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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

पालतू रेशमकीट कोकून के रंग

  • 14 Nov 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

रेशम, कैरोटीनॉयड तथा फ्लेवोनोइड, सिल्क समग्र, केंद्रीय रेशम बोर्ड

मेन्स के लिये:

भारत में रेशम उत्पादन, पशुपालन संबंधी अर्थशास्त्र

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों? 

रेशम, जिसे अमूमन "रेशों की रानी" (Queen of fibres) कहा जाता है, सदियों से अपनी सुंदरता एवं विलासिता के लिये मूल्यवान रही है। शोधकर्त्ताओं ने रेशम उत्पादक कीटों के कोकून के रंग और अनुकूलन संबंधी आनुवंशिक कारकों का खुलासा किया है तथा उनके द्वारा रेशम उद्योग में लाए गए परिवर्तन को उजागर किया है।

रेशम में कोकून क्या है?

  • रेशम में कोकून रेशम के धागे की एक सुरक्षात्मक परत होती है जिसे रेशमकीट अपने चारों ओर बुनता है।
  • रेशम का धागा बहुत महीन, मज़बूत और चमकदार होता है। कोकून का आकार आमतौर पर अंडाकार अथवा गोल होता है।
  • कोकून का उपयोग बुने हुए धागे को खोलकर एवं उसे बुनकर रेशमी कपड़ा बनाने के लिये किया जा सकता है।

रेशम शलभ (Silk Moth) पालन से कौन-सी आनुवंशिक अंतर्दृष्टि उजागर होती है?

  • रेशम शलभ पालन का विकास:
    • इसका उत्पादन घरेलू रेशम शलभ (बॉम्बिक्स मोरी) के कोकून द्वारा किया जाता है, जो चीन में 5,000 वर्ष से भी पहले जंगली रेशम कीट (बॉम्बिक्स मंदारिना) से प्राप्त हुआ था।
      • पालतू रेशम शलभ विश्व भर में पाया जाता है, जबकि पैतृक कीट अभी भी चीन, कोरिया, जापान एवं सुदूर-पूर्वी रूस जैसे क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • रेशम के प्रकार:
    • जंगली रेशम (गैर-शहतूत रेशम):
      • जंगली रेशम, जिसमें मुगा, टसर एवं एरी रेशम शामिल हैं, अन्य कीट प्रजातियों से प्राप्त किये जाते हैं जिनके नाम एंथेरिया असामा, एंथेरिया माइलिटा और सामिया सिंथिया रिसिनी हैं।
      • ये कीट मानव देखभाल के बिना स्वतंत्र रूप से जीवित रहते हैं और उनके कैटरपिलर विभिन्न प्रकार के पेड़ों से भोजन प्राप्त करते हैं।
      • भारत में उत्पादित कुल रेशम का लगभग 30% गैर-शहतूत रेशम है।
        • इन रेशमों में शहतूत रेशम के लंबे, महीन और चिकने धागों की तुलना में छोटे, मोटे एवं सख्त धागे होते हैं।
    • शहतूत रेशम (Mulberry Silk):
      • वैश्विक रेशम उत्पादन में रेशम के सबसे सामान्य और व्यापक रूप से उत्पादित प्रकार का हिस्सा लगभग 90% है।
        • यह घरेलू शहतूत रेशमकीट (बॉम्बिक्स मोरी) के कोकून से प्राप्त होता है, जो विशेष रूप से शहतूत की पत्तियों को खाता है।   
      • इसमें लंबे, चिकने और चमकदार रेशे होते हैं जिन्हें अलग-अलग बनावट तथा फिनिश वाले विभिन्न कपड़ों के रूप में बुना जा सकता है।
      • यह कपड़े, बिस्तर, पर्दे, असबाब और सहायक उपकरण जैसे अनुप्रयोगों की एक विस्तृत शृंखला के लिये उपयुक्त है।
  • कोकून का रंग:
    • पैतृक शहतूत कीट (एकसमान) भूरे-पीले कोकून का निर्माण करता है।
      • इसके विपरीत पालतू रेशम कीट कोकून पीले-लाल, सुनहरे, गुलाबी, हल्के हरे, गहरे हरे या सफेद रंग के आकर्षक पैलेट में आते हैं।
    • रेशम कीट के कोकून को रंगने वाले रंगद्रव्य कैरोटीनॉयड और फ्लेवोनोइड नामक रासायनिक यौगिकों से प्राप्त होते हैं, जो शहतूत की पत्तियों से बनते हैं जिन्हें रेशम कीट खाते हैं।
      • रेशम कीट कैरोटीनॉयड और फ्लेवोनोइड को अवशोषित करते हैं तथा उन्हें रेशम ग्रंथियों तक पहुँचाते हैं, जहाँ उन्हें ले जाया जाता है एवं रेशम प्रोटीन से बाँध दिया जाता है।
      • रेशम ग्रंथियों में वर्णक की मात्रा और प्रकार रेशम के धागों के रंग तथा तीव्रता को निर्धारित करते हैं, जिन्हें रेशम के कीड़ों द्वारा कोकून बनाने के लिये बाहर निकाला जाता है।
    • कोकून को रंगने वाले रंगद्रव्य जल में घुलनशील होते हैं, इसलिये वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।
      • बाज़ार में हम जो रंगीन रेशम देखते हैं, वे एसिड रंगों का उपयोग करके तैयार किये जाते हैं।
    • कैरोटीनॉयड और फ्लेवोनोइड के लिये उत्तरदायी जीन में उत्परिवर्तन अलग-अलग रंग के कोकून का कारण बनता है, जो रेशम की विविधता के आणविक आधार में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।   

भारत के रेशम उद्योग की स्थिति:

  • रेशम उत्पादन:
    • भारत, चीन के बाद कच्चे रेशम का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
    • वित्तीय वर्ष 2020-21 में देश में 33,739 मीट्रिक टन कच्चे रेशम का पर्याप्त उत्पादन हुआ।
      • भारत में शहतूत, टसर, मुगा और एरी सहित विभिन्न प्रकार के रेशम पाए जाते हैं। ये विविधताएँ रेशम कीटों की विशिष्ट आहार आदतों देखी जाती हैं।
    • रेशम उद्योग भारत के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा अर्जक (Foreign Exchange Earners) में से एक है, जो देश के आर्थिक परिदृश्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
  • अग्रणी राज्य:
    • वित्तीय वर्ष 2021-22 में कर्नाटक 32% का महत्त्वपूर्ण योगदान देकर भारत के रेशम उत्पादन में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।
      • अन्य महत्त्वपूर्ण योगदानकर्त्ताओं में आंध्र प्रदेश (25%) के साथ-साथ असम, बिहार, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं, जो संपन्न रेशम उद्योग में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • शीर्ष आयातक:
    • भारत, विश्व के 30 से अधिक देशों को निर्यात करता है। कुछ शीर्ष आयातक हैं-  संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी।
  • श्रमिक संख्या: 
    • देश का रेशम उत्पादन उद्योग ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में लगभग 9.76 मिलियन लोगों को रोज़गार देता है। भारत में रेशम उत्पादन गतिविधियाँ 52,360 गाँवों में फैली हुई हैं।
  •  केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB):
    • यह एक सांविधिक निकाय है, जिसे वर्ष 1948 में संसद के एक अधिनियम द्वारा भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत स्थापित किया गया था।
      • इसका मुख्यालय बंगलूरू में स्थित है।
    • CSB अनुसंधान, विस्तार, प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन सहायता के माध्यम से भारत में रेशम उत्पादन तथा रेशम उद्योग के समग्र विकास एवं प्रसार के लिये ज़िम्मेदार है।
  • पहल:
    • सिल्क समग्र
    •  पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र संवर्द्धन योजना (NERTPS):
      • इस योजना का उद्देश्य एरी और मुगा रेशम पर विशेष ध्यान देने के साथ उत्तर पूर्वी राज्यों में रेशम उत्पादन का पुनरुद्धार, विस्तार और विविधीकरण करना है।
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