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जीव विज्ञान और पर्यावरण

पर्यावरण संरक्षण में व्यापार नियमों की भूमिका

  • 28 May 2020
  • 19 min read

देशों द्वारा पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को तीव्र करना अत्यंत आवश्यक है। मौजूदा जलवायु नीतियों के कारण वैश्विक समुदाय पूर्व-औद्योगिक स्तर से लगभग 3˚ सेल्सियस तापमान वृद्धि का सामना कर रहे है।

  • मानवीय गतिविधियों के कारण पौधों और पशुओं की लगभग 1 मिलियन प्रजातियों पर विलुप्ति का संकट बना हुआ जिससे खाद्य सुरक्षा और आजीविका पर प्रभाव पड़ सकता है। प्लास्टिक और प्रदूषण के अन्य रूप विश्व भर में भूमि और जल संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं।
  • वर्तमान में व्यापार और निवेश को सतत् विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित करने की आवश्यकता पे ध्यान दिया जा रहा है। वैश्विक व्यापार ने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और नवाचारों को त्वरित किया है। निरंतर वृद्धि के साथ यह सुनिश्चित करने के प्रयास किये जाने चाहिये कि यह पर्यावरणीय कार्रवाइयों को भी बढ़ावा देता है।
  • यह विवरण पर्यावरणीय लक्ष्यों का समर्थन करने के लिये व्यापार तंत्र का उपयोग करने के प्रयासों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है और ऐसे पाँच तरीकों को रेखांकित करता है जिनके द्वारा व्यापार नियमों के अनुप्रयोग से हरित वैश्विक अर्थव्यवस्था (Greener Global Economy) को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • ये प्रस्ताव सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की वैश्विक चुनौतियों के समाधान में व्यापार नीति की भूमिका के मुद्दे पर बढती रुचि के परिप्रेक्ष्य में अभिकल्पित किये गए हैं। इसमें व्यापार नियमों और सतत् कार्रवाई के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिये बेहतर हितधारक अनुबंध हेतु सुझाव भी दिये गए हैं।
    • कार्रवाई हेतु प्रोत्साहन तभी विश्वसनीय होंगे जब सरकारें SDG 14.6 में अभिकल्पित लक्ष्य के अनुसार इस वर्ष विश्व व्यापार संगठन (WTO) में हानिकारक मत्स्य पालन सब्सिडी को समाप्त करने के किसी समझौते पर पहुँचेगी।
    • विश्व के एक-तिहाई मत्स्य भंडार अभी भी अतिदोहन से प्रभावित है, फिर भी इसे प्रत्येक वर्ष $22 बिलियन की अनुमानित सार्वजनिक सहायता दी जाती है।
    • यह व्यापार नीति-निर्माताओं पर निर्भर है कि वे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय लक्ष्यों पर कार्रवाई करने में अपनी समर्थता व्यक्त करें।

अब तक किये गए प्रयास 

विश्व व्यापार संगठन में 

  • व्यापार उदारीकरण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संबंधों को काफी पहले ही मान्यता दी जा चुकी है। मारकेश समझौते, जिसके तहत विश्व व्यापार संगठन की स्थापना की गई थी, की प्रस्तावना में सरकारों द्वारा इसे स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है कि व्यापार को सतत् विकास तथा पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के प्रयासों के अनुरूप होना चाहिये।
    • विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के समय व्यापार और पर्यावरण पर समिति (Committee on Trade and Environment- CTE) की स्थापना की गई थी और बाद की मंत्रिस्तरीय बैठकों में ऐसी व्यापारिक प्रणाली के महत्त्व पर जोर दिया गया था जो सतत् विकास का समर्थन करती है। विश्व व्यापार संगठन के विवादों में वृद्धि ने भी पर्यावरण नीति के लक्ष्यों का काफी हद तक समर्थन किया है ताकि प्रासंगिक उपायों को निष्पक्ष तरीके से लागू किये जा सके।
    • पर्यावरण हितैषी वस्तुओं पर शुल्क कम करने के समझौते के लिये बहुपक्षीय वार्ता अंततः वाणिज्यिक प्राथमिकताओं के रूप में चिह्नित की गई और घरेलू राजनीति में भी इसे स्वीकार किया गया।
    • CTE महत्त्वाकांक्षी कार्रवाइयों की बजाय वैचारिक आदान-प्रदान हेतु एक उपयोगी मंच सिद्ध हुआ। सरकार की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने हेतु व्यापार नीतियों के लिये बहुत कुछ किया जाना शेष है।
  • हालाँकि, पर्यावरण लक्ष्यों की प्राप्ति को सुविधाजनक बनाने में वैश्विक व्यापार नीति-निर्माताओं की रुचि जाग्रत हो रही है। WTO के चुनिंदा सदस्य व्यापार और प्लास्टिक अपशिष्ट में कमी लाने हेतु वार्ताएँ शुरू करने पर विचार कर रहे हैं जो एक अन्य गठबंधन व्यापार और पर्यावरण को लेकर व्यापक कार्रवाइयों पर सुझाव प्रस्तुत करेगा।

मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की भूमिका 

  • कई क्षेत्रीय और द्विपक्षीय FTAs में पर्यावरणीय मुद्दों पर केंद्रित अध्याय शामिल हैं, हालाँकि महत्वाकांक्षा और प्रभावशीलता का स्तर भिन्न-भिन्न है। ये अध्याय अवैध वन्यजीवों की तस्करी, पर्यावरण कानूनों के  प्रवर्त्तन, पर्यावरणीय वस्तुओं के व्यापार के लिये गैर-प्रशुल्क बाधाओं तथा वायु की गुणवत्ता में सुधार एवं समुद्री अपशिष्ट को कम करने जैसे मुद्दों की एक विस्तृत शृंखला को संबोधित करते हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौता (US-Mexico-Canada Agreement-USMCA), ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप के लिये व्यापक और प्रगतिशील समझौता (Comprehensive and Progressive Agreement for Trans-Pacific Partnership- CPTPP) जैसे FTA पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को बाध्यकारी रूप देते हुए पर्यावरणीय प्रावधानों पर विवादों को हल करने की व्यवस्था भी निर्धारित करते हैं, जबकि कुछ घरेलू कानून प्रवर्तन पर निर्भर है। इसके अलावा कई FTA में बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं की बजाय केवल सहयोग की आवश्यकता होती है।
  • कुछ व्यापार समझौतों जैसे यूरोपीय संघ-कनाडा व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता (Comprehensive Economic Trade Agreement- CETA) में स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन का उल्लेख किया गया हैं, जो वर्तमान और भविष्य की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन व्यवस्थाओं के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापार से संबंधित पहलुओं पर सहयोग करने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • इसके अलावा छह अर्थव्यवस्थाओं के एक समूह ने हाल ही में जलवायु परिवर्तन, व्यापार और स्थिरता (Agreement on Climate Change, Trade and Sustainability-ACCTS) पर एक समझौते की दिशा में वार्ताएँ शुरू की हैं।
    • कथित तौर पर इस समझौते में पर्यावरणीय वस्तुओं पर शुल्क हटाने, पर्यावरणीय सेवाओं पर प्रतिबद्धताओं, जीवाश्म-ईंधन सब्सिडी का तार्किकीकरण तथा स्वैच्छिक पर्यावरण-लेबलिंग कार्यक्रम शामिल हैं।
    • वर्ष 2016 के बाद से एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (Asia-Pacific Economic Cooperation- APEC) अर्थव्यवस्थाओं ने $300 बिलियन के क्षेत्रीय हरित व्यापार को बढ़ावा देने के लिये 54 पर्यावरणीय वस्तुओं की एक सूची पर प्रशुल्क में 5% या उससे कम की कटौती करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

पर्यावरण के लिये व्यापार नीति

1. पर्यावरणीय वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार की सुविधा, चक्रीय अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण

  • आने वाले वर्षों में विश्व भर में पर्यावरणीय वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को आसान बनाना महत्त्वपूर्ण होगा। स्वच्छ ऊर्जा आधारित वस्तुओं पर उच्च शुल्क, स्थायी विकास की लागत को बढ़ाते हैं। सेवा व्यापार प्रतिबंधों से भी पर्यावरणीय क्षेत्रों में परियोजना लागत बढ़ जाती है।
  • इसमें अपशिष्ट निपटान जैसी प्रत्यक्ष पर्यावरणीय सेवाएँ, साथ ही घटकों के संयोजन, स्थापना, परीक्षण, तकनीकी सहायता और पर्यावरणीय उत्पादों के अनुसंधान एवं विकास से संबंधित अप्रत्यक्ष सेवाएं भी शामिल हैं। वैश्विक उत्पादन नेटवर्क के संदर्भ में सीमा-पार वस्तुओं के प्रवाह में बाधा डालने वाले घरेलू नियम चक्रीय अर्थव्यवस्था के विस्तार के प्रयासों को बाधित कर सकते हैं।
    • पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं सहित नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, प्लास्टिक अपशिष्ट निपटान, पुनर्चक्रीकरण, वायु प्रदूषण नियंत्रण आदि से संबंधित वस्तुओं पर शुल्क हटाने के लिये सरकारें एकपक्षीय या किसी समूह के हिस्से के रूप में कार्रवाई कर सकती हैं। उद्योग के साथ संवाद व्यापार बाधाओं का सामना करने वाली नवीनतम तकनीकों की पहचान करने में भी महत्त्वपूर्ण होगा।
    • सरकारों को पर्यावरणीय सेवाओं पर प्रतिबद्धताओं को लागू करने और दायित्वों के दायरे पर अस्पष्टता से बचने के लिये परिभाषाओं पर सहमत होने, पर्यावरणीय सेवाओं की आपूर्ति हेतु सहायक कंपनियों की स्थापना में बाधाएँ दूर करने और डेटा ट्रांसफर से संबंधित समस्याओं के समाधान के प्रयास करने चाहिये जो सॉफ्टवेयर अपडेट, प्रदर्शन की निगरानी आदि में रुकावट उत्पन्न कर सकती हैं।
    • पर्यावरणीय वस्तुओं और सेवाओं को प्रभावित करने वाले विनियमों के लिये अंतर्राष्ट्रीय मानकों का उपयोग करना और अन्य बाजारों में संबंधित हितधारकों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अंतराल को पूरित करने के लिये प्रोत्साहित करना।
      • पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण इको-लेबलिंग पहल को बढ़ावा देना। हरित वस्तुओं हेतु उत्पाद बाजार परीक्षण (अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रिया) के लिये व्यापार बाधाओं को कम करने के लिये कार्य करना।
    • चुनौतियों की पहचान करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये सरकारों को उद्योग और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिये।
      • कार्रवाईयों में उत्पाद के जीवन चक्र का विस्तार करने के लिये पुनर्विनिर्मित वस्तुओं के व्यापार में बाधाओं को दूर करना और स्क्रैप एवं अन्य प्रतिलब्ध सामग्री के पुनर्नवीनीकरण और द्वितीयक सामग्री के रूप में बेचने के लिये व्यापार की सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल होना चाहिये।
      • उद्योग और अन्य विशेषज्ञों के साथ चर्चा नीति निर्माताओं को आकस्मिक व्यापार बाधाओं सहित बाजारों के बीच जटिल या असंगत नियमों के बारे में सूचित कर सकती है।

2. जीवाश्म-ईंधन सब्सिडी को रिपोर्ट करना, कम करना एवं समाप्त करना 

G20 सरकारों ने अनावश्यक खपत को बढ़ावा देने वाली अदक्ष जीवाश्म ईंधन की सब्सिडी को सीमित करने और चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। यह सब्सिडी नकद हस्तांतरण, कर क्रेडिट एवं छूट और कम पेट्रोल की कीमतों सहित कई रूपों में मिलती है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency-IEA) का अनुमान है कि इस तरह की सब्सिडी प्रतिवर्ष 526 बिलियन डॉलर होती है। इन सब्सिडी में कटौती करने से नवीन प्लास्टिक के उत्पादन की लागत में भी वृद्धि होगी जिससे प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा।

  • अदक्ष जीवाश्म-ईंधन सब्सिडी में सुधार के लिये कई सरकारें WTO की चर्चा में शामिल हो रही हैं। 
  • G20 सरकारों ने वर्ष 2025 में पूरा करने के लक्ष्य के साथ जीवाश्म-ईंधन सब्सिडी की समीक्षा शुरू की है, जिसे और त्वरित किया जा सकता है।
  • WTO की पहल पारदर्शिता और रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सकती है और इन सब्सिडी से व्यापार और संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों के मूल्यांकन को तेज कर सकती है। उद्योग बाजार प्रोत्साहनों के स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में निवेश के प्रभाव को उजागर कर सकते हैं।

3. जलवायु नीतियों पर संवाद

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अंतर्गत सदस्य सरकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान प्रस्तुत किये है और वर्ष 2020 से प्रत्येक पाँच वर्षों में इन्हें अद्यतन करने का संकल्प लिया है। कुछ देशों को चिंता है कि अन्य देशों की कम प्रतिबद्धताओं से घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्द्धा में कमी आ सकती है।

  • व्यापार नियमों और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के बीच संरेखण हेतु व्यापार और जलवायु परिवर्तन नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना।
  • कार्बन मूल्य निर्धारण व्यवस्था और कार्बन समायोजन सीमांकन इस प्रकार करना कि ये अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप हो और व्यापारिक भागीदारों के लिये भी उचित हो। अत्यधिक प्रशासनिक बोझ से बचा जाना चाहिये, विशेष रूप से लघु और मध्यम आकार के उद्यमों के लिये। 

4.अग्रिम हरित सरकारी खरीद

  • वैश्विक सार्वजनिक खरीद (Global Public Procurement) का प्रतिवर्ष 9.5 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। हरित सरकारी खरीद नीतियाँ हरित उत्पादों के उपयोग और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • उदाहरण के लिये हरित सरकारी खरीद नीतियाँ एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करके प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती हैं, जबकि कुछ बाजारों में दिशा-निर्देश वाहनों, विद्युत आदि की खरीद के लिये संधारणीय मानदंड निर्धारित कर सकते हैं।
  • विश्व व्यापार संगठन के सार्वजनिक खरीद समझौते के 48 हस्ताक्षरकर्त्ता हैं और यह प्रतिवर्ष 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक की बोली लगाने (Bids) की सुविधा प्रदान करता है। पक्षकारों ने एक सतत् अद्यतन प्रक्रिया के भाग के रूप में स्थायी खरीद कार्यक्रम पर सहयोग के लिये भी सहमति व्यक्त की है। इन प्रयासों में उन नीतियों की पहचान करना शामिल है जो व्यापार दायित्वों के अनुरूप, कुशल और स्थायी खरीद को प्रोत्साहित करती हैं और विश्व व्यापार संगठन वार्ताओं का एक उपयोगी भाग है।

5. सहयोग में सुधार

पर्यावरणीय संकटों से उत्पन्न जोखिमों से निपटने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। जलवायु प्रतिबद्धताओं में व्यापार का अपर्याप्त संदर्भ दिया गया है। जबकि अधिकांश व्यापार समझौते, जिनमे  जलवायु परिवर्तन के संदर्भ छिटपुट होता है, हालाँकि स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिये हालिया प्रतिबद्धताएं प्रसंशनीय हैं। यह व्यापार तथा व्यापार नीतियों के पर्यावरणीय संधारणीय लक्ष्यों के अनुरूप संरेखण हेतु सरकारों, व्यापार, वैज्ञानिकों और नागरिक समाज के बीच अधिक सहयोग के अवसर उपलब्ध कराता है।

  • असंगतताओं की पहचान करने और सभी हितधारकों को लाभांश सुनिश्चित करने हेतु व्यापार, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन नीति क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाना। ऐसा करने में विकासशील देशों की आवश्यकताओं और कमजोर श्रमिकों की न्यायपूर्ण मांगों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • सरकारों को विशेषज्ञों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज सहित विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग तंत्र स्थापित करना चाहिये। वैश्विक व्यापार और पर्यावरण चर्चा के संबंध में गैर-राज्य हितधारकों से इनपुट और कार्रवाई हेतु एक औपचारिक तंत्र स्थापित करने के लिये जलवायु समुदाय से प्रेरणा ग्रहण की जानी चाहिये जैसा लीमा-पेरिस एक्शन एजेंडा में किया गया था। यह अंतर्राष्ट्रीय नीति-निर्माण का कंपनियों से और गैर-लाभकारी प्रयासों का ग्रीन वैल्यू चेन से बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित करेगा।
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