प्रयागराज शाखा पर IAS GS फाउंडेशन का नया बैच 10 जून से शुरू :   संपर्क करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


शासन व्यवस्था

शराबबंदी

  • 20 Nov 2019
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

पंचायती राज

मेन्स के लिये:

शराबबंदी से जुड़े विभिन्न मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में हरियाणा सरकार ने ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर शराब पर प्रतिबंध लगाने संबंधी शक्तियाँ प्रदान करने का निर्णय लिया है।

मुख्य बिंदु:

  • हरियाणा सरकार ने ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर शराब बंदी की शक्तियाँ प्रदान करने के लिये हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 31 में संशोधन का निर्णय लिया है।
  • हरियाणा सरकार की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ग्राम सभा वर्ष 2019 से 1 अप्रैल से 31 दिसंबर के मध्य कभी भी अपने क्षेत्र में शराब की दुकान खोलने पर प्रतिबंध लगाने के लिये प्रस्ताव पारित कर सकती है।
  • इस तरह के प्रस्ताव को पारित करने के लिये ग्राम सभा की बैठक का कोरम, इसके सदस्यों का 1/10 निर्धारित किया गया है।
  • हरियाणा सरकार ने राज्य में वस्तु एवं सेवा कर के बेहतर क्रियान्वयन तथा नए नियम एवं कर की दरों को निर्धारण करने के लिये संबंधित प्राधिकरणों को 6 महीने का समय दिया है।

शराबबंदी:

  • भारत में गुजरात, बिहार, मिज़ोरम और नगालैंड राज्य में पूर्ण रूप से शराबबंदी है।
  • भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्वों से संबंधित अनुच्छेद- 47 में मादक पेयों व हानिकारक नशीले पदार्थों का प्रतिषेध करने का प्रयास करने को कहा गया है।
  • हरियाणा में वर्ष 1996 में शराबबंदी का प्रयोग किया था लेकिन 1998 में इसे हटा दिया गया था।

पंचायती राज:

  • वर्ष 1957 में योजना आयोग (जिसका स्थान अब नीति आयोग ने ले लिया है) द्वारा ‘सामुदायिक विकास कार्यक्रम’ और ‘राष्ट्रीय विस्तार सेवा कार्यक्रम’ के अध्ययन के लिये ‘बलवंत राय मेहता समिति’ का गठन किया गया। नवंबर 1957 में समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था- ग्राम स्तर, मध्यवर्ती स्तर एवं ज़िला स्तर लागू करने का सुझाव दिया।
  • वर्ष 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें स्वीकार की गई तथा 2 अक्तूबर, 1959 को नागौर ज़िले (राजस्थान) में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश की पहली त्रि-स्तरीय पंचायत का उद्घाटन किया गया।
  • वर्ष 1993 में 73वें व 74वें संविधान संशोधन से भारत में पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्ज़ा प्राप्त हुआ।
  • मूल संविधान में भाग-9 के अनुच्छेद 243 में पंचायती राज से संबंधित उपबंधों की चर्चा की गई है । भाग-9 में ‘पंचायतें’ नामक शीर्षक के तहत अनुच्छेद 243-243ण (243-243O) में पंचायती राज से संबंधित उपबंध हैं।

ग्रामसभा:

  • संविधान के अनुच्छेद 243 (क) में ग्रामसभा की चर्चा की गई है।
  • ग्रामसभा कोई निर्वाचित निकाय न होकर राज्यपाल द्वारा अधिसूचित गाँव या गाँवों का समूह है, जिसके अंतर्गत वे सभी सदस्य आते हैं जो वहाँ की मतदाता सूची में शामिल हैं।

स्रोत:द हिंदू

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2