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जैवविविधता और पर्यावरण

कार्बन पृथक्करण

  • 21 Jan 2021
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

कार्बन पृथक्करण/सीक्वेस्ट्रेशन (Carbon Sequestration) के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी को विकसित करने और जलवायु परिवर्तन के संकट के समाधान के लिये निवेश बढ़ाया जा रहा है।

प्रमुख बिंदु:

आवश्यकता:

  • ग्लोबल वार्मिंग की दर में वृद्धि और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की वजह से यह विचार कार्बन पृथक्करण की कृत्रिम तकनीकों में निवेश करने में मदद कर रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change) के अनुसार,  इस सदी में जलवायु परिवर्तन के तीव्र नकारात्मक प्रभावों को रोकने हेतु राष्ट्रों को वायुमंडल से 100 बिलियन से  1 ट्रिलियन टन के मध्य कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से बाहर निकालने की आवश्यकता होगी और इसे अधिक -सेअधिक पेड़ लगाकर अवशोषित किया जा सकता है।

कार्बन पृथक्करण:

  • कार्बन पृथक्करण के तहत पौधों, मिट्टी, भूगर्भिक संरचनाओं और महासागर में कार्बन का दीर्घकालिक भंडारण होता है।
  • कार्बन पृथक्करण स्वाभाविक रूप से एंथ्रोपोजेनिक गतिविधियों और कार्बन के भंडारण को संदर्भित करता है।

प्रकार:

  • स्थलीय कार्बन पृथक्करण: 
    • स्थलीय कार्बन पृथक्करण (Terrestrial Carbon Sequestration) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वायुमंडल से CO2 को प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा पेड़-पौधों से अवशोषित कर मिट्टी और बायोमास (पेड़ की शाखाओं, पर्ण और जड़ों) में कार्बन के रूप में संग्रहीत किया जाता है।
  • भूगर्भीय कार्बन पृथक्करण:
    • इसमें CO2 का भंडारण किया जा सकता है, जिसमें तेल भंडार, गैस के कुओं, बिना खनन किये गए कोल भंडार, नमक निर्माण और उच्च कार्बनिक सामग्री के साथ मिश्रित संरचनाएंँ शामिल होती हैं।
  • महासागरीय कार्बन पृथक्करण:
    • महासागरीय कार्बन पृथक्करण द्वारा वातावरण से CO2  को  बड़ी मात्रा में अवशोषित, मुक्त और संग्रहीत किया जाता है। इसके दो प्रकार हैं- पहला, लौह उर्वरीकरण (Iron Fertilization) के माध्यम से महासागरीय जैविक प्रणालियों की उत्पादकता बढ़ाना और दूसरा, गहरे समुद्र में CO2 को इंजेक्ट करना।
    • लोहे की डंपिंग फाइटोप्लांकटन ( Phytoplankton) की उत्पादन दर को तीव्र करती है, परिणामस्वरूप फाइटोप्लांकटन प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को तीव्र कर देते हैं जो CO2 को अवशोषित करने में सहायक हैं।

विधियाँ:

  • प्राकृतिक कार्बन पृथक्करण:
    • यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्रकृति ने जीवन के लिये वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को उपयुक्त तरीके से  संतुलित किया है। जीव-जंतु कार्बन डाइऑक्साइड को ठीक उसी प्रकार निष्कासित करते हैं, जैसे कि रात के समय  पौधे करते हैं।
    • प्रकृति ने पेड़-पौधों, समुद्रों, पृथ्वी और जानवरों को स्वयं कार्बन सिंक, या स्पंज का रूप प्रदान किया। इस ग्रह पर सभी कार्बनिक जीव कार्बन आधारित हैं, अत: जब पौधे और जानवर की मृत्यु हो जाती है तो अधिकांश कार्बन वापस ज़मीन में चला जाता है जिस कारण ग्लोबल वार्मिंग में इसका योगदान काफी कम हो जाता है।
  • कृत्रिम कार्बन पृथक्करण:
    • कृत्रिम कार्बन पृथक्करण कई प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिसमें कार्बन उत्पादन स्रोत पर ही कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित कर (जैसे- फैक्टरी की चिमनी) ज़मीन में दफनाया जाता है।
    • एक प्रस्तावित विधि के अनुसार, महासागरीय सीवेज के तहत कार्बन डाइऑक्साइड को समुद्र की गहराई में इंजेक्ट किया जाता है जहाँ CO2 की कम मात्रा विद्यमान होती है। CO2  स्वाभाविक रूप से पानी के दबाव और तापमान के कारण गहराई में नीचे चली जाती है तथा धीरे-धीरे समय के साथ जल में घुल जाती है।
    • एक अन्य उदाहरण भूवैज्ञानिक पृथक्करण है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड को उन पुराने तेल के कुओं, भूमिगत जल स्रोतों और कोयला खदानों जैसे भूमिगत स्रोतों में पंप किया जाता है जिनमें खनन नही किया जाना है।

कृत्रिम कार्बन पृथक्करण की चुनौतियाँ:

  • तकनीक का अभाव:
    • तथाकथित रूप से निगमों की बढ़ती संख्या तथा इंजीनियर कार्बन हटाने की तकनीक में धन का निवेश कर रहे हैं।
    • हालाँकि ये प्रौद्योगिकियाँ अभी शुरुआती अवस्था में हैं तथा इनका अधिक-से-अधिक दोहन करने की आवश्यकता है।
  • उच्च लागत:
    • कार्बन हटाने की तकनीकें इनके व्यापक उपयोग के लिये बहुत महंँगी हैं।
    • कृत्रिम कार्बन पृथक्करण महँगा, ऊर्जा गहन, अपेक्षाकृत अप्रयुक्त है तथा इसका कोई अन्य लाभ भी नहीं है।
  • पर्यावरणीय चिंता:
    • कार्बन डाइऑक्साइड को गहरे भूमिगत स्रोतों में संग्रहीत किया जा सकता है। जलाशयों का सही तरीके से निर्माण न होना, चट्टानों में दरारों का पड़ना और टेक्टोनिक प्रक्रियाएँ आदि की वजह से गैस महासागर या वायुमंडल में उत्सर्जित हो सकती हैं, जिसके अनपेक्षित परिणाम देखने को मिल सकते हैं जैसे -हासागर का अम्लीकरण आदि।

कृत्रिम कार्बन पृथक्करण की संभावनाएँ :

    • तीव्रता से कार्बन पृथक्करण: 
      • कृत्रिम  पृथक्करण की तुलना में प्राकृतिक पृथक्करण एक धीमी प्रक्रिया है। इस प्रकार यह उन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्राकृतिक  पृथक्करण  का अनुपूरक हो सकती है जो जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिये आवश्यक है।
    • उत्पादकता में वृद्धि:
      • पुराने तेल के कुओं, जलीय चट्टानी परतों और कोल संस्तर जैसे भूमिगत स्रोतों में संग्रहीत कार्बन बेहतर कृषि उपज और  तेल की प्राप्ति में सहायक है।
    • रोज़गार सृजन:
      • यह नया और उभरता हुआ क्षेत्र निजी उद्यमियों और पूंजीपतियों को आकर्षित कर रहा है, जो रोज़गार सृजन में मदद कर सकता है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

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