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State PCS Current Affairs


राजस्थान

प्रदेश में अल्ट्रा मेगा अक्षय ऊर्जा पावर पार्क्स की स्थापना हेतु टी.एच.डी.सी.एल. एवं आर.आर.ई.सी.एल. के मध्य 10,000 मेगावाट क्षमता का जे.वी. एग्रीमेंट निष्पादित

  • 31 Jan 2023
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

30 जनवरी, 2023 को भारत सरकार की मिनीरत्न ए-श्रेणी की कंपनी टी.एच.डी.सी. लिमिटेड तथा राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के मध्य जयपुर में जॉइंट वेंचर कम शेयर होल्डिंग एग्रीमेंट निष्पादित किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष आशुतोष ए.टी. पेडणेकर तथा प्रबंध निदेशक अनिल ढाका की उपस्थिति में राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के तकनीकी निदेशक डी.के. शर्मा तथा टी.एच.डी.सी. के चीफ जनरल मैनेजर (सोलर) एस.एस. पवार द्वारा उक्त समझौते पर हस्ताक्षर किये गए।
  • टी.एच.डी.सी. एवं आर.आर.ई.सी. की जॉइंट वेंचर कंपनी में 74:26 प्रतिशत हिस्से की क्रमश: भागीदारी होगी।
  • इस अवसर पर राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष आशुतोष ए.टी. पेडणेकर ने बताया कि इस जॉइंट वेंचर कंपनी द्वारा प्रदेश में 10,000 मेगावाट क्षमता की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएँ प्रदेश के विभिन्न स्थानों में चरणबद्ध रूप से विकसित की जाएंगी, जिससे सस्ती अक्षय ऊर्जा की प्राप्ति होगी।
  • इस अवसर पर पेडणेकर द्वारा टी.एच.डी.सी. अधिकारियों के साथ मिलकर फ्लोटिंग सोलर और पंप स्टोरेज हाईड्रो प्लांट को भी राजस्थान में विकसित कराए जाने के लक्ष्यों पर विचार-विमर्श किया गया।  
  • आशुतोष ए.टी. पेडणेकर ने बताया कि प्रदेश में स्थापित होने वाले इस अल्ट्रा मेगा अक्षय ऊर्जा पावर पार्क्स की स्थापना प्रदेश में केंद्र सरकार के उपक्रम के साथ अक्षय ऊर्जा के विकास की इस तरह की एक अनूठी पहल साबित होगी।
  • राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक अनिल ढाका ने बताया कि प्रदेश में 10,000 मेगावाट क्षमता के अल्ट्रा मेगा अक्षय ऊर्जा पार्क्स की स्थापना से राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ-साथ राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के कार्य-कलापों के दायरे का विकास होगा।
  • टी.एच.डी.सी. के सी.जी.एम. (सोलर) एस.एस. पवार ने बताया कि इस अल्ट्रा मेगा अक्षय ऊर्जा पार्क्स की स्थापना पर लगभग 40,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10,000 व्यक्तियों को रोज़गार प्राप्त होगा, जिससे स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर का विकास होगा।  प्रथम चरण में वर्ष 2025 तक 2000 मेगावाट क्षमता के सोलर पॉर्क्स का विकास किया जाएगा।
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