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पंचायतों की क्षमता मज़बूत करने के लिये पहल

  • 29 Jul 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय जल मंत्री ने झारखंड की राजधानी राँची में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग की क्षमता सुदृढ़ीकरण पहल (Capacity Strengthening Initiative) की शुरुआत की।

प्रमुख बिंदु

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रारंभिक प्रशिक्षणों में 2800 क्षेत्र प्रशिक्षकों का एक समूह बनाया जाएगा जो पूरे देश में लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुँचेंगे।
  • इस पहल का प्रमुख उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्त (Open Defecation Free-ODF) गाँवों की स्थिरता सुनिश्चित करना है।
  • इसके अतिरिक्त यह पहल क्षेत्र प्रशिक्षकों एवं पंचायत राज संस्थान के सदस्यों को ठोस और तरल अपशिष्ट के प्रबंधन के साथ-साथ सुरक्षित एवं पर्याप्त पेयजल आपूर्ति की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में सहायक होगी।

स्वच्छ भारत मिशन क्या है?

घर, समाज और देश में स्वच्छता को जीवनशैली का अंग बनाने के लिये, सार्वभौमिक साफ-सफाई का यह अभियान वर्ष 2014 में शुरू किया गया। जिसे 2 अक्तूबर, 2019 (महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती) तक पूरा कर लेना

यह वर्ष 1986 के केंद्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम, वर्ष 1999 के टोटल सेनिटेशन कैंपेन एवं वर्ष 2012 के निर्मल भारत अभियान की तुलना में परिवर्द्धित एवं सुस्पष्ट कार्यक्रम है।

यह मिशन क्यों ज़रूरी है?

  • साफ-सफाई की बुनियादी सुविधा से वंचित, खुले में शौच करने वाले विश्व के लगभग 60 प्रतिशत लोग सिर्फ भारत में हैं। अन्य बीमारियों के साथ ही इस अस्वच्छता के कारण भारत उन देशों की श्रेणी में भी है, जहाँ पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें होती हैं।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आँकड़े बताते हैं कि देश के शहरों और कस्बों में प्रतिदिन उत्पादित होने वाला एक-तिहाई कचरा सड़कों पर ही सड़ता है। केवल चार बड़े महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता) में प्रतिदिन 16 बिलियन लीटर दूषित जल पैदा होता है।

इस मिशन का उद्देश्य

  • भारत में खुले में शौच की समस्या को समाप्त करना अर्थात् संपूर्ण देश को खुले में शौच करने से मुक्त (ओ.डी.एफ.) घोषित करना, हर घर में शौचालय का निर्माण, जल की आपूर्ति और ठोस व तरल कचरे का उचित तरीके से प्रबंधन करना है।
  • इस अभियान में सड़कों और फुटपाथों की सफाई, अनधिकृत क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाना, मैला ढोने की प्रथा का उन्मूलन करना तथा स्वच्छता से जुड़ी प्रथाओं के बारे में लोगों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना शामिल हैं।

स्रोत: पी.आई.बी.

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