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भारतीय राजनीति

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

  • 25 Apr 2022
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस, स्वामित्व योजना

मेन्स के लिये:

73वांँ संविधान संशोधन, स्थानीय स्वशासन।

चर्चा में क्यों?  

हाल ही में देश में 24 अप्रैल, 2022 को 12वांँ राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया गया।

प्रमुख बिदु 

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस:

  • पृष्ठभूमि:  
    • पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस वर्ष 2010 में मनाया गया था। तब से भारत में प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
    • यह दिन वर्ष 1992 में संविधान के 73वें संशोधन के अधिनियमन का प्रतीक है।
  • राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर प्रदान किये जाने वाले पुरस्कार:
    • पंचायती राज मंत्रालय देश भर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों/राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को उनके अच्छे कार्य के लिये पुरस्कृत करता रहा है।
    • यह पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत दिये जाते हैं:
      • दीन दयाल उपाध्याय पंचायत शक्तीकरण पुरस्कार।
      • नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार।
      • बाल सुलभ ग्राम पंचायत पुरस्कार।
      • ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार।
      • ई-पंचायत पुरस्कार (केवल राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को दिया गया)।

पंचायती राज:

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 में पंचायतों का उल्लेख किया गया है और अनुच्छेद 246 में राज्य विधानमंडल को स्थानीय स्वशासन से संबंधित किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार दिया गया है।
  • स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र की स्थापना के लिये 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से पंचायती राज संस्थान (Panchayati Raj Institution) को संवैधानिक स्थिति प्रदान की गई और उन्हें देश में ग्रामीण विकास का कार्य सौंपा गया।
  • पंचायती राज संस्थान भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (Rural Local Self-government) की एक प्रणाली है।
    • स्थानीय स्वशासन का अर्थ है स्थानीय लोगों द्वारा निर्वाचित निकायों के माध्यम से  स्थानीय मामलों का प्रबंधन।
  • देश भर के पंचायती राज संस्थानों (PRI) में ई-गवर्नेंस को मज़बूत करने के लिये पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने एक वेब-आधारित पोर्टल ई-ग्राम स्वराज (e-Gram Swaraj) लॉन्च किया है।
    • यह ग्राम पंचायतों के नियोजन, लेखा और निगरानी कार्यों को एकीकृत करता है। एरिया प्रोफाइलर एप्लीकेशन, स्थानीय सरकार निर्देशिका (Local Government Directory- LGD) एवं सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (Public Financial Management System- PFMS) के साथ इसका संयोजन ग्राम पंचायत की गतिविधियों की आसान रिपोर्टिंग व ट्रैकिंग करता है।

73वें संवैधानिक संशोधन की मुख्य विशेषताएँ:

  • 73वें संवैधानिक संशोधन द्वारा संविधान में "पंचायतों" शीर्षक से भाग IX जोड़ा गया।
  • लोकतांत्रिक प्रणाली की बुनियादी इकाइयों के रूप में ग्राम सभाओं (ग्राम) को रखा गया जिसमें मतदाता के रूप में पंजीकृत सभी वयस्क सदस्य शामिल होते हैं।
  • उन राज्यों जिनकी जनसंख्या 20 लाख से कम है ,को छोड़कर ग्राम, मध्यवर्ती (प्रखंड/तालुका/मंडल) और ज़िला स्तरों पर पंचायतों की त्रि-स्तरीय प्रणाली लागू की गई है (अनुच्छेद 243B)
  • सभी स्तरों पर सीटों को प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरा जाना है [अनुच्छेद 243C(2)]
  • सीटों का आरक्षण:
    • अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिये सीटों का आरक्षण किया गया है तथा सभी स्तरों पर पंचायतों के अध्यक्ष के पद भी जनसंख्या में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अनुपात के आधार पर आरक्षित किये गए हैं।
    • उपलब्ध सीटों की कुल संख्या में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिये आरक्षित हैं।
    • सभी स्तरों पर अध्यक्षों के एक-तिहाई पद भी महिलाओं के लिये आरक्षित हैं (अनुच्छेद 243D)
  • कार्यकाल: 
    • पंचायतों का कार्यकाल पाँच वर्ष निर्धारित है लेकिन कार्यकाल से पहले भी इसे भंग किया जा सकता है। 
    • पंचायतों के नए चुनाव उनके कार्यकाल की अवधि की समाप्ति या पंचायत भंग होने की तिथि से 6 महीने के भीतर ही करा लिये जाने चाहिये (अनुच्छेद 243E)
  • मतदाता सूची के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिये प्रत्येक राज्य में स्वतंत्र चुनाव आयोग होंगे (अनुच्छेद 243K)
  • पंचायतों की शक्ति: पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित विषयों के संबंध में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजना तैयार करने के लिये अधिकृत किया गया है (अनुच्छेद 243G)
  • राजस्व का स्रोत (अनुच्छेद 243H): राज्य विधायिका पंचायतों को निम्नलिखित के लिये अधिकृत कर सकती है:
    • राज्य के राजस्व से बजटीय आवंटन।
    • कुछ करों के राजस्व का हिस्सा।
    • राजस्व का संग्रह और प्रतिधारण।
  • प्रत्येक राज्य में एक वित्त आयोग का गठन करना ताकि उन सिद्धांतों का निर्धारण किया जा सके जिनके आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिये पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी (अनुच्छेद 243I)
  • छूट:
    • यह अधिनियम सामाजिक-सांस्कृतिक और प्रशासनिक कारणों से नगालैंड, मेघालय तथा मिज़ोरम एवं कुछ अन्य क्षेत्रों में लागू नहीं होता है। इन क्षेत्रों में शामिल हैं:
      • आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान राज्यों में पाँचवीं अनुसूची के तहत सूचीबद्ध अनुसूचित क्षेत्र
      • मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र जिसके लिये ज़िला परिषदें मौजूद हैं।
      • पश्चिम बंगाल राज्य में दार्जिलिंग ज़िले के पहाड़ी क्षेत्र जिनके लिये दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल मौजूद है।
    • हालाँकि संसद ने पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 [The Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act-PESA] के माध्यम से भाग 9 और 5वीं अनुसूची क्षेत्रों के प्रावधानों को बढ़ाया है।
      • वर्तमान में 10 राज्य (आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना) पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में शामिल हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा  विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs):

प्रश्न: स्थानीय स्वशासन को एक अभ्यास के रूप में सर्वोत्तम रूप से समझाया जा सकता है। (2017) 

(a) संघवाद
(b) लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण
(c)  प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल
(d) प्रत्यक्ष लोकतंत्र 

उत्तर: (b) 


प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

  1. किसी भी व्यक्ति के पंचायत का सदस्य बनने के लिये निर्धारित न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
  2. समयपूर्व विघटन के बाद पुनर्गठित पंचायत केवल शेष अवधि के लिये ही मान्य होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों   
(d) न तो 1 और न ही 2 

उत्तर: (b) 

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243F के अनुसार, ग्राम पंचायत का सदस्य बनने के लिये आवश्यक न्यूनतम आयु 21 वर्ष है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • भारतीय संविधान की धारा 243ई(4) के अनुसार,  पंचायत की अवधि की समाप्ति से पहले एक पंचायत के विघटन पर गठित पंचायत केवल उस शेष अवधि के लिये ही कार्य करती है। अत: कथन 2 सही है।
  • अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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