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सिविल सेवक और डिजिटल साक्षरता

  • 03 Sep 2022
  • 5 min read

मेन्स के लिये:

सिविल सेवकों के लिये डिजिटल साक्षरता का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने भारत के सिविल सेवकों को भविष्य में सशक्त बनाने हेतु कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के साथ भागीदारी की है।

  • 'माइक्रोसॉफ्ट डिजिटल उत्पादकता कौशल में MSDE द्वारा क्षमता निर्माण' परियोजना के तहत साझेदारी का उद्देश्य भारत सरकार (GoI) के लगभग 2.5 मिलियन सिविल सेवकों की कार्यात्मक कंप्यूटर साक्षरता को बढ़ाना है।
  • यह परियोजना मिशन कर्मयोगी के अनुरूप है।

डिजिटल साक्षरता

  • डिजिटल साक्षरता का आशय उन तमाम तरह के कौशलों के एक समूह से है, जो इंटरनेट का प्रयोग करने और डिजिटल दुनिया के अनुकूल बनने के लिये आवश्यक हैं।
  • चूँकि प्रिंट माध्यम का दायरा धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है और ऑनलाइन उपलब्ध जानकारियों का दायरा व्यापक होता जा रहा है, इसलिये ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी को समझने के लिये डिजिटल साक्षरता आवश्यक है।
  • जिन लोगों और छात्रों में डिजिटल साक्षरता कौशल की कमी है, उन्हें जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी तक पहुँच प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।

सिविल सेवकों हेतु डिजिटल साक्षरता का महत्त्व:

  • कुशल और प्रभावी नागरिक केंद्रित सेवाएँ प्रदान करने के लिये:
    • डिजिटल साक्षरता समाज के कमज़ोर और वंचित वर्गों को कुशल और प्रभावी नागरिक केंद्रित सेवाएँ प्रदान करने के लिये भारत के सिविल सेवकों को सशक्त बनाएगी।
    • यह उन्हें अंतिम बिंदु तक सामाजिक कल्याण संबंधी सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम बनाएगा।
  • योग्यता अंतराल में कमी लाना:
    • पेशेवर स्तर पर माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस टूल्स, जैसे वर्ड, एक्सेल और पावरपॉइंट प्रेज़ेटेशन पर काम करते समय सिविल सेवकों के मध्य विभिन्न भूमिकाओं में पहचाने जाने वाले प्रमुख योग्यता अंतरालों में से एक डिजिटल उत्पादकता अनुप्रयोग कौशल की कमी है। इसलिये डिजिटल सशक्तीकरण, योग्यता अंतराल को कम करने में योगदान देगा।

भविष्य के सिविल सेवकों हेतु आवश्यक दक्षताएँ:

  • विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत रूपरेखा:
    • वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज में एकीकृत ढाँचे का अभाव है।
    • जबकि सिविल सेवकों को जिन तकनीकी दक्षताओं की आवश्यकता होती है, वे निजी क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी दक्षताओं के समान होती हैं जबकि डिजिटल शासन क्षमताएँ पूरी तरह से भिन्न होती हैं।
    • जनता के कल्याण हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) के उपयोग के क्रम में एक साझा भाषा और समझ की आवश्यकता है।
  • डिजिटल समाधानों में वृद्धि:
    • बुनियादी ढाँचे की कमी के कार सार्वजनिक सेवाओं में डिजिटल समाधानों को बढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
    • कभी-कभी, निजी क्षेत्र के समाधान सार्वजनिक क्षेत्र के लिये उपयुक्त नहीं होते हैं। इसलिये सार्वजनिक क्षेत्र के लिये प्रौद्योगिकी डिज़ाइन करने की आवश्यकता है।
  • सहयोग के अंतर को समाप्त करना:
    • सरकार को कभी भी एकल इकाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिये, बल्कि एक-दूसरे के साथ संवाद करने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
    • इसके अतिरिक्त मौजूदा संस्थानों को शामिल करने और उस चक्र को फिर से शुरू करने के बजाय सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

स्रोत: इंडिया टुडे

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