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स्वतः संचालित कार और नैतिकता (Ethics in a self-driving car: whom should it opt to save in an accident?)

  • 03 Nov 2018
  • 3 min read

हाल ही में स्वतः संचालित वाहनों के संदर्भ में नेचर पत्रिका में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया था जिसमें स्वतः संचालित वाहनों के विषय में नैतिकता की कसौटी पर कुछ प्रश्न उठाए गए थे।

केस स्टडी

  • अध्ययन में दो स्वतः संचालित कारों की स्थितियाँ प्रदर्शित की गई थीं, पहली परिस्थिति में स्वतः संचालित कार के रूप में दो-लेन राजमार्ग पर स्वतः संचालित उस वाहन की कल्पना की गई है जिसके ब्रेक अचानक से फेल हो जाएँ और यदि यह वाहन उसी गति से आगे बढ़ता रहता है तो सड़क पार करने वाले दो पुरुषों को और साथ ही वही वाहन के लेन से बाहर निकलते ही यह कुछ कुत्तों को मार देगा।
  • वहीं, एक दूसरी परिस्थति में बताया गया है कि एक स्वतः संचालित वाहन एक आदमी, एक महिला, एक बच्चा और एक कुत्ते को ले जा रहा है।
  • इस वाहन के आगे से एक गर्भवती महिला, एक बुज़ुर्ग महिला, एक डाकू, एक लड़की और एक गरीब व्यक्ति सड़क पार कर रहे हैं और ब्रेक खराब हो जाता है, ऐसी स्थिति में अगर वाहन वापस घूमने का विकल्प चुनता है, तो यह एक बेरिकेड्स में दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा, जिससे संभवतः सवार यात्रियों को जान गवाँनी पड़ेगी।
  • अतः अब प्रश्न यह है कि दोनों ही स्थितियों में वाहन को किन्हें बचाने का विकल्प चुनना चाहिये?

परिणाम

  • औसतन, सभी देशों के उत्तरदाताओं ने जानवरों की बजाय मानव जीवन का चयन किया और बड़ी संख्या में युवाओं के जीवन को बचाने को प्राथमिता दी गई।
  • वहीं, अन्य पहलुओं पर विभिन्न देशों के उत्तरदाताओं के बीच काफी असहमति थी।
  • इस केस स्टडी में सुझाव दिया गया कि ऐसी परिस्थिति में एक ‘सार्वभौमिक नैतिक कोड’ बनाना मुश्किल होगा।
  • इस अध्ययन के भारतीय प्रतिभागियों ने पैदल चलने वालों की बजाय बुजुर्गों और महिलाओं को बचाने की दिशा में काफी हद तक अपनी राय व्यक्त्त की है।
  • हालाँकि, हम सभी मनोवैज्ञानिक सीमाओं से परे मनुष्यों की अपेक्षा स्वतः संचालित कारों को अधिक नैतिक तरीके से संचालित करने के लिये प्रोग्राम तैयार कर सकते हैं।

 

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