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कॉन्ग्रेशनल गोल्ड मेडल

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  • 16 Aug 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये

महात्मा गांधी, कांग्रेशनल गोल्ड मेडल, रॉलेट एक्ट, असहयोग आंदोलन 

मेन्स के लिये 

महात्मा गांधी के अहिंसात्मक सिद्धांत 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अहिंसा के मार्गों के माध्यम से महात्मा गांधी को उनके योगदान के लिये मरणोपरांत कांग्रेशनल गोल्ड मेडल से सम्मानित करने हेतु अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव फिर से पेश किया गया है।

  • यदि पुरस्कार दिया जाता है, तो महात्मा गांधी कांग्रेशनल गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बन जाएंगे, कांग्रेशनल गोल्ड मेडल अमेरिका में सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

प्रमुख बिंदु

पुरस्कार के बारे में :

  • अमेरिकी कॉन्ग्रेस (विधायिका) ने विशिष्ट उपलब्धियों और योगदान के लिये राष्ट्रीय प्रशंसा की अपनी सर्वोच्च अभिव्यक्ति के रूप में स्वर्ण पदकों को कमीशन किया है।
  • पदक के पहले प्राप्तकर्त्ता अमेरिकी क्रांति (1775-83), 1812 के युद्ध और मैक्सिकन युद्ध (1846-48) के प्रतिभागी थे।
  • कुछ अन्य क्षेत्रों में अग्रदूतों के बीच अभिनेताओं, लेखकों, मनोरंजनकर्त्ताओं, संगीतकारों, खोजकर्त्ताओं, एथलीटों, मानवतावादियों और विदेशी प्राप्तकर्त्ताओं को शामिल करने के लिये इसका दायरा बढ़ाया गया था।
  • यह 1980 की अमेरिकी ग्रीष्मकालीन ओलंपिक टीम, रॉबर्ट एफ कैनेडी, नेल्सन मंडेला और जॉर्ज वाशिंगटन सहित कई अन्य लोगों को प्रदान किया गया है।
  • हाल ही में यूएस कैपिटल पुलिस को 6 जनवरी, 2021 को हुए हमले एवं घेराबंदी  से  यूएस कैपिटल की रक्षा करने वालों को पदक प्रदान किया गया था।

अहिंसा:

  • अहिंसा का सिद्धांत- इसे अहिंसक प्रतिरोध के रूप में भी जाना जाता है, यह सामाजिक या राजनीतिक परिवर्तन करने के लिये शारीरिक हिंसा के उपयोग को अस्वीकार करता है।
    • महात्मा गांधी के अहिंसक तकनीक का सार यह है कि यह विरोधों को समाप्त करने का प्रयास करती है, लेकिन विरोधियों को नहीं।
  • अहिंसक क्रिया एक ऐसी तकनीक है इसके द्वारा जो लोग निष्क्रियता और अधीनता को अस्वीकार करते हैं और संघर्ष को आवश्यक मानते हैं, वे बिना हिंसा के अपने संघर्ष छेड़ सकते हैं।
    • अहिंसा की तीन मुख्य श्रेणियाँ हैं:
      • विरोध और अनुनय, जिसमें मार्च और जागरण शामिल है।
      • असहयोग।
      • अहिंसक हस्तक्षेप, जैसे नाकाबंदी और व्यवसाय।
  • अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

अहिंसा की गांधीवादी रणनीति:

  • गांधीजी ने बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म के ‘अहिंसा’ के धार्मिक सिद्धांत को अपनाया तथा इसे सामूहिक कार्रवाई के लिये एक अहिंसक उपकरण में बदल दिया।
  • गांधीजी ने इसे ‘सत्याग्रह’ कहा, जिसका अर्थ है 'सत्य का बल'।
    • इस सिद्धांत के मुताबिक, किसी भी अहिंसक संघर्ष का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी को परिवर्तित करना और उसके मन तथा उसके दिल पर जीत हासिल करना होता है।
  • उन्होंने इस सिद्धांत का उपयोग न केवल औपनिवेशिक शासन बल्कि नस्लीय भेदभाव और अस्पृश्यता जैसी सामाजिक बुराइयों से लड़ने के लिये भी किया।
  • दक्षिण अफ्रीका में (1893-1915) उन्होंने जन आंदोलन की इस नई पद्धति यानी ‘सत्याग्रह’ के साथ नस्लवादी शासन का सफलतापूर्वक मुकाबला किया।
  • भारत में महात्मा गांधी का पहला ‘सत्याग्रह आंदोलन’ वर्ष 1917 में बिहार के चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों के समर्थन में था।
  • वर्ष 1919 में उन्होंने प्रस्तावित ‘रॉलेट एक्ट’ (1919) के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह शुरू करने का फैसला किया।
  • असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान गांधीजी और उनके अहिंसा के नए तरीकों को लेकर लोगों में काफी उत्साह था तथा इस दौरान सभी राजनीतिक दलों एवं धर्मों के भारतीय लोग आंदोलन में शामिल हुए थे।
  • इसके अन्य उदाहरणों में- नमक सत्याग्रह (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) शामिल हैं।
  • मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, दलाई लामा, आंग सान सू की जैसे विश्व के कई प्रसिद्ध लोगों ने बापू द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण किया है और अपने-अपने समाज में समृद्धि लाए हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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