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हरियाणा में निजी क्षेत्र में 75 फीसदी आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

  • 18 Feb 2022
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

17 फरवरी, 2022 को निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों को 75 फीसदी आरक्षण देने के कानून पर रोक लगाने वाले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।

प्रमुख बिंदु 

  • गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा है कि एक महीने के अंदर इस मामले में निर्णय लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए और इस दौरान रोज़गार दाताओं के खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाया जाए।
  • विदित है कि 15 जनवरी, 2021 को हरियाणा सरकार ने हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों का रोज़गार अधिनियम, 2020 राज्य में लागू किया था। यह कानून नौकरी चाहने वालों को निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है, जो ‘हरियाणा राज्य के निवासी’हैं।
  • इसके बाद 3 फरवरी, 2022 को हाईकोर्ट ने इस निर्णय पर रोक लगा दी थी। फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के साथ अन्य ने हाईकोर्ट को बताया था कि उनके यहाँ कर्मचारियों का चयन योग्यता के अनुसार किया जाता है। हाईकोर्ट से कहा गया कि अगर कंपनियाँ अपने मनपसंद कर्मचारी नहीं चुन पाएंगी तो उनके कारोबार पर असर पड़ेगा। 
  • हाईकोर्ट में याचिकाकर्त्ता की तरफ से दलील दी गई थी कि अगर सरकार का यह फैसला लागू होता है तो रोज़गार को लेकर अराजकता फैल जाएगी और योग्य लोग वंचित रह जाएंगे। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दे दी। 
  • इस कानून के तहत निजी कंपनियाँ, सोसाइटियाँ, ट्रस्ट और साझेदारी फर्म भी शामिल हैं और यह उन नौकरियों पर भी लागू होता है, जो अधिकतम सकल मासिक वेतन या 30,000 रुपए तक की मज़दूरी प्रदान करती हैं। केंद्र या राज्य सरकारें या इन सरकारों के स्वामित्व वाला कोई भी संगठन अधिनियम के दायरे से बाहर है।
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