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रूस द्वारा निर्मित COVID-19 वैक्सीन: स्पुतनिक वी

  • 14 Aug 2020
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

COVID-19, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन

मेन्स के लिये:

रूस द्वारा निर्मित वैक्सीन स्पुतनिक वी का चिकित्सीय विज्ञान एवं महामारी के संदर्भ में महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में,  रूस COVID-19 वैक्सीन को आधिकारिक रूप से पंजीकृत करने और इसे उपयोग के लिये  तैयार करने वाला पहला देश बन गया है।

प्रमुख बिंदु 

  • रूस द्वारा निर्मित वैक्सीन को स्पुतनिक वी (Sputnik V) नाम दिया गया  है, जिसे सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किये गए प्रथम कृत्रिम पृथ्वी उपग्रह (Artificial Earth Satellite) स्पुतनिक-आई (Sputnik-I) के नाम पर रखा गया है।
  • यह सफलतापूर्वक अनुमोदन प्राप्त करने वाली पहली COVID-19 वैक्सीन है।
    • हालांकि, इससे पूर्व एक चीनी वैक्सीन के ‘सीमित उपयोग' (Limited Use) के लिये मंज़ूरी दी गई थी। जो एक एडिनोवायरस वेक्टर वैक्सीन (Adenovirus Vector Vaccin) है जिसे केवल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People’s Liberation Army) के सैनिकों को देने की मंज़ूरी दी गई है।
    • भारत की कोवाक्सिन (Covaxin) को मानव नैदानिक परीक्षणों ( Human Clinical Trials) के लिये अनुमोदित किया गया है। इसके अलावा एक अन्य भारतीय वैक्सीन ZyCoV-D  क्लिनिकल परीक्षण के चरण I / II में है।
  • इस वैक्सीन को रूस के रक्षा मंत्रालय के सहयोग से मास्को के गामलेया संस्थान (Moscow’s Gamaleya Institute) द्वारा विकसित किया गया है।
  • वैक्सीन SARS-CoV-2 प्रकार के एडिनोवायरस के डीएनए पर आधारित है, जो एक सामान्य कोल्ड/ज़ुकाम का वायरस है।
    • वैक्सीन में रोगज़नक़ (Pathogen) की एक छोटी मात्रा को वितरित करने के लिये एक कमज़ोर वायरस का प्रयोग किया गया जो एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्पन्न करता है।
    • वैक्सीन को दो खुराक में दिया गया है जिसमे दो प्रकार के मानव एडिनोवायरस(Human Adenovirus) विद्यमान हैं, प्रत्येक में नए कोरोनोवायरस का एस-एंटीजन (S-antigen) मौजूद है, जो मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है एवं प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
  • रूसी अधिकारियों का कहना है कि सितंबर माह में  बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन  शुरू होगा, तथा बड़े पैमाने पर टीकाकरण का कार्य अक्तूबर माह में शुरू हो सकता है।

एडिनोवायरस वेक्टर वैक्सीन:

  • इस वैक्सीन में, एडिनोवायरस को एक उपकरण के रूप में उपयोग किया गया  है जो जीन या वैक्सीन एंटीजन को लक्षित ऊतक तक पहुँचाने का कार्य करता है।
  • एडिनोवायरस: एडिनोवायरस(Adenoviruses- ADVs) 70-90 नैनोमीटर आकार के डीएनए वायरस होते हैं, जो मनुष्यों में कई बीमारियों जैसे सर्दी, श्वसन संक्रमण आदि को उत्पन्न करते हैं।
  • वैक्सीन के लिये एडिनोवायरस को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि एडिनोवायरस का DNA दोहरी कुंडली युक्त (Double Stranded) होता है जो आनुवंशिक रूप से अधिक स्थिर है तथा इंजेक्शन के बाद उनके बदलने की संभावना कम होती है।
  • रेबीज़ वैक्सीन एक एडिनोवायरस वैक्सीन है।
  • हालांकि, एडिनोवायरस वैक्सीन की कुछ कमियाँ हैं जैसे मानव में पहले से मौजूद प्रतिरक्षा (Pre-existing Immunity), ज्वलनशील प्रतिक्रियाएँ (Inflammatory Responses)आदि।
    • जिस प्रकार सामान्यतः मानव शरीर वास्तविक वायरल संक्रमणों के लिये प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करता है उसी प्रकार वह एडिनोवायरस वेक्टर के लिये भी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को विकसित कर लेता है। चूँकि एडिनोवायरस वैक्टर एक प्राकृतिक वायरस है, जो कुछ मनुष्यों के शरीर में पहले से ही मौजूद हो सकता है इसलिये यह वैक्सीन सभी के लिये कारगर साबित नहीं हो सकती है।

वैक्सीन से संबंधित चिंताएँ:

  • विशेषज्ञों द्वारा  वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता को लेकर चिंता व्यक्त की गई है क्योंकि इसके शीघ्र उत्पादन एवं इससे संबंधित प्रकाशित आंकड़ों/तथ्यों की कमी है।
  • रूस द्वारा केवल नैदानिक परीक्षण के चरण -1 के परिणामों को सार्वजनिक किया गया है, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि चरण-1 वांछित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्पन्न करने में  सफल रहा है।
  • मानव परीक्षण, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में पूरा होने में कई वर्ष लगते हैं, स्पुतनिक वी वैक्सीन के संदर्भ में दो महीने से भी कम समय में पूरे हो गए हैं।  मानव परीक्षण के  बाद के चरण महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वैक्सीन की प्रभावकारिता विभिन्न जनसंख्या समूहों पर भिन्न-भिन्न हो सकती है।
    • हालाँकि, रूस का ऐसा दावा है कि यह इस कारण संभव हुआ है क्योंकि COVID-19 वैक्सीन के उपयोगकर्त्ता मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Middle East Respiratory Syndrome-MERS) बीमारी (जोकि एक प्रकार के कोरोना वायरस से होती है) के उपयोगकर्त्ताओं से समानता रखते हैं जिसके लिये पहले ही बड़े पैमाने पर परीक्षण किया जा चुका है।

भारत में उपयोग: 

  • रूस ने दावा किया है कि भारत सहित लगभग 20 देशों ने स्पुतनिक वी वैक्सीन में रुचि दिखाई है।
    • भारत द्वारा COVID-19  वैक्सीन के विकास के लिये अमेरिका के साथ भी साझेदारी की गई है।
  • भारत में वैक्सीन के लिये मंज़ूरी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organisation- CDSCO) द्वारा दी गई है।
    • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत, भारत का राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (National Regulatory Authority-NRA) है।
    • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत, CDSCO ड्रग्स को  मंज़ूरी प्रदान करने के लिये ज़िम्मेदार निकाय है इसके अलावा यह विशषज्ञों की सलाह पर क्लिनिकल ट्रायल का संचालन, ड्रग्स के लिये मानकों को पूरा करना, देश में आयातित ड्रग्स की गुणवत्ता पर नियंत्रण तथा राज्य ड्रग कंट्रोल संगठनों की गतिविधियों का समन्वय करता है।  
  • CDSCO रूस से  मानव परीक्षण के बाद के चरण अर्थात चरण-II और चरण-III के  परीक्षणों को भारतीय जनसंख्या पर करने के लिये कह सकता है। 
    • यह भारत के बाहर विकसित सभी वैक्सीन की सामान्य आवश्यकता है।
  • CDSCO असाधारण स्थिति को देखते हुए बिना बाद के चरण के परीक्षणों (Late-Phase Trials) के वैक्सीन के प्रयोग के संदर्भ में आपातकालीन प्राधिकरण भी दे सकता है।
    • रेमेडिसविर दवा (Remdesivir Drug) को हाल ही में नए कोरोनोवायरस रोगियों पर एक चिकित्सीय के रूप में इस्तेमाल करने के लिये इसी प्रकार की आपातकालीन मंज़ूरी प्रदान की गई है।
  • हालाँकि, यह संभावना नहीं है क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को वैक्सीन दी जाती है जिसमें बहुत अधिक जोखिम है।
  • वैक्सीन के निर्माण में भी समस्याएँ हैं क्योंकि भारत में अभी इसके उत्पादन के लिये किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं हुआ है।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, विश्व की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी, वैक्सीन का बड़े स्तर पर उत्पादन करने के लिये पहले ही निर्माताओं के साथ टाई-अप में प्रवेश कर चुकी है। अन्य भारतीय कंपनियों ने भी इसी तरह के समझौते किये हैं लेकिन रूस के साथ ऐसा कोई समझौता भारत द्वारा अभी नहीं किया गया है।

वैक्सीन का विकास क्रम:

  • वैक्सीन के विकास चक्र में सामान्यतः निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं-  
    • प्रारंभिक/अनुसंधान चरण (Exploratory stage)
    • पूर्व नैदानिक चरण (Pre-clinical stage)
    • नैदानिक विकास (Clinical development)
    • विनियामक समीक्षा और अनुमोदन (Regulatory review and approval)
    • विनिर्माण (Manufacturing) 
    • गुणवत्ता नियंत्रण (Quality control)
  • वैक्सीन के निर्माण क्रम में नैदानिक ​​परीक्षण (Clinical trials)  तीन चरण की प्रक्रिया है-
    • मनुष्यों में नैदानिक ​​परीक्षणों को तीन चरणों में वर्गीकृत किया जाता है: चरण I, चरण II और चरण III  कुछ देशों में इनमें से किसी भी चरण के परीक्षण को करने के लिये औपचारिक विनियामक अनुमोदन आवश्यक है।
    • नैदानिक परीक्षण के चरण I में स्वस्थ वयस्कों की छोटी संख्या (लगभग 20) पर वैक्सीन का प्रारंभिक परीक्षण किया जाता है इस चरण में वैक्सीन के गुणों एवं इसकी सहनशीलता, नैदानिक प्रयोगशाला और औषधीय पैरामीटर का परीक्षण किया जाता है। प्रथम चरण के अध्ययन मुख्य रूप से सुरक्षा से संबंधित हैं।
    • द्वितीय चरण में बड़ी संख्या में विषयों को शामिल किया गया है जिसका उद्देश्य लक्षित आबादी एवं  इसकी सामान्य सुरक्षा (आमतौर पर इम्युनोजेनेसिटी) के संदर्भ में वैक्सीन की  उत्पादन क्षमता को विकसित किया जाना है।
  • चरण III के परीक्षणों में एक वैक्सीन की सुरक्षात्मक प्रभावकारिता एवं उसकी सुरक्षा का पूरी तरह से आकलन करने की आवश्यकता होती है। चरण III नैदानिक परीक्षण का एक महत्त्वपूर्ण चरण है क्योंकि इस चरण से प्राप्त डेटा जो उत्पाद की सुरक्षा तथा उत्पादकता से संबंधित होते हैं, के आधार पर लाइसेंस प्रदान करने के लिये निर्णय लिये जाते हैं।
  • कई वैक्सीन स्वीकृत और लाइसेंस प्राप्त करने के बाद चरण IV की औपचारिक प्रक्रिया से गुजरती है।

आगे की राह:

वर्तमान समय में जब संपूर्ण विश्व महामारी के लिये एक उचित वैक्सीन की खोज में जुटा हुआ है ऐसे समय में रूस द्वारा वैक्सीन का निर्माण एक स्वागत योग्य कदम है, इसकी प्रभावकारिता और सुरक्षा से संबंधित चिंताओं को निर्मातताओं द्वारा प्राथमिकता के आधार पर संबोधित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा  विनिर्माण एवं वितरण प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए ताकि त्वरित एवं  कुशल तरीके से  वैक्सीन को सभी को वितरित किया जा सके।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

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