बिहार
गया में पर्यटन विकास हेतु सिंगल-विंडो सिस्टम
- 02 Jan 2026
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चर्चा में क्यों?
गया ज़िला प्रशासन ने गया और बोधगया में पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित तथा सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पर्यटन विकास हेतु सिंगल-विंडो सिस्टम का प्रस्ताव रखा है।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: पर्यटन को प्रोत्साहित करना, आगंतुकों के लिये सुविधाओं को सुदृढ़ करना और पर्यटन क्षेत्र में व्यवसाय संचालन को सरल बनाना।
- सिंगल-विंडो सिस्टम: यह केंद्रीकृत तंत्र पर्यटन से संबंधित सभी अनुमोदन, मंजूरी और जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है।
- यह सिस्टम नौकरशाही में विलंब कम करता है और विभागीय समन्वय को बेहतर बनाता है।
- पर्यटन के लिये प्रमुख क्षेत्र: बोधगया, विष्णुपाद और महाबोधि मंदिर गलियारे तथा अन्य धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थलों पर विशेष ज़ोरदिया गया है।
- आर्थिक प्रभाव: स्थानीय रोजगार सृजन, लघु और सूक्ष्म व्यवसायों को प्रोत्साहन तथा ज़िले की समग्र अर्थव्यवस्था के मज़बूत होने की संभावना है।
बोधगया मंदिर
- बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थल है।
- यह भगवान बुद्ध के जीवन और विशेष रूप से ज्ञान प्राप्ति से संबंधित है।
- महाबोधि मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद 260 ईसा पूर्व में कराया था।
- यह पूरी तरह से ईंटों से निर्मित सबसे शुरुआती बौद्ध मंदिरों में से एक है।
- इसे वर्ष 2002 से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
- चीनी तीर्थयात्री ह्वेन त्सांग ने इस मंदिर का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।
- वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण गुप्त शासकों द्वारा 5वीं या 6वीं शताब्दी ईस्वी में कराया गया था।
महाबोधि मंदिर
- परिचय: यह वह स्थल है जहाँ गौतम बुद्ध ने महाबोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। मूल मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने ईसा पूर्व 3वीं शताब्दी में कराया था, जबकि वर्तमान संरचना 5वीं–6वीं शताब्दी की है।
- स्थापत्य विशेषताएँ: इसमें 50 मीटर ऊँचा भव्य मंदिर (वज्रासन), पवित्र बोधि वृक्ष और बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जुड़े छह अन्य पवित्र स्थल शामिल हैं, जो प्राचीन वोटिव स्तूपों से घिरे हुए हैं।
- यह गुप्त काल के प्रारंभिक ईंट से बने मंदिरों में से एक है और वज्रासन (डायमंड थ्रोन) को मूल रूप से सम्राट अशोक ने बुद्ध के ध्यान स्थल को चिह्नित करने के लिये स्थापित किया था।
- पवित्र स्थल: बोधि वृक्ष (उस वृक्ष का प्रत्यक्ष वंशज जिसके नीचे बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था), अनिमेष लोचन चैत्य (बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के पश्चात ध्यानस्थ होने का स्थल) आदि।
- मान्यता: यह स्थल वर्ष 2002 से UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध है।