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जैवविविधता और पर्यावरण

केंद्र राज्यों के 'ग्रीन जीडीपी' की गणना करेगी

  • 05 Jun 2018
  • 4 min read

संदर्भ

भारत की पर्यावरणीय विविधता और समृद्धि को सार्वभौमिक रूप से पहचाना जाता है लेकिन इसका मात्रा निर्धारण कभी नहीं किया जाता। इस साल से  सरकार देश की पर्यावरणीय संपदा के ज़िला स्तरीय आँकड़ों की गणना शुरू करने का काम करेगी।

गणना कैसे की जाएगी? 

  • प्रत्येक राज्य के 'हरित' सकल घरेलू उत्पाद (green GDP) की गणना के लिये कुछ संख्याओं का उपयोग किया जाएगा।
  • मापन की यह प्रणाली नीति-निर्णयों की एक श्रृंखला के साथ मदद करेगी, जैसे भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवज़े का भुगतान, जलवायु शमन के लिये आवश्यक धन की गणना  आदि।
  • यह पहली बार है जब इस तरह का राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण किया जा रहा है।
  • इस साल सितंबर में 54 ज़िलों में एक पायलट परियोजना शुरू होगी।
  • भूमि "ग्रिड" में सीमांकित की जाएगी जो प्रति ज़िले में लगभग 15-20 ग्रिड के साथ शुरू की जाएगी।
  • राज्य की भौगोलिक स्थिति, कृषि भूमि, वन्यजीवन और उत्सर्जन के तरीकों में विविधता का आकलन किया जाएगा  और इसके मूल्य की गणना करने के लिये उपयोग किया जाएगा।
  • उदाहरण के लिये यदि कोई नो-गो क्षेत्र (no-go area) नहीं है, तो हमें इस बात की गणना करने की आवश्यकता है कि इसका आर्थिक प्रभाव क्या है।
  • सूची के लिये आवश्यक अधिकांश डेटा डेटासेट से प्राप्त किया जाएगा जो पहले से ही अन्य सरकारी मंत्रालयों के पास मौजूद है।

ग्रीन स्किलिंग प्रोग्राम 

  • सरकार ने 'ग्रीन स्किलिंग' प्रोग्राम भी लॉन्च किया है जिसके तहत युवा, विशेष रूप से स्कूल छोड़ चुके युवाओं  को 'हरित नौकरियों' की एक श्रेणी में प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • इन्हें वैज्ञानिक उपकरणों के ऑपरेटर के रूप में पर्यावरण की गुणवत्ता को मापने के साथ  प्रकृति पार्कों में फील्ड स्टाफ और पर्यटक गाइड के रूप में प्रयुक्त किया जाएगा।
  • सर्वेक्षण के लिये आवश्यक श्रमिक भी हरित-कुशल श्रमिकों से प्राप्त किये जाएंगे।

क्या होता है ‘ग्रीन जीडीपी?

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक ग्रीन जीडीपी का मतलब जैविक विविधता की कमी और जलवायु परिवर्तन के कारणों को मापना है।
  • ग्रीन जीडीपी का मतलब पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद के उन आँकड़ों से है, जो आर्थिक गतिविधियों में पर्यावरणीय तरीकों को स्थापित करते हैं।
  • किसी देश की ग्रीन जीडीपी से मतलब है कि वह देश सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिये किस हद तक तैयार है।
  • इसका मतलब यह है कि हरित जीडीपी पारंपरिक जीडीपी का प्रति व्यक्ति कचरा और कार्बन के उत्सर्जन का पैमाना है।
  • हरित अर्थव्यवस्था वह होती है जिसमें सार्वजनिक और निजी निवेश करते समय इस बात को ध्यान में रखा जाए कि कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण कम से कम हो, ऊर्जा और संसाधनों की प्रभावोत्पादकता बढ़े तथा जो जैव विविधता और पर्यावरण प्रणाली की सेवाओं के नुकसान कम करने में मदद करे।
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