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भारतीय इतिहास

राष्‍ट्रीय नमक सत्‍याग्रह स्‍मारक

  • 31 Jan 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?


महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक (National Salt Satyagraha Memorial) राष्ट्र को समर्पित किया।

  • दांडी गुजरात के नवसारी ज़िले में स्थित है।
  • इस स्मारक में महात्मा गांधी और ऐतिहासिक दांडी नमक यात्रा के दौरान उनके साथ 80 सत्याग्राहियों की प्रतिमाएँ हैं जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ समुद्र के पानी से नमक बनाया था।
  • यहाँ बने 24 कथात्मक भित्ति चित्र (Narrative Murals) 1930 के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह से जुड़ी विभिन्न घटनाओं और कथाओं को दर्शाते हैं।

नमक सत्याग्रह (Salt Satyagraha)


पृष्ठभूमि-
दिसंबर 1929 के अंत में आयोजित कॉन्ग्रेस के लाहौर अधिवेशन में दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जहाँ जवाहरलाल नेहरू को कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष चुना गया जो कि युवा पीढ़ी को नेतृत्त्व सौंपने का प्रतीक था, वहीं ‘पूर्ण स्वराज’ अथवा पूर्ण स्वतंत्रता की उद्घोषणा भी की गई।

  • 26 जनवरी, 1930 को विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और देशभक्ति के गीत गाकर ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया गया। स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने के तुरंत बाद महात्मा गांधी ने घोषणा की कि वे ब्रिटिश भारत के सर्वाधिक घृणित कानूनों में से एक, जिसने नमक के उत्पादन और विक्रय पर राज्य को एकाधिकार दिया है, को तोड़ने के लिये एक यात्रा का नेतृत्व करेंगे।
  • 31 जनवरी, 1930 को महात्मा गांधी ने वायसराय इरविन को एक पत्र लिखा जिसमें 11 मांगों का उल्लेख किया गया था। इस मांगों में सबसे महत्त्वपूर्ण मांग नमक पर लगने वाले कर को समाप्त करने की थी।

नमक कानून का विरोध क्यों?

  • प्रत्येक भारतीय घर में नमक का प्रयोग अपरिहार्य था लेकिन इसके बावजूद उन्हें घरेलू उपयोग के लिये भी नमक बनाने से रोका गया और इस तरह उन्हें दुकानों से ऊँचे दाम पर नमक खरीदने के लिये बाध्य किया गया था।
  • उस समय बिना कर (जो कभी-कभी नमक के मूल्य का चौदह गुना होता था) अदा किये नमक के प्रयोग को रोकने के लिये सरकार उस नमक को नष्ट कर देती थी जिसे वह लाभ पर नहीं बेच पाती थी।

नमक सत्याग्रह की शुरुआत

dandi


12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से इस सत्याग्रह की शुरुआत की। यह यात्रा साबरमती आश्रम से 240 किमी. दूर गुजरात के दांडी नामक तटीय कस्बे में पहुँचकर समाप्त होनी थी।

  • यह पहली राष्ट्रवादी गतिविधि थी, जिसमें औरतों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
  • 6 अप्रैल,1930 को वे दांडी पहुँचे और वहाँ मुट्ठीभर नमक बनाकर ‘नमक कानून’ का उल्लंघन किया और कानून की नज़र में स्वयं को अपराधी बना दिया। यहीं से सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।
  • नमक सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी सहित 60,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
  • 5 मार्च, 1931 को गांधी और इरविन के बीच एक समझौता हुआ जिसे ‘गांधी-इरविन समझौता’ या ‘दिल्ली पैक्ट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस समझौते के तहत समुद्र के किनारे बसे लोगों को नमक बनाने व उसे एकत्रित करने की छूट दिये जाने की मांग को स्वीकार किया गया।

स्रोत : पी.आई.बी एवं एन.सी.ई.आर.टी

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