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उत्तराखंड

टनल पार्किंग शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा उत्तराखंड

  • 29 Jul 2022
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

28 जुलाई, 2022 को उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के संयुक्त मुख्य प्रशासक पीसी दुम्का ने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार पहाड़ में पार्किंग की समस्या से निजात दिलाने के लिये टनल पार्किंग की शुरुआत कर रही है।

प्रमुख बिंदु 

  • राज्य सरकार का मानना है कि टनल पार्किंग अभी तक देश में कहीं भी नहीं है। उत्तराखंड इस तरह का प्रयोग करने वाला देश का पहला राज्य होगा। इससे निश्चित तौर पर पार्किंग की बड़ी समस्या का समाधान होगा।
  • पीसी दुम्का ने बताया कि टनल निर्माण को लेकर अभी काम शुरुआती चरण में है। जब इनकी डीपीआर बनेगी तो जहाँ जिस तरह की स्वीकृति की ज़रूरत होगी, उसे पूरा किया जाएगा। अभी तक जो टनल स्थल चिह्नित हुए हैं, वे ऐसे हैं कि सड़क के एक तरफ से टनल में गाड़ी पार्क होगी और दूसरी तरफ सड़क पर बाहर निकल जाएगी।
  • प्रदेश भर में कुल करीब 180 पार्किंग स्थल चिह्नित किये गए हैं, जिनमें टिहरी और पौड़ी ज़िले में पहले चरण में 12 टनल पार्किंग के स्थान चिह्नित किये गए हैं।
  • एनएचआईडीसीएल के अलावा टनल पार्किंग निर्माण के लिये कैबिनेट ने टीएचडीसी, यूजेवीएनएल और आरवीएनएल को कार्यदायी संस्था बना दिया है।
  • आरवीएनएल पहले से ही पहाड़ में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन का काम कर रही है। आरवीएनएल ने कई बड़ी टनल का निर्माण भी किया है। वहीं, यूजेवीएनएल और टीएचडीसी ने जल विद्युत परियोजनाओं के लिये टनल निर्माण किये हैं।
  • टनल पार्किंग बनाने में राज्य सरकार को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इनमें सबसे पहले चुनौती पर्यावरणीय स्वीकृति की है। केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति के बाद ही काम शुरू हो सकेगा। ऐसी ही अनुमति की वजह से प्रदेश में कई जल विद्युत परियोजनाएँ अटकी पड़ी हैं।
  • दूसरी ओर, इन टनल के निर्माण के दौरान निकलने वाला मलबा भी बड़ी चुनौती बनकर उभर सकता है। हालाँकि, सरकार का तर्क है कि सभी नियमों का पालन करते हुए टनल निर्माण किये जाएंगे।
  • वही पर्यावरणविदों का मानना है कि टनल पार्किंग पहाड़ के महाविनाश की पटकथा साबित होगी। अगर प्रदेश में 558 बांध बन गए तो करीब डेढ़ हज़ार किमी. सुरंगें बनेंगी। लाखों लोग टनल पर आ जाएंगे। रेल लाइन की वजह से जहाँ भी टनल निर्माण हुए हैं, वहाँ ऊपर के गाँवों में दरारें आ गई हैं।
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