथ ही यह संधि अंतरिक्ष की बाह्य कक्षा में ऐसे हथियार तैनात करने पर पाबंदी लगाती है, जो जनसंहारक हों।
    • यह ऐसे हथियारों को आकाशीय पिंडों जैसे- चंद्रमा या बाहरी अंतरिक्ष में रखने पर भी रोक लगाती है। चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों का उपयोग सभी देशों द्वारा विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये संधि को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
    • भारत बाह्य अंतरिक्ष संधि का एक पक्षकार देश है।
    • चार और बहुपक्षीय संधियाँ हैं जो बाहरी अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) से सहमत विशिष्ट अवधारणाओं से संबंधित हैं:
      • वर्ष 1967 का ‘रेस्क्यू एग्रीमेंट’
      • वर्ष 1972 का स्पेस लायबिलिटी कन्वेंशन
      • वर्ष 1976 का रजिस्ट्रेशन कन्वेंशन
      • वर्ष 1979 का ‘मून एग्रीमेंट’
    • बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति ( United Nations Committee on the Peaceful Uses of Outer Space- COPUOS) इन संधियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्राधिकार से संबंधित अन्य मुद्दों  पर अपनी नज़र रखती है। हालांँकि  इनमें से कोई भी संधि विभिन्न देशों के एंटी  सैटेलाइट मिशनों (Anti-Sat Missions) को प्रतिबंधित नहीं करती है।
  • TCBMS: अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों में पारदर्शिता और विश्वास-निर्माण उपायों (Transparency and Confidence-building Measures-TCBMs) को पेश करने की आवश्यकता पर बहस जारी है।
    • इस संबंध में यूरोपीय संघ (European Union- EU) ने एक आचार संहिता (Code of Conduct- CoC) का मसौदा भी तैयार किया है। हालांँकि प्रमुख शक्तियांँ अभी तक CoC आचरण स्थापित करने के विचार पर सहमत नहीं हैं।.
  • PPWT: यह एक और महत्त्वपूर्ण विचार है जो रूस एवं चीन द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया है।  यह केवल सामूहिक विनाश के हथियारों के बजाय बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ की रोकथाम (Prevention of the Placement of Weapons in Outer Space- PPWT) से संबंधित है जिसका अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा विरोध किया जाता है।

आगे की राह 

  • संपूर्ण मानव जाति के कल्याण हेतु यह अनिवार्य है कि अंतरिक्ष की वैश्विक साझा धारणा को बहाल किया जाए।
  • एक केंद्र नियंत्रित शासन प्रणाली की स्थापना करना जो अंतरिक्ष अन्वेषण हेतु एक ज़िम्मेदार और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करेगी तथा हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिये शांतिपूर्ण पारिस्थितिकी सुनिश्चित करेगी।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

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