IAS प्रिलिम्स ऑनलाइन कोर्स (Pendrive)
ध्यान दें:
65 वीं बी.पी.एस.सी संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगिता परीक्षा - उत्तर कुंजी.बी .पी.एस.सी. परीक्षा 63वीं चयनित उम्मीदवारअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.63 वीं बी .पी.एस.सी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा - अंतिम परिणामबिहार लोक सेवा आयोग - प्रारंभिक परीक्षा (65वीं) - 2019- करेंट अफेयर्सउत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) मुख्य परीक्षा मॉडल पेपर 2018यूपीएससी (मुख्य) परीक्षा,2019 के लिये संभावित निबंधसिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा, 2019 - मॉडल पेपरUPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़Result: Civil Services (Preliminary) Examination, 2019.Download: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा - 2019 (प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजी).

डेली अपडेट्स

एथिक्स

स्वतः संचालित कार और नैतिकता (Ethics in a self-driving car: whom should it opt to save in an accident?)

  • 03 Nov 2018
  • 3 min read

हाल ही में स्वतः संचालित वाहनों के संदर्भ में नेचर पत्रिका में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया था जिसमें स्वतः संचालित वाहनों के विषय में नैतिकता की कसौटी पर कुछ प्रश्न उठाए गए थे।

केस स्टडी

  • अध्ययन में दो स्वतः संचालित कारों की स्थितियाँ प्रदर्शित की गई थीं, पहली परिस्थिति में स्वतः संचालित कार के रूप में दो-लेन राजमार्ग पर स्वतः संचालित उस वाहन की कल्पना की गई है जिसके ब्रेक अचानक से फेल हो जाएँ और यदि यह वाहन उसी गति से आगे बढ़ता रहता है तो सड़क पार करने वाले दो पुरुषों को और साथ ही वही वाहन के लेन से बाहर निकलते ही यह कुछ कुत्तों को मार देगा।
  • वहीं, एक दूसरी परिस्थति में बताया गया है कि एक स्वतः संचालित वाहन एक आदमी, एक महिला, एक बच्चा और एक कुत्ते को ले जा रहा है।
  • इस वाहन के आगे से एक गर्भवती महिला, एक बुज़ुर्ग महिला, एक डाकू, एक लड़की और एक गरीब व्यक्ति सड़क पार कर रहे हैं और ब्रेक खराब हो जाता है, ऐसी स्थिति में अगर वाहन वापस घूमने का विकल्प चुनता है, तो यह एक बेरिकेड्स में दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा, जिससे संभवतः सवार यात्रियों को जान गवाँनी पड़ेगी।
  • अतः अब प्रश्न यह है कि दोनों ही स्थितियों में वाहन को किन्हें बचाने का विकल्प चुनना चाहिये?

परिणाम

  • औसतन, सभी देशों के उत्तरदाताओं ने जानवरों की बजाय मानव जीवन का चयन किया और बड़ी संख्या में युवाओं के जीवन को बचाने को प्राथमिता दी गई।
  • वहीं, अन्य पहलुओं पर विभिन्न देशों के उत्तरदाताओं के बीच काफी असहमति थी।
  • इस केस स्टडी में सुझाव दिया गया कि ऐसी परिस्थिति में एक ‘सार्वभौमिक नैतिक कोड’ बनाना मुश्किल होगा।
  • इस अध्ययन के भारतीय प्रतिभागियों ने पैदल चलने वालों की बजाय बुजुर्गों और महिलाओं को बचाने की दिशा में काफी हद तक अपनी राय व्यक्त्त की है।
  • हालाँकि, हम सभी मनोवैज्ञानिक सीमाओं से परे मनुष्यों की अपेक्षा स्वतः संचालित कारों को अधिक नैतिक तरीके से संचालित करने के लिये प्रोग्राम तैयार कर सकते हैं।

 

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close