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इतिहास, विचार और दुनिया

सभ्यता की तोप और नस्लीय घृणा : यूक्रेन संकट

28 Feb, 2022

ख़ून अपना हो या पराया हो नस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर जंग मशरिक़ में हो कि मग़रिब में अम्न-ए-आलम का ख़ून है आख़िर साहिर लुधियानवी की इस नज़्म को सार रूप में कहें तो वो कह रहे...

इतिहास, विचार और दुनिया

रूस-यूक्रेन विवाद का इतिहास और वर्तमान संकट

26 Feb, 2022

वह 27 फरवरी, 2014 की रात थी। हथियारबंद लोगों ने क्रीमिया में संसद और मंत्रिपरिषद की इमारतों को अपने नियंत्रण में ले लिया और उन पर रूसी झंडे लहरा दिये। अगली सुबह जल्दी ही...

इतिहास, विचार और दुनिया

कर्मक्षेत्र का द्वंद्व और जीवन की राह

10 Feb, 2022

जीवन की सतत गतिशीलता के बीच हम यह सोचना भूल जाते हैं कि हमारा प्रवाह किस दिशा में हो रहा है और इस प्रावहशीलता के क्या मायने हैं। क्या जीवन हमें जी रहा है या हम जीवन को जी रहे...

इतिहास, विचार और दुनिया

‘अराजनैतिक’ होने की ‘राजनीति’

31 Jan, 2022

बीते दिनों अनिल कपूर की ‘नायक’ फिल्म देखी…एक दिन का सीएम। फिल्म में परेश रावल साहब का एक फेमस डायलॉग है….’पॉलिटिक्स एक गटर है’.. ये तो हुई ‘रील’ की बात..पर...

इतिहास, विचार और दुनिया

किसान दिवस

23 Dec, 2021

प्रेमचंद जी द्वारा लिखित कहानी पूस की रात का हल्कू तो आपको याद ही होगा। यह वह लापरवाह किसान है जो ठंड के आगे विवश होकर हार मान लेता है और अपनी फसल जानवरों के हवाले कर देता है।...

इतिहास, विचार और दुनिया

कल्पना कर पाना ही सब कुछ है, कल्पना न कर पाना जीवन का अंत

25 Oct, 2021

कल्पना मानव मस्तिष्क की सृजनशीलता की पहली कड़ी है। कोई भी विचार, सिद्धांत, आविष्कार चाहे वह आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, विज्ञान एवं तकनीकी, शिक्षा, मूल्य, दर्शन किसी...

इतिहास, विचार और दुनिया

विजयादशमी विशेष: शरण में आए व्यक्ति की रक्षा

14 Oct, 2021

कोरोना काल के पहले 2019 की विजयदशमी पर मैं रामेश्वरम गया था। धनुषकोडि से लौटते हुए मैं एक ऊँचे स्थल पर बने विभीषण मंदिर में भी गया। देश का शायद यह अकेला विभीषण मंदिर होगा।...

इतिहास, विचार और दुनिया

हिंदी भाषा का सामाजिक दृष्टिकोण

14 Sep, 2021

भाषाओं का भी अपना एक समाज होता है, संस्कृति होती है। भाषाएँ केवल सामाजिक सम्प्रेषण का माध्यम भर नहीं होतीं यह सामाजिक निर्मिति का भी महत्त्वपूर्ण आधार है। समाज भाषा की...

इतिहास, विचार और दुनिया

सरकारी हिंदी : ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या!

11 Sep, 2021

सुप्रसिद्घ कवि रघुवीर सहाय ने लिखा था कि “हिंदी जैसे कि दुजाहू की बीवी”। यानी हिंदी की सराहना तो सब कर लेंगे पर जब उसको उसका सम्मान देने की बात आएगी तो उसके साथ किसी...

इतिहास, विचार और दुनिया

हिंदी भाषा और ज्ञान-विज्ञान की यात्रा

10 Sep, 2021

हाल में एक विद्यार्थी का संदेश मिला कि यूरोप पर और खास कर रोमन सभ्यता पर हिंदी में एक अच्छी किताब बता दूँ। समस्या यह है कि मैं स्वयं इतिहास की किताबों के लिये अंग्रेज़ी...

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